रिलेशनशिप- खेलना समय की बर्बादी नहीं, सीखने का जरिया है:बच्चे की ग्रोथ में मददगार ये 15 एक्टिविटीज, साइकोलॉजिस्ट से जानें फायदे

कॉम्पिटिशन के इस दौर में बहुत से पेरेंट्स अपने बच्चे को सबसे आगे देखना चाहते हैं। इसके लिए वे बच्चे को सख्त अनुशासन में रखते हैं और उस पर कुछ पाबंदियां भी लगाते हैं। जैसेकि बाहर खेलने न जाने देना और किसी एक्स्ट्रा करिकुलर एक्टिविटीज में हिस्सा लेने से मना करना वगैरह-वगैरह। हालांकि पेरेंट्स शायद ये भूल जाते हैं कि बच्चों के लिए खेलना बेहद जरूरी है। इससे उनकी फिजिकल, मेंटल और इमोशनल ग्रोथ तेजी से होती है। खेलने से बच्चों में लर्निंग स्किल डेवलप होती है। साथ ही उनमें आत्मसम्मान व टीमवर्क की भावना डेवलप होती है और वे क्रिएटिविटी भी सीखते हैं। वहीं फिजिकल एक्टिविटी की कमी से उनमें मोटापा और कमजोरी समेत कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं। इसलिए पेरेंट्स को पढ़ाई के अलावा बच्चों के इनडोर और आउटडोर एक्टिविटीज पर जोर देना चाहिए। आज रिलेशनशिप कॉलम में हम बच्चों की ग्रोथ में फिजिकल एक्टिविटी की भूमिका के बारे में बात करेंगे। फिजिकल एक्टिविटी बच्चों के लिए जरूरी विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक, 5 से 17 साल की उम्र तक के बच्चे को रोजाना कम-से-कम 60 मिनट फिजिकल एक्टिविटी करनी चाहिए। वहीं 5 साल से कम उम्र के बच्चों को दिनभर में कम-से-कम 180 मिनट फिजिकल एक्टिविटी में बिताना चाहिए। इसके साथ ही उन्हें पर्याप्त नींद लेने की भी जरूरत होती है। फिजिकल एक्टिविटी का बच्चों की सेहत पर असर बच्चे को फिट रखने में फिजिकल एक्टिविटी की महत्वपूर्ण भूमिका है। खेलते समय बच्चे का शरीर एक्टिव रहता है। इससे उसकी हड्डियां और मसल्स मजबूत होती हैं। इसके अलावा खेल से बच्चे में ध्यान केंद्रित करने व निर्णय लेने की क्षमता और प्रॉब्लम सॉल्विंग स्किल डेवलप होती है। इससे बच्चे का स्ट्रेस कम होता है और वह खुश रहता है। फिजिकल एक्टिविटी बच्चों के लिए कितनी फायदेमंद है। इसे नीचे दिए ग्राफिक से समझिए- बच्चों के लिए जरूरी इनडोर और आउटडोर एक्टिविटीज आउटडोर एक्टिविटीज से बच्चे को प्रकृति के साथ समय बिताने और बाहर खेलने-कूदने मौका मिलता है। वहीं इनडोर एक्टिविटीज से बच्चे की मेंटल हेल्थ के साथ-साथ क्रिएटिव स्किल भी डेवलप होती है। इनमें किताबें पढ़ना, पजल खेलना, कहानियां सुनना जैसी एक्टिविटीज शामिल हैं। इससे बच्चे की सोचने-समझने की क्षमता बढ़ती है। बच्चों की ओवरऑल ग्रोथ के लिए कौन सी एक्टिविटीज करा सकते हैं। इसे नीचे दिए ग्राफिक से समझिए- ऑनलाइन गेम की लत से छुटकारा जरूरी आजकल इंटरनेट पर हजारों गेम मौजूद हैं। ऐसे में बहुत से बच्चे बाहर निकलकर खेलने के बजाय स्मार्टफोन पर ऑनलाइन गेम खेलते हैं। इसका उनकी फिजिकल और मेंटल हेल्थ पर बुरा प्रभाव पड़ता है। लंबे समय तक स्क्रीन पर बैठे रहने से उनकी आंखें कमजोर हो सकती हैं। साथ ही फिजिकल एक्टिविटी की कमी से मोटापा और अनिद्रा जैसी समस्याएं हो सकती हैं। ऑनलाइन गेम की लत बच्चे में स्ट्रेस एंग्जाइटी और डिप्रेशन का कारण बन सकती है। वाइलेंट गेम बच्चे को आक्रामक बना सकते हैं और उनकी सोच को नकारात्मक रूप से प्रभावित कर सकते हैं। ये बच्चे को वास्तविक दुनिया से दूर कर सकते हैं। ऑनलाइन गेम में ज्यादा समय बिताने से बच्चे का पढ़ाई में मन कम लगता है। साथ ही ध्यान केंद्रित करने की क्षमता प्रभावित होती है। इसलिए बच्चे को इससे छुटकारा दिलाना बेहद जरूरी है। इसके लिए पेरेंट्स बच्चे के साथ समय बिताएं। उसे सोशल एक्टिविटीज में हिस्सा लेने के लिए प्रोत्साहित करें। उसको ऑनलाइन गेम के खतरों के बारे में बताएं। अगर ये लत आसानी से न छूटे तो किसी काउंसलर की मदद भी ले सकते हैं। पेरेंट्स खुद बच्चे के साथ हों इन्वॉल्व जब पेरेंट्स खुद बच्चे के साथ फिजिकल एक्टिविटीज में शामिल होते हैं तो इससे बच्चा प्रेरित होता है। साथ ही दोनों का रिश्ता भी मजबूत होता है। इसके लिए बच्चे के साथ पार्क में टहलने जाएं और उसके साथ फुटबॉल, क्रिकेट, टेनिस या बास्केटबॉल जैसे गेम खेलें। घर पर कैरम, लूडो, या बैडमिंटन जैसे इनडोर गेम्स भी खेल सकते हैं। अगर बच्चा बड़ा है तो उसे साइकिल चलाने के लिए प्रोत्साहित करें और उसके साथ खुद साइकिल चलाएं। अगर बच्चा किसी खेल में इंटरेस्टेड है तो उसकी परफॉर्मेंस की तारीफ करें। उसे बागवानी या सफाई जैसे घर के कामों में शामिल करें। उसे लिफ्ट के बजाय सीढ़ियों का इस्तेमाल करने के लिए प्रोत्साहित करें। बच्चों के खानपान का भी रखें ध्यान बच्चे की ग्रोथ के लिए फिजिकल एक्टिविटी के साथ-साथ हेल्दी खानपान भी जरूरी है। इससे वह स्वस्थ और एनर्जेटिक रहते हैं। इसके लिए बच्चे की डाइट में फल, सब्जियां, साबुत अनाज और डेयरी प्रोडक्ट जैसे दूध, दही और पनीर शामिल करें। उन्हें जंक फूड, फास्ट फूड और शुगरी ड्रिंक्स से दूर रखें। ये चीजें स्वास्थ्य के लिए बेहद नुकसानदायक हैं। खेल के साथ-साथ बच्चों को सिखाएं ये बातें बच्चे के विकास के लिए फिजिकल एक्टिविटीज बेहद अहम हैं। लेकिन सिर्फ इसी से बच्चों का संपूर्ण विकास नहीं होता। पेरेंट्स को चाहिए कि वे अपने बच्चे को इसके साथ-साथ कुछ और बातें भी सिखाएं। जैसेकि-

Apr 2, 2025 - 06:34
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रिलेशनशिप- खेलना समय की बर्बादी नहीं, सीखने का जरिया है:बच्चे की ग्रोथ में मददगार ये 15 एक्टिविटीज, साइकोलॉजिस्ट से जानें फायदे

रिलेशनशिप- खेलना समय की बर्बादी नहीं, सीखने का जरिया है: बच्चे की ग्रोथ में मददगार ये 15 एक्टिविटीज, साइकोलॉजिस्ट से जानें फायदे

Kharchaa Pani द्वारा प्रस्तुत, यह लेख विशेष रूप से बच्चों के मानसिक विकास पर खेल की भूमिका पर ध्यान केंद्रित करता है। हम जानेंगे कि कैसे खेलने से बच्चे अपनी सामाजिक, भावनात्मक और शारीरिक क्षमताओं में वृद्धि कर सकते हैं। लेख को लिखा है नेहा वर्मा और साक्षी राव ने, टीम नेटा नगरि से।

परिचय

दोस्तों, क्या आपने कभी सोचा है कि बच्चे क्यों खेलते हैं? क्या यह सिर्फ समय की बर्बादी है? बिल्कुल नहीं! खेलना केवल मनोरंजन नहीं है, बल्कि यह बच्चे के विकास का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। दिमागी विकास को सुदृढ़ करने के लिए खेल का माध्यम अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इस लेख में हम जानेंगे कि कौन-कौन सी एक्टिविटीज बच्चों की ग्रोथ में मददगार होती हैं और उनका साइकोलॉजिकल विकास किस प्रकार होता है।

खेलने के लाभ

खेलने के कई लाभ हैं जो बच्चे की शारीरिक और मानसिक विकास में सहायक होते हैं। यहाँ पर कुछ मुख्य बिंदु दिए गए हैं:

  • सामाजिक कौशल: खेलते समय बच्चे अन्य बच्चों के साथ इंटरैक्ट करते हैं, जिससे उनकी सामाजिक कौशल में वृद्धि होती है।
  • भावनात्मक संतुलन: खेल बच्चे के भावनाओं को समझने और संभालने में मदद करते हैं।
  • शारीरिक स्वास्थ्य: रेसिंग, खेल कूद आदि बच्चों को शारीरिक रूप से सक्रिय रखते हैं।
  • समस्या सुलझाने की क्षमता: खेल के जरिए बच्चे अपनी समस्याओं को सुलझाने की क्षमता विकसित करते हैं।

15 मददगार एक्टिविटीज

नीचे दी गई 15 गतिविधियां बच्चों की ग्रोथ में मदद कर सकती हैं:

  1. फुटबॉल: टीम वर्क और गति का अनुभव कराता है।
  2. क्रिएटिव आर्ट्स: रंग, चित्रकारी और शिल्प कार्य से रचनात्मकता बढ़ती है।
  3. कहानी सुनाना: इससे बच्चों का संवेदनशीलता और कल्पना शक्ति बढ़ती है।
  4. पजल्स: मस्तिष्क को चुनौती देने वाले खेल, समस्या सुलझाने की दिशा में सहायक।
  5. डांसिंग: शारीरिक गतिविधि और भावनाओं को व्यक्त करने का एक अद्भुत माध्यम।
  6. नैचुरल वॉक्स: प्रकृति के साथ जुड़ने का एक तरीका।
  7. शतरंज: मानसिक खेल जो सोचने की क्षमता को बढ़ाता है।
  8. संगीत: सुनने और समझने के कौशल में मदद करता है।
  9. यात्राएं: नई जगहों का अनुभव करना और सीखना।
  10. खेल का आयोजन: बच्चों में नेतृत्व कौशल का विकास।
  11. सामूहिक खेल: मुकाबला करने की भावना को बढ़ावा देता है।
  12. कल्पना खेल: बच्चा अपनी कल्पना का विकास करता है।
  13. कुकिंग: सादगी के साथ विज्ञान और कला सीखने का अवसर।
  14. कम्युनिटी सेवा: सामाजिक जिम्मेदारी की भावना।
  15. फैमिली गेम्स: परिवार में bonding को मजबूत करता है।

साइकोलॉजिस्ट के विचार

एक प्रमुख साइकोलॉजिस्ट ने कहा, "खेल के माध्यम से बच्चे सीखते हैं कि कैसे भावनाओं को संभालना है। यह सामाजिक जीवन में बहुत महत्वपूर्ण है। इसलिए माता-पिता को चाहिए कि वे बच्चों को खेल के लिए प्रोत्साहित करें।"

निष्कर्ष

अंत में, खेलने का महत्व बच्चों की जीवन में मात्र एक गतिविधि नहीं, बल्कि उनका विकास तथा सीखने का एक जरिया है। इसलिए हमें चाहिए कि हम बच्चों को स्वच्छंदता से खेलने दें। इस लेख में दी गई गतिविधियां न केवल उच्च तकनीकी कौशल सिखाती हैं, बल्कि भावनात्मक और मानसिक विकास में भी मददगार साबित होती हैं।
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