उत्तराखंड के भाईयों की रूस से वतन वापसी: 97 दिनों की खौफनाक कहानी

रूस में पिछले 97 दिनों से बंधक बने धारचूला के दो सगे भाई आनंद और भूपेंद्र आखिरकार सुरक्षित अपने घर लौट आए हैं। ये खबर सिर्फ दो लोगों की वतन वापसी की ही नहीं बल्कि एक गर्भवती पत्नी के संघर्ष और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के कूटनीतिक प्रयासों की बड़ी जीत है। नौकरी के नाम … The post रूस में 97 दिनों तक नरक देखा!, ऐसे लौटे उत्तराखंड के दो लाल, वतन वापसी की इमोशनल कहानी appeared first on Khabar Uttarakhand - Uttarakhand News.

Aug 13, 2026 - 00:34
 148  1.4k
उत्तराखंड के भाईयों की रूस से वतन वापसी: 97 दिनों की खौफनाक कहानी
रूस में पिछले 97 दिनों से बंधक बने धारचूला के दो सगे भाई आनंद और भूपेंद्र आखिरकार सुरक्षित अपने घर �

उत्तराखंड के भाईयों की रूस से वतन वापसी: 97 दिनों की खौफनाक कहानी

Breaking News, Daily Updates & Exclusive Stories - Kharchaa Pani

कम शब्दों में कहें तो, धारचूला के दो भाई आनंद और भूपेंद्र, जिन्होंने रूस में 97 दिनों तक बंधक बनकर जिंदगी का एक खौफनाक सफर देखा, अब आखिरकार अपने वतन लौट आए हैं। यह सिर्फ उनकी लौटने की कहानी नहीं, बल्कि एक गर्भवती पत्नी के संघर्ष और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की कूटनीतिक सफलताओं का प्रतीक भी है।

रूस में 97 दिनों का काला सफर

उत्तराखंड के धारचूला के रहने वाले आनंद और भूपेंद्र जब आखिरकार अपने घर पहुंचे, तो यह केवल उनके लिए ही नहीं, बल्कि पूरे परिवार और समुदाय के लिए एक भावुक पल था। 97 दिनों की मेहनत और संघर्ष के बाद लौट कर आना किसी छोटे चमत्कार से कम नहीं था। यह कहानी न सिर्फ पारिवारिक बंधनों की मजबूती को दर्शाती है, बल्कि यह उन लोगों के लिए एक चेतावनी भी है जो विदेश में बेहतर जीवन की तलाश में असुरक्षित रास्ते अपनाते हैं।

नौकरी का झांसा: 8 लाख का ठगी

इस पूरे मामले की शुरुआत अप्रैल में हुई जब ऊधम सिंह नगर के सितारगंज के एक एजेंट ने उन्हें 70 से 80 हजार रुपये प्रति महीने की नौकरी का लालच दिया। इस अपार धनराशि के चक्कर में परिवार ने अपनी सारी बचत और गहने बेचकर उस एजेंट को कुल 8 लाख रुपये दिए। लेकिन जब वे 6 मई को मॉस्को पहुंचे, तो उन्हें सरकारी दस्तावेजों से बेदखल कर दिया गया और उन्हें स्थिति की भयावहता का एहसास हुआ।

बंधक बनाना: पासपोर्ट और वीजा की चोरी

मॉस्को पहुंचते ही दोनों भाइयों के पासपोर्ट और वीजा छीन लिए गए। उम्मीदें टूट गईं और उन्हें न कोई काम दिया गया, न ही कोई वेतन। उन्हें जबरन सफाई के काम में लगाया गया और 20 दिन तक घरवालों से संपर्क नहीं हो सका। इस अंधेरी खाई में फंसे आनंद और भूपेंद्र की बर्थडे से लेकर हर खास दिन अकेलेपन और डर में बीता।

तनुजा का अदम्य साहस

इस बीच, भूपेंद्र की 9 महीने की गर्भवती पत्नी तनुजा कार्की ने हार नहीं मानी। उन्होंने सारी मुश्किलों का सामना करते हुए अधिकारियों के दरवाजे खटखटाए। पिथौरागढ़ के डीएम आशीष भटगांई से भी मदद मांगी। उसके बाद उन्होंने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से संपर्क किया, जो बलिदान और प्रेरणा के प्रतीक बने।

सीएम धामी की कूटनीति में असर

मुख्यमंत्री धामी ने तुरंत विदेश मंत्री एस. जयशंकर और भारत के दूतावास से संपर्क किया। उनके प्रयासों का नतीजा यह हुआ कि आनंद और भूपेंद्र को उनके बंधन से मुक्त कराया गया। उनकी वतन वापसी के बाद, सीएम धामी ने वीडियो कॉल पर दोनों भाइयों का हालचाल जानने का प्रयास किया और ठग एजेंट के खिलाफ कार्रवाई का आश्वासन दिया।

इस तरह, यह कहानी केवल आनंद और भूपेंद्र की नहीं, बल्कि उन सभी परिवारों की भी है जो अपने प्रियजनों की सुरक्षा के लिए हर संभव कोशिश करते हैं। यह घटनाक्रम हमें उस चेतावनी की ओर भी इंगित करता है, जहाँ हमें अपने भविष्य के सपनों के लिए दूर हटकर ठंगों और धोखेबाजों से सावधान रहना चाहिए।

केवल यही नहीं, यह कहानी हमें यह भी सिखाती है कि कभी-कभी हमें अपने परिवार की सुरक्षा के लिए लड़ाई लडनी पड़ती है, चाहे वो कितनी भी मुश्किल क्यों न हो।

आखिरकार, इस घटना ने हमें यह सोचने पर मजबूर किया कि वास्तविकता की खोज में हमें कितना सावधान रहना चाहिए। सरकार की कूटनीति, गर्भवती पत्नी के संघर्ष और फिर से मिलन ने एक प्रेरणादायक कहानी को जन्म दिया है।

इसके साथ ही, हम आपको याद दिलाना चाहेंगे कि सुरक्षित भविष्य सुनिश्चित करने के लिए हमेशा विश्वसनीय एजेंट के माध्यम से ही नौकरी की तलाश करें। हम सभी को सतर्क रहना है, क्योंकि एक निर्णय हमारी पूरी जिंदगी को बदल सकता है।

अधिक अपडेट्स के लिए, देखें Kharchaa Pani

सादर,

टीम खर्चा पानी

स्वाति तिवारी

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow