तो ED ने इस बार BJP को फंसाया ?, VPDO भर्ती घोटाले में UKSSSC के पूर्व सदस्य का बड़ा खुलासा

उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UKSSSC) द्वारा वर्ष 2016 में आयोजित ग्राम पंचायत विकास अधिकारी (VPDO) भर्ती परीक्षा में हुई धांधली का मामला एक बार फिर प्रदेश की राजनीति में गर्मा गया है। हाल ही में ED द्वारा चंदन सिंह जीना के ठिकानों पर की गई छापेमारी के बाद, पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत को इस … The post तो ED ने इस बार BJP को फंसाया ?, VPDO भर्ती घोटाले में UKSSSC के पूर्व सदस्य का बड़ा खुलासा appeared first on Khabar Uttarakhand - Uttarakhand News.

Sep 19, 2026 - 18:34
 132  1.8k
तो ED ने इस बार BJP को फंसाया ?, VPDO भर्ती घोटाले में UKSSSC के पूर्व सदस्य का बड़ा खुलासा

उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UKSSSC) द्वारा वर्ष 2016 में आयोजित ग्राम पंचायत विकास अधिकारी (VPDO) भर्ती परीक्षा में हुई धांधली का मामला एक बार फिर प्रदेश की राजनीति में गर्मा गया है। हाल ही में ED द्वारा चंदन सिंह जीना के ठिकानों पर की गई छापेमारी के बाद, पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत को इस प्रकरण में आरोपित करने के कथित प्रयासों पर आयोग के पूर्व सदस्य दीवान सिंह भैसोड़ा ने गहरी आपत्ति जताई है।

हरीश रावत के बचाव में आए UKSSSC के पूर्व सदस्य दीवान सिंह भैसोड़ा

UKSSSC के पूर्व सदस्य दीवान सिंह भैसोड़ा ने सोशल मीडिया के माध्यम से 2016 की इस चर्चित परीक्षा, उसकी जांच प्रक्रिया और राजनीतिक घटनाक्रम से जुड़े कई सनसनीखेज तथ्य जनता के सामने रखे हैं। वहीं, पूर्व विधायक मनोज रावत ने भी दीवान सिंह की बातों का समर्थन करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री के बचाव में मोर्चा खोल दिया है।

6 मार्च 2016 से शुरू हुआ धांधली और जांच का घटनाक्रम

आयोग के पूर्व सदस्य दीवान सिंह भैसोड़ा के अनुसार, 6 मार्च 2016 को VPDO की परीक्षा आयोजित की गई थी और मार्च के अंतिम व अप्रैल 2016 के प्रथम सप्ताह के बीच इसका परिणाम घोषित किया गया। परिणाम जारी होते ही अभ्यर्थियों और कई छात्र संगठनों ने परीक्षा में बड़े पैमाने पर अनियमितता का आरोप लगाते हुए आयोग कार्यालय का घेराव किया। असंतुष्ट अभ्यर्थियों ने राजभवन की ओर कूच कर तत्कालीन राज्यपाल से मुलाकात की और परीक्षा रद्द करने की मांग की।

मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्यपाल ने अपर मुख्य सचिव राधा रतूड़ी के नेतृत्व में एक सदस्यीय जांच कमेटी का गठन किया। हालांकि, जांच कमेटी ने महज 10 से 15 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपते हुए परीक्षा परिणाम में किसी भी तरह की गड़बड़ी से इनकार कर दिया। इसके बाद राजभवन ने शिकायत को खारिज कर दिया, जिसके तुरंत बाद आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष ने तेजी से अभ्यर्थियों के प्रमाण पत्रों का सत्यापन शुरू करा दिया। इस जल्दबाजी से अभ्यर्थी और राजनीतिक दल और अधिक उद्वेलित हो गए।

हरीश रावत सरकार की वापसी और उच्च स्तरीय जांच समिति का गठन

तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत के पुनः पदभार ग्रहण करने के बाद, सरकार ने जनभावनाओं और धांधली की शिकायतों का संज्ञान लिया। कार्मिक विभाग ने 20 मई 2016 को तीन सदस्यीय उच्चस्तरीय जांच समिति का गठन किया गया। इस समिति में अपर मुख्य सचिव रणवीर सिंह अध्यक्ष थे। जबकि वरिष्ठ IPS अधिकारी, वर्तमान अध्यक्ष UKSSSC गणेश सिंह मर्तोलिया  और सदस्य अपर सचिव, न्याय महेश चंद्र कौशिबा सदस्य बनाए गए थे।

समिति के गठन के साथ ही नियुक्ति प्रक्रिया पर रोक लगा दी गई। दीवान सिंह ने खुलासा किया कि उन्होंने और आयोग के एक अन्य सदस्य महेश चंद्रा ने जांच समिति को रजिस्टर्ड डाक द्वारा पत्र भेजकर अपना पक्ष रखने का अवसर मांगा था, ताकि वे साक्ष्यों के साथ ओएमआर शीट में हुई भीषण गड़बड़ियों को साबित कर सकें। हालांकि, उन्हें कभी सुनवाई का मौका नहीं दिया गया। इसी दौरान सरकार ने आर.बी.एस. रावत को पदमुक्त कर एस. राजू को आयोग का नया अध्यक्ष नियुक्त किया। लगभग एक वर्ष तक चली गहन जांच के बाद समिति ने ओएमआर शीट में बड़े पैमाने पर ‘ओवरराइटिंग’ की पुष्टि की, जिसके आधार पर अंततः 2016 की VPDO परीक्षा को रद्द कर दिया गया।

2018 की पुनः परीक्षा के चौंकाने वाले आंकड़े

25 फरवरी 2018 को इस परीक्षा का दोबारा आयोजन किया गया, जिसमें केवल 2016 के अभ्यर्थियों को ही बैठने की अनुमति दी गई। इस पुनः परीक्षा के परिणाम बेहद चौंकाने वाले रहे। 2016 की रद्द हुई परीक्षा में 85% से 96% तक अंक हासिल कर मेरिट में आए 181 शीर्ष अभ्यर्थियों में से 167 अभ्यर्थी 2018 की परीक्षा में पूरी तरह असफल हो गए। कई पूर्व-उत्तीर्ण अभ्यर्थी तो दोबारा परीक्षा देने पहुंचे ही नहीं। केवल 13-14 आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थी ही उत्तीर्ण हो सके, जो पुरानी श्रेष्ठता सूची में सबसे निचले पायदान पर थे।

विजिलेंस से STF तक का सफर और कानूनी स्थिति

इसके बाद मामले की जांच विजिलेंस को सौंपी गई, लेकिन लगभग 3 से 4 साल तक जांच में कोई ठोस प्रगति नहीं हुई। अगस्त 2020 में विजिलेंस के संपर्क करने पर दीवान सिंह भैसोड़ा ने 10 अगस्त 2020 को 20 पन्नों का विस्तृत दस्तावेज सौंपा। वर्ष 2021 में UKSSSC की विभिन्न परीक्षाओं में धांधली की FIR दर्ज होने के बाद जब जांच STF को सौंपी गई, तब दीवान सिंह के प्रतिवेदन पर मुख्यमंत्री ने VPDO 2016 मामले की जांच भी विजिलेंस से हटाकर STF को सौंप दी।

STF ने तत्परता दिखाते हुए आयोग के तत्कालीन दोषी अध्यक्ष, सचिव, परीक्षा नियंत्रक और कई दलालों को गिरफ्तार कर जेल भेजा। हालांकि, भैसोड़ा ने इस बात पर दुख जताया कि 10 साल बीत जाने के बाद भी यह मामला अदालत में निर्णायक मोड़ तक नहीं पहुंचा है और कई मुख्य आरोपी आज भी आजाद घूम रहे हैं।

ED की कार्रवाई पर उठाए सवाल

दीवान सिंह भैसोड़ा ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए निवेदन किया कि जिस तरह चंदन सिंह जीना के ठिकानों पर छापेमारी की गई है, क्या ED ने इस परीक्षा धांधली में संलिप्त, जेल जा चुके तत्कालीन अधिकारियों और कर्मचारियों के ठिकानों पर भी छापे मारकर उनकी अवैध संपत्तियों का ब्योरा जुटाया है? उन्होंने ED से मांग की कि इन दोषी अधिकारियों पर की गई कार्रवाई और सीज संपत्तियों का ब्योरा भी सार्वजनिक किया जाए।

पूर्व विधायक मनोज रावत का समर्थन और भाजपा सरकार पर हमला

इस पूरे घटनाक्रम पर पूर्व विधायक मनोज रावत ने भी दीवान सिंह भैसोड़ा की पोस्ट को साझा करते हुए अपनी प्रतिक्रिया दी। मनोज रावत ने कहा कि चंदन सिंह जीना के बहाने पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत को घेरने की राजनीतिक साजिश की जा रही है।मनोज रावत ने बताया कि जब उन्होंने खुद 2016 में परीक्षा धांधली के संबंध में हरीश रावत को जानकारी दी थी, तो प्रथम दृष्टया पूर्व अध्यक्ष आर.बी.एस. रावत की साफ-सुथरी छवि के कारण किसी को भरोसा नहीं हुआ था। लेकिन उनके आसपास के लोग इस कृत्य में शामिल थे।

पूर्व विधायक मनोज रावत ने आरोप लगाया कि 2017 में भाजपा सरकार बनने के बाद रणवीर सिंह समिति की रिपोर्ट और विजिलेंस जांच के तथ्य सामने होने के बावजूद, सरकार ने दोषियों पर कठोर कार्रवाई करने के बजाय तत्कालीन अध्यक्ष आर.बी.एस. रावत को संघ से जुड़े एक संगठन का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया और बाद में पूर्व मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत का OSD भी नियुक्त किया। पूर्व सदस्य दीवान सिंह भैसोड़ा और पूर्व विधायक मनोज रावत के इन बयानों से साफ है कि आने वाले दिनों में VPDO -2016 धांधली प्रकरण को लेकर प्रदेश की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर और तेज होने वाला है।

The post तो ED ने इस बार BJP को फंसाया ?, VPDO भर्ती घोटाले में UKSSSC के पूर्व सदस्य का बड़ा खुलासा appeared first on Khabar Uttarakhand - Uttarakhand News.

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow