दोबारा नहीं होगी BPSC 70वीं PT, री-एग्जाम की याचिका खारिज:पटना HC का फैसला सुनकर रो पड़ा कैंडिडेट, बोला- अब सुप्रीम कोर्ट जाएंगे
पटना हाईकोर्ट ने शुक्रवार को BPSC 70वीं PT परीक्षा रद्द करने वाली याचिका को खारिज कर दिया है। कोर्ट का फैसला है कि एग्जाम दोबारा नहीं होगा। वहीं, फैसले पर कैंडिडेट्स ने कहा कि हम सुप्रीम कोर्ट में अपील करेंगे। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता अशोक कुमार दुबे ने कहा, 'अभी केवल केस डिसमिस होने की बात कही गई है। ऑर्डर अपलोड होगा तब डिटेल्स सामने आएंगे। कोर्ट ने 100 पेज का जजमेंट सुनाया है।' 'ऑर्डर आने के बाद तय करेंगे कि सुप्रीम कोर्ट जाए या नहीं, लेकिन मेरी समझ से ऊपरी अदालत में अपील करनी चाहिए।' फैसला सुनकर रो पड़ा कैंडिडेट फैसले के वक्त हाईकोर्ट कैंपस में मौजूद एक BPSC कैंडिडेट्स रो पड़ा। अभिषेक ने कहा, 'हमारा केस डिसमिस हो गया है। हमलोग रातभर से सोए नहीं हैं। हमलोगों ने क्या नहीं सहा, रोड पर लाठी खाई, वाटर कैनन सहा। केस का डिसमिस होना बताता है कि भ्रष्टाचार कहां तक पहुंच गया है।' 'मेरी आंखों में आंसू हैं। हमलोग आंसू पी रहे हैं। घुट-घुटकर जी रहे हैं, लेकिन हम सुप्रीम कोर्ट जाकर लड़ेंगे। मैं तो रो रहा हूं...आंखों में आंसू हैं। कुछ लोग तो रो भी नहीं पा रहे हैं।' गुरु रहमान बोले- BPSC गलत था, गलत है हाईकोर्ट के फैसले के बाद गुरु रहमान ने कहा, 'हमारे पास परीक्षा में धांधली के सबूत हैं। हम जल्द सुप्रीम कोर्ट जाएंगे।' 18 मार्च को पूरी हुई थी सुनवाई हाईकोर्ट ने पिछले हफ्ते प्रारंभिक एग्जाम रद्द करने और दोबारा कराने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई पूरी कर ली थी। हाईकोर्ट के कार्यकारी चीफ जस्टिस आशुतोष कुमार और जस्टिस पार्थ सारथी की बेंच ने 18 मार्च को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। अभ्यर्थियों ने परीक्षा में धांधली और अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए पूरे एग्जाम को रद्द करने की मांग की थी। वहीं, राज्य सरकार और आयोग ने इन आरोपों को बेबुनियाद बताया है। 13 दिसंबर 2024 को हुई थी BPSC 70वीं PT 13 दिसंबर 2024 को बिहार के विभिन्न जिलों में 70वीं बीपीएससी पीटी परीक्षा का आयोजन किया गया था। एग्जाम के दौरान पटना के बापू परीक्षा केंद्र में हंगामा हुआ। कैंडिडेट्स ने पेपर देर से मिलने और लीक होने जैसे आरोप लगाते हुए हंगामा किया। परीक्षा के 3 दिन बाद, जिला प्रशासन की रिपोर्ट को आधार बनाते हुए आयोग ने बापू परीक्षा केंद्र की परीक्षा रद्द कर दी। इसमें असामाजिक तत्वों द्वारा हंगामा किए जाने की बात कही गई। एक सेंटर का एग्जाम रद्द होने के बावजूद, अभ्यर्थी पूरी परीक्षा को रद्द करने की मांग कर रहे हैं। गर्दनीबाग में 18 दिसंबर से अभ्यर्थियों का प्रदर्शन जारी है। सरकार ने कोर्ट में रखा पक्ष राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता पी.के. शाही ने कोर्ट में पक्ष रखते हुए कहा था, 'परीक्षा शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई थी और सभी दिशा-निर्देशों का पालन किया गया था। सेंटर पर जैमर लगे थे। सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम किए गए थे। बापू सेंटर पर कुछ छात्रों ने हंगामा किया था। वहां परीक्षा बाधित हुई थी। इस मामले में अगमकुआं थाने में 2 FIR दर्ज की गई थी। कुछ लोगों की गिरफ्तारी भी हुई थी। अनुशासन भंग करने के आरोप में कुछ छात्रों को तीन साल तक बीपीएससी परीक्षा देने से प्रतिबंधित कर दिया गया था। अभ्यर्थियों की आपत्तियां और कोर्ट की टिप्पणी अभ्यर्थियों ने परीक्षा में धांधली और अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए पूरी परीक्षा को रद्द करने की मांग की थी। हालांकि, आयोग के वरीय अधिवक्ता ललित किशोर और संजय पांडेय ने इन आरोपों को निराधार बताते हुए खारिज कर दिया। कोर्ट ने छात्रों को परीक्षा से तीन साल के लिए वंचित किए जाने पर आपत्ति जताई और कहा कि इतनी कठोर कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए। अब इस मामले में पटना हाईकोर्ट का फैसला आने के बाद ही यह साफ होगा कि 70वीं बीपीएससी पीटी परीक्षा की वैधता बनी रहेगी या इसे रद्द करने का आदेश दिया जाएगा। --------------------- ये खबर भी पढ़िए... खान सर का दावा-BPSC के खिलाफ सबूत मिले हैं:नवादा-गया के ट्रेजरी से पेपर गायब थे; 4 जनवरी को पुराने सेट से ही परीक्षा हुई BPSC 70वीं पीटी परीक्षा को लेकर चल रहे विवाद के बीच खान सर ने अब नया दावा किया है। उनका कहना है कि 'बापू परीक्षा केंद्र पर हुए बवाल और इसके बाद 22 केंद्रों पर हुई दोबारा परीक्षा में भी नियम का ख्याल नहीं रखा गया।' खान सर ने कहा, 'हमने 2 महीने तक पता लगाया। हमें जानकारी मिली कि नवादा और गया के ट्रेजरी से पेपर गायब थे। फिर हमें पता चला कि गायब पेपर को BPSC ने बापू परीक्षा केंद्र पर दिया। जो पेपर कबाड़ में बेचना था, वो 4 जनवरी को पेपर दिया गया। जिस कारण 3 गुना परिणाम आए।' पूरी खबर पढ़िए

दोबारा नहीं होगी BPSC 70वीं PT, री-एग्जाम की याचिका खारिज: पटना HC का फैसला सुनकर रो पड़ा कैंडिडेट, बोला- अब सुप्रीम कोर्ट जाएंगे
Kharchaa Pani
लेखिका: सुमिता शर्मा, टीम नेतानगरी
परिचय
बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की 70वीं प्रारंभिक परीक्षा (PT) के परिणामों के खिलाफ कैंडिडेट्स द्वारा दायर की गई याचिका को पटना हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है। यह निर्णय छात्रों के लिए एक बड़ी निराशा का संदेश लेकर आया है। कई कैंडिडेट्स जिन्होंने इस परीक्षा में हिस्सा लिया था, उनके मन में यह सवाल उठ रहा है कि अब आगे क्या होगा। कुछ छात्रों ने तो हाईकोर्ट के फैसले के बाद रोते हुए अपनी भावनाएं भी व्यक्त की।
पटना HC का ताजा फैसला
बिहार में BPSC 70वीं PT का परीक्षा परिणाम जारी होने के बाद कई कैंडिडेट्स ने इसके खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। इनका कहना था कि परीक्षा में कई प्रकार की गलतियां और अनियमितताएं हुई हैं। लेकिन, पटना हाईकोर्ट ने सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया, जिसके बाद परीक्षा की वैधता को मान्यता दी गई। इस निर्णय से छात्रों में आक्रोश व्याप्त हो गया है। एक कैंडिडेट ने कहा, "हमने इतनी मेहनत की थी और अब हमे निराश किया गया है।"
कैंडिडेट्स की प्रतिक्रिया
हाईकोर्ट के फैसले के बाद, कई कैंडिडेट्स ने एकत्रित होकर अपनी भावनाओं को साझा किया। उनमें से एक ने कहा, "अब हम सुप्रीम कोर्ट जाएंगे। यह हमारा हक है कि हमारी मेहनत को वैधता मिले।" छात्रों में गुस्सा और निराशा का माहौल है, और वे अब उच्चतम न्यायालय के दरवाजे खटखटाने की तैयारी कर रहे हैं। कैंडिडेट्स ने यह भी बताया कि वे सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को उठाने का काम कर रहे हैं ताकि उनकी आवाज़ सुनी जा सके।
आगे की राह
अब सवाल यह उठता है कि क्या कैंडिडेंट्स सच में सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे? क्या उनकी याचिका वहां सुनवाई के लायक होगी? सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर करने का रास्ता आसान नहीं होता, और यह निश्चित रूप से समय-साध्य हो सकता है। हालांकि, छात्रों ने अब अपने हक के लिए लड़ने का ठान लिया है।
निष्कर्ष
पटना हाईकोर्ट का निर्णय कैंडिडेंट्स के लिए निराशाजनक रहा, लेकिन उनकी उम्मीद अब भी जिंदा है। वे न्याय के लिए प्रयासरत हैं और अब उम्मीद कर रहे हैं कि सुप्रीम कोर्ट उनकी बात सुनेगा। छात्रों का यह संघर्ष इस बात का सबूत है कि शिक्षा को लेकर उनकी गंभीरता और जुनून कभी कम नहीं होगा।
फिलहाल, छात्र इस फैसले को चुनौती देने के लिए तैयार हैं और सुप्रीम कोर्ट का रुख करने का मन बना चुके हैं। उनके लिए यह एक महत्वपूर्ण मोड़ है, जिसका परिणाम केवल उनकी भविष्य की योजनाओं पर नहीं, बल्कि बिहार की शिक्षा व्यवस्था पर भी पड़ सकता है।
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