1980 का ट्रेंड: क्लासिक टू व्हीलर्स के सफर की कहानी - हर तस्वीर बयां करती है एक युग
इन दिनों सोशल मीडिया पर अपनी तस्वीरों को अस्सी के दशक (80’s) की तस्वीरों में बदल कर पोस्ट करने का क्रेज चल रहा है। यहां तक की Gen Z भी चैट जीपीटी के जरिए अपनी तस्वीरों को अस्सी के दशक जैसी तस्वीरों में बदल कर सोशल मीडिया में पोस्ट कर रहे हैं लेकिन क्या आप … The post 1980 Trend: क्लासिक टू व्हीलर्स पर 80’s के इंडिया का सफर, ये तस्वीरें हैरान कर देंगी appeared first on Khabar Uttarakhand - Uttarakhand News.
क्लासिक टू व्हीलर्स पर 80’s के इंडिया का सफर, ये तस्वीरें हैंरान कर देंगी
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कम शब्दों में कहें तो, अस्सी के दशक की यादें इन दिनों सोशल मीडिया पर अपनी तस्वीरों को इस दशक की शैली में बदलने के क्रेज के जरिए पुनर्जीवित हो रही हैं। जेन ज़ी के सदस्य, अब ChatGPT का इस्तेमाल करते हुए अपने पुराने स्नैपशॉट्स को 80 के दशक के प्रभाव में बदलकर साझा कर रहे हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि उस समय भारत में टू व्हीलर्स कैसा अनुभव था? इस लेख में हम 80 के दशक के क्लासिक टू व्हीलर्स (classic two wheelers of India) की कहानी सुनाएंगे।
80’s में क्रेज तो खूब था लेकिन पैसे...
भारत में आज़ादी के बाद टू व्हीलर्स का काफी क्रेज बढ़ गया था। अधिकतर परिवारों के पास कार खरीदने के पैसे नहीं थे, लेकिन लोअर मिडल क्लास परिवार आसानी से टू व्हीलर ख़रीद सकते थे। ऐसे में, साधारण परिवारों के लिए ये सबसे उपयुक्त साधन बन गए। खासतौर पर युवा जो बेहतर लुक्स और प्रदर्शन की तलाश में थे, उनके लिए बाजार में कुछ विकल्प उपलब्ध थे। आइए जानते हैं कुछ ऐसे ऐतिहासिक बाइक और स्कूटर के बारे में, जिन्हें आज भी लोग याद करते हैं।
Lambretta से मिला इटैलियन डिज़ाइन का परिचय

आज़ादी के बाद का सबसे मशहूर स्कूटर, लैम्ब्रेटा, आज भी लोगों के दिलों में बसा हुआ है। चाहे वह 'एन इवनिंग इन पेरिस' फिल्म में शम्मी कपूर का लैम्ब्रेटा चलाना हो या 'डोली' फिल्म में राजेश खन्ना की सवारी। लैम्ब्रेटा असल में इटली के मिलान शहर की इटोसेन्टी कंपनी का उत्पाद था। भारत में इसे 'ऑटोमोबाइल प्रोडक्ट्स ऑफ़ इंडिया' (API) और बाद में 'स्कूटर इंडिया लिमिटेड' (SIL) द्वारा निर्मित किया गया।
लैम्ब्रेटा का नाम एक जलपरी पर आधारित है जो कि लैम्ब्रो नदी में रहती थी। यह स्कूटर घरेलू बाजार में 'विजय सुपर' के नाम से वापस आया और अपने भव्य डिज़ाइन और प्रदर्शन के लिए जाना गया। इसकी लोकप्रियता का एक प्रमाण है कि 1983 के क्रिकेट विश्व कप विजेता टीम के सदस्यों को इसे उपहार में दिया गया था। लेकिन जैसे-जैसे अन्य बाइकों ने भारतीय बाजार में प्रवेश किया, लैम्ब्रेटा की चमक कम होती चली गई।
Royal Enfield Bullet ने मनवाया अपना लोहा

बुलेट कंप्यूटर की दुनिया में एक आइकोनिक बाइक है। इसका भारी वजन और мощ जोरदार इंजन इसे उपयोगकर्ता के लिए विशिष्ट बनाता है। इसे चलाना एक अधिकार का अनुभव माना जाता था, खासकर पुलिस और सेना के अधिकारियों के बीच। जैसा कि कहा जाता है, "बुलेट संभालने वाला व्यक्ति ही असली शक्तिशाली होता है।"
बुलेट की पहचान उसकी अद्वितीय डिजाइन, आवाज़ और हैंडलिंग में निहित है। 80 के दशक तक इसकी तकनीकी स्थिरता ने इसे एकदम अलग बना दिया। लेकिन जैसे-जैसे पेट्रोल की कीमतें बढ़ने लगी, बुलेट की रफ्तार में कमी आने लगी।
Bajaj Chetak बना मिडिल क्लास के सपनों की सवारी
बजाज चेतक ने मिडिल क्लास परिवारों के लिए एक खास स्थान बनाया। इसका उत्पादन 1972 से 2009 तक हुआ और इसे मेवाड़ के राजा राणा प्रताप के नाम पर रखा गया था। इसकी मजबूत निर्माण और विश्वसनीयता ने इसे भारतीय समुदाय का प्रिय बना दिया।

अपने शीर्ष पर इसे खरीदने के लिए ग्राहकों को एक साल तक वेटिंग पीरियड का सामना करना पड़ता था। इसके विज्ञापन का स्लोगन 'हमारा बजाज' ने लोगों के दिलों में घर कर लिया। 2009 में बजाज द्वारा इसके उत्पादन को बंद करने के बावजूद, यह अभी भी कई पुराने स्कूटरों के साक्ष्य में जीवित है।
Yamaha RX100 ने युवा जोश को दी रफ्तार

यामाहा RX100 ने 1985 से 1996 तक सभी का दिल जीता। 98cc का 2-स्ट्रोक सिंगल-सिलेंडर इंजन इसे अद्वितीय बनाता है, और इसका हल्का वजन उसे तेज़ रफ्तार में मदद करता था। यह बाइक युवाओं के बीच रेसिंग और ट्यूनिंग कल्चर का प्रतीक बन गई थी, लेकिन साथ ही, इसे आने वाली अन्य तकनीकी नई बाइकों ने पीछे छोड़ दिया।
Kinetic Honda से मिला एक नए दौर को इलेक्ट्रिक स्टार्ट

काइनेटिक होंडा का अनुभव 1984 में इलेक्ट्रिक स्टार्ट और बिना गियर के स्कूटर की पेशकश के साथ आया। यह स्कूटर यूनिसेक्स के रूप में सफल रहा, जिसमें महिलाएं भी शामिल थीं। इसके स्लीक डिज़ाइन और सरलता ने इसे पसंदीदा बना दिया।
खूब चली मेरी, तेरी और हमारी Kinetic Luna

काइनेटिक लूना 50 cc की मोपेड है जो भारतीय बाजार में 1972 में लॉन्च हुई थी। यह ज़्यादातर ग्रामीण इलाकों में दौड़ती थी और इसकी विशेषता थी कि इसमें फ्यूल खत्म होने की स्थिति में पैडल से चलाया जा सकता था। इसके व्यावहारिक लाभ और हल्के वजन ने इसे ग्रामीण भारत में विश्वास पात्र बना दिया।
वक़्त के साथ आगे बढ़ने का तरीका बने टू व्हीलर्स
जैसे-जैसे 80 के दशक की यादें फिल्मों, संगीत, और तापमान के माध्यम से बदलती हैं, वही टू व्हीलर भी उस समय के कई इतिहास के प्रतीक बन गए। जैसे-जैसे समय बदलता गया, ये टू व्हीलर्स केवल साधनों के रूप में नहीं बल्कि भारतीय समाज के सांस्कृतिक बदलावों के संकेत बन गए। आज जब भी कोई पुरानी बुलेट की आवाज़ सुनता है या किसी फिल्म में चेतक को देखता है, तो वो उन सुनहरे पलों की यादें ताज़ा कर देता है।
इस प्रकार, टू व्हीलर्स का सफर केवल उनकी तकनीकी उन्नति की बात नहीं है, बल्कि वे भारतीय समाज के लिए परिवर्तन, स्वतंत्रता और विकसित होती सांस्कृतिक परिप्रेक्ष्य का प्रतीक हैं।
Team Kharchaa Pani - Priya Sharma
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