ज्योलीकोट दूषित पानी मामला: हाईकोर्ट ने अधिकारियों का झूठ किया बेनकाब
नैनीताल के ज्योलीकोट में लोग मर रहे हैं। लेकिन अफ़सर कह रहे हैं कि सब चंगा सी। ये फटकार उत्तराखंड हाईकोर्ट की है।जिसने जल संस्थान के अधिकारियों की नींद उड़ाकर रख दी है। आखिर नैनीताल के 15 साल पुराने वाटर टैंक में ऐसा क्या मिला कि एक केमिस्ट ने इस्तीफा दे दिया? दूषित पानी से … The post ज्योलीकोट दूषित पानी केस: मामला पहुंचा हाईकोर्ट, पकड़ा गया अधिकारियों का झूठ appeared first on Khabar Uttarakhand - Uttarakhand News.
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कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखंड के ज्योलीकोट में लोग दूषित पानी के कारण गंभीर स्वास्थ्य संकट का सामना कर रहे हैं, जबकि अधिकारियों की चुप्पी और झूठी जानकारी ने स्थिति को और खराब किया है।
ज्योलीकोट दूषित पानी मामला: हाईकोर्ट की सख्त कार्रवाई
नैनीताल के ज्योलीकोट क्षेत्र में लोग लगातार दूषित पानी से बीमार हो रहे हैं और इसकी गंभीरता अब उच्च न्यायालय तक पहुँच गई है। इस मामले में अधिकारियों को चेतावनी देते हुए उत्तराखंड हाईकोर्ट ने यह सवाल उठाया कि आखिर जल संस्थान के अधिकारियों ने इस स्थिति को सुधारने के लिए क्या कदम उठाए हैं।
दोषी अधिकारियों पर न्यायालय का गुस्सा
न्यायालय ने जल संस्थान के अधिकारियों की तीखी आलोचना की और उनके द्वारा दी गई झूठी जानकारी को बेनकाब किया है। जब अदालत में अधिकारियों ने दावा किया कि सब कुछ सामान्य है, तब असली स्थिति की जांच ने उनके दावों की पोल खोल दी।
दूषित पानी से गंभीर स्वास्थ्य संकट
ज्योलीकोट, चोपड़ा, खुर्पाताल और सड़ियाताल क्षेत्रों में बर्बाद हुए हालात ने स्थानीय निवासियों को बेहद चिंतित कर दिया है। दुर्गापुर पेयजल संयंत्र जहां ज्योलीकोट का पानी सप्लाई किया जाता है, वहां सीवर ट्रीटमेंट प्लांट के ऊपर होने के चलते दूषित पानी साफ पानी में मिल रहा था। इस स्रोत से आने वाला गंदा पानी अनेक लोगों के जीवन के लिए खतरा बन गया था।
स्थानीय लोगों की शिकायतें और सरकार की अनसुनी
स्थानीय लोग, विशेषकर 20 जून से, गंदे पानी के झाग वाली आपूर्ति के खिलाफ शिकायतें कर रहे थे। उनके संक्रामक बिमारीयों का शिकार होने के बाद भी जल संस्थान के अधिकारियों ने उनकी शिकायतों पर ध्यान नहीं दिया। ज्योलीकोट में 200 से अधिक लोग गंभीर पेट के संक्रमण की चपेट में आ चुके हैं।
मौत का चारा: तीन लोगों का असामयिक निधन
ज्योलीकोट की 26 वर्षीय नीमा जोशी, 16 वर्षीय रितेश और एक स्थानीय महिला अनीता की दूषित पानी के कारण मृत्यु हो गई। जनाक्रोश के आगे झुकते हुए प्रशासन ने अंततः 27 अगस्त को दूषित पानी कीलाइन को काटने का निर्णय लिया।
हाईकोर्ट का सख्त रुख और अधिकारियों की निष्क्रियता
कानून द्वारा सख्त फटकार के बाद, अदालत ने राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को इस मामले की जांच कमिटी में शामिल किया। मुख्य सचिव आनंद वर्धन को 7 दिन के भीतर विस्तृत रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया गया है। ऐसा लग रहा है कि अधिकारियों के पास अब कोई रक्षा नहीं है।
सीनियर केमिस्ट का इस्तीफा
जल संस्थान के सीनियर केमिस्ट योगेंद्र पाल ने भी इस मामले के बोझ को सहन नहीं कर पाने के कारण इस्तीफा दे दिया। उन्होंने अपने इस्तीफे में कहा कि वह विभागीय दबाव और घटना से गंभीर रूप से प्रभावित हैं।
मुख्यमंत्री का संज्ञान और आदेश
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी इस गंभीर मामले में संज्ञान लिया है और पूरे राज्य में पेयजल एवं सीवर लाइनों का ऑडिट कराने का निर्देश दिया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि हर घर में सुरक्षित पानी पहुंचाना सरकार की जिम्मेदारी है।
इस संकट ने застав दिया है कि सरकार अपनी जिम्मेदारियों पर ध्यान दे और हर नागरिक की सुरक्षा सुनिश्चित करें।
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Team Kharchaa Pani - Neelam Sharma
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