स्वामी अवधेशानंद जी गिरि के जीवन सूत्र:सभी में एक ही परमात्मा समाया हुआ है, परमात्मा एक है और वही अनेक रूपों में दिखता है
संसार में कई विभिन्नताएं हैं, यही हमारी सृष्टि का सौंदर्य है। यहां अनेक जातियां हैं, मत हैं, कई पंथ-संप्रदाय हैं, लेकिन हमारी संस्कृति कहती हैं कि सभी में एक ही परमात्मा समाया हुआ है। परमात्मा एक ही है और वही हमें अनेक रूपों में दिखाई देता है। परमात्मा एक से अनेक होकर दिखाई देता है। अनेक ईश्वर नहीं हैं, ईश्वर एक ही है। आज जूनापीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद जी गिरि के जीवन सूत्र में जानिए हमारी संस्कृति का संदेश क्या है? आज का जीवन सूत्र जानने के लिए ऊपर फोटो पर क्लिक करें।
स्वामी अवधेशानंद जी गिरि के जीवन सूत्र: सभी में एक ही परमात्मा समाया हुआ है, परमात्मा एक है और वही अनेक रूपों में दिखता है
Kharchaa Pani - टीम नेतनागरी द्वारा
स्वामी अवधेशानंद जी गिरि, जिनका जीवन ज्ञान और सेवा का अद्वितीय उदाहरण है, उन्होंने हमें यह सिखाया है कि परमात्मा सभी में समाया हुआ है। उनकी शिक्षाएं न केवल धार्मिक बल्कि सामाजिक एकता की ओर भी इंगित करती हैं। आज हम उनके जीवन के कुछ महत्वपूर्ण सूत्रों पर गौर करेंगे, जिनसे हम अपनी आत्मा को पहचान सकते हैं।
स्वामी जी का जीवन परिचय
स्वामी अवधेशानंद जी गिरि का जन्म २९ नवंबर, १९३५ को उत्तराखंड में हुआ था। उनका संवेदनशील मन और अद्भुत बुद्धिमत्ता ने उन्हें युवा अवस्था में ही ध्यान और साधना की ओर अग्रसर कर दिया। स्वामी जी का जीवन सदैव सेवा और भक्ति में व्यतीत हुआ। उन्होंने न केवल ध्यान के अभ्यास को फैलाया बल्कि समाज में जागरूकता बढ़ाने का भी कार्य किया।
परमात्मा की एकता का संदेश
स्वामी जी हमेशा कहते थे, "सभी में एक ही परमात्मा समाया हुआ है।" उनका यह विचार हमें सिखाता है कि पूरी सृष्टि एक ही ऊर्जा से बनी है। जब हम समस्त जीवों को एक इकाई के रूप में देखने लगते हैं, तो हम में आपसी प्रेम और सद्भाव बढ़ता है। इससे समाज में घर्षण कम होता है और सहिष्णुता का विकास होता है।
आध्यात्मिकता का महत्व
स्वामी अवधेशानंद जी गिरि का कहना था कि आध्यात्मिकता केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक जीवन शैली है। हमें अपने अन्दर की गहराइयों में जाकर आत्म-खोज करनी चाहिए। उनके अनुसार, "परमात्मा एक है और वही अनेक रूपों में दिखता है।" इसका अर्थ है कि हम किसी भी रूप में किसी से मिलते हैं, वह परमात्मा का रूप होता है।
समाज सेवा का योगदान
स्वामी जी ने समाज सेवा को अपने जीवन का अभिन्न हिस्सा बना लिया। उन्होंने कई अनाथालयों, विद्यालयों और आश्रमों की स्थापना की, ताकि जरूरतमंदों की सहायता की जा सके। उनका मानना था कि सेवा करने के द्वारा हम अपनी आत्मा की उन्नति कर सकते हैं और समाज में एक सकारात्मक परिवर्तन ला सकते हैं।
उपसंहार
स्वामी अवधेशानंद जी गिरि के जीवन सूत्र न केवल हमें आध्यात्मिकता की ओर प्रेरित करते हैं, बल्कि समाज में एकता और प्रेम का भी संदेश देते हैं। उनकी शिक्षाएं आज भी प्रासंगिक हैं और हमें हर परिस्थिति में एकता का अनुभव कराती हैं। हमें उनके सिद्धांतों को अपनाकर एक बेहतर समाज का निर्माण करना चाहिए।
अंततः, स्वामी जी का जीवन हमें बताता है कि हर एक व्यक्ति में परमात्मा का अंश है, और हमें उस ऊर्जा को पहचानने और स्थापित करने की आवश्यकता है।
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