नैनीताल के भूमियाधार में पानी और सड़क के लिए जारी आंदोलन, ग्रामीणों ने किया जोरदार प्रदर्शन
Nainital News : नैनीताल के भूमियाधार के ग्रामीणों ने पानी और सड़क के लिए अपना आंदोलन तेज किया भूमियाधार के ग्रामीण कई दिनों से पानी और मोटर मार्ग के लिए धरना प्रदर्शन किया उनके समर्थन में समाजसेवी शीलू कुमार भी पहुंचे ग्रामीण का कहना है कि 10 वर्षों से विधायक सरिता आर्या का गढ़ होने […]
नैनीताल के भूमियाधार में पानी और सड़क के लिए जारी आंदोलन
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कम शब्दों में कहें तो, नैनीताल के भूमियाधार गांव के ग्रामीणों ने पानी और सड़क की अनिवार्यता के लिए अपना विरोध तेज कर दिया है। पिछले कुछ दिनों से यह ग्रामीण धरने में बैठे हैं और उनकी इस मांग का समर्थन समाजसेवी शीलू कुमार ने भी किया है। यह आन्दोलन विधायक सरिता आर्या द्वारा दशकों से सत्ता में रहते हुए भी ग्रामीणों की स्थिति में सुधार ना होने से प्रेरित है।
भूमियाधार के ग्रामीणों का प्रदर्शन
नैनीताल के भूमियाधार के ग्रामीणों ने एक दिवसीय धरना प्रदर्शन किया, जिससे यह स्पष्ट हो गया है कि वे प्रदर्शन के जरिए सरकार से अपनी मांगें पूरा करने का अनुरोध कर रहे हैं। पंकज बिष्ट की अगुवाई में गाँव के लोग हल्द्वानी-भवाली रोड पर इकट्ठा हुए। इस धरने को बेतालघाट के भी स्थानीय नागरिकों और समाजसेवियों का समर्थन मिला। ग्रामीणों ने नारे लगाए कि यदि चुनाव से पहले उनकी सड़क निर्माण की मांग पूरी नहीं होती है, तो वे 2027 के विधानसभा चुनाव का बहिष्कार करने की धमकी भी दे रहे हैं।
भूमियाधार के लोगों की उच्च प्राथमिकता
ग्रामीणों का कहना है कि पानी और सड़क समस्याओं के कारण उन्हें भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। इसका असर विशेष रूप से बच्चों, बीमार लोगों और बुजुर्गों पर पड़ता है। शाम होते ही जंगली जानवरों के हमलों का खतरा भी बढ़ जाता है; ऐसे में ग्रामीण सुरक्षित महसूस नहीं कर रहे हैं।
विधायक का गढ़, लेकिन क्या कोई कार्रवाई?
ग्रामीणों ने विधायक सरिता आर्या की क्षेत्रीय सांसद होने के बावजूद आवश्यक सुविधाओं का न होना दर्शाने वाले आरोप लगाए। प्रदर्शनकारी ग्रामीणों ने कहा, "जब हमारी मूलभूत आवश्यकताएं पूर्ण नहीं हो रही हैं, तो हम अपने वोट का अधिकार क्यों प्रयोग करें?" व्यवस्था के प्रति अपनी नाखुशी एवं असंतोष को दर्शाते हुए उन्होंने "रोड नहीं तो वोट नहीं" का नारा भी लगाया।
अगर उनकी मांगें जल्द ही पूरी नहीं की गईं, तो ग्रामीणों ने आगे की कार्रवाई करने का भी संकेत दिया है। उनका कहना है कि यदि उनकी मूलभूत आवश्यकताएं पूरी नहीं होती हैं, तो वे और अधिक उग्र आंदोलन के लिए मजबूर होंगे, जिसकी जिम्मेदारी पूरी तरह सरकार और प्रशासन की होगी।
इससे साफ है कि सरकार को इस आंदोलन को गंभीरता से लेना होगा और स्थानीय समस्याओं का समाधान निकालना होगा। खुली सड़कों और पानी की अनिवार्यता न केवल विकास का संकेत है, बल्कि यह उनके स्वास्थ्य एवं सुरक्षा से भी जुड़ा हुआ है।
अंततः, यह भविष्यवाणी की जा सकती है कि यदि नैनीताल के भूिमयाधार के निवासियों की मांगे न मानी गईं, तो यह आंदोलन अन्य क्षेत्रों में भी फैल सकता है। सरकार को चाहिए कि वह स्थानीय लोगों की सुनवाई करें और विकास कार्यों में तेजी लाए।
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सादर,
टीम खर्चा पानी - सौरभा
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