खेल विभाग के पोर्टल में डाटा चुराने का बड़ा मामला, 3.50 लाख खिलाड़ियों का डाटा खतरे में
Uttarakhand News : राष्ट्रीय खेलों के दौरान खेल विभाग ने पोर्टल और मोबाइल ऐप तैयार करने की जिम्मेदारी खेब टेक स्ट्राटेजी प्राइवेट लिमिटेड को सौंपी थी। इन पोर्टल और ऐप को आगे आईटीडीए के सर्वर पर अपलोड किया जाना था। हालांकि, इससे पहले ही कंपनी की ओर से यूजर आईडी, पासवर्ड समेत अन्य लॉगिन संबंधी […]
खेल विभाग के पोर्टल में डाटा चुराने का बड़ा मामला, 3.50 लाख खिलाड़ियों का डाटा खतरे में
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कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखंड के खेल विभाग के पोर्टल में एक बड़ा गोपनीयता संकट उत्पन्न हो गया है। 3.50 लाख खिलाड़ियों के व्यक्तिगत डाटा के चोरी होने का डर खिलाड़ियों और खेल प्रेमियों के बीच चर्चा का विषय बन गया है।
उत्तराखंड की राष्ट्रीय खेलों के दौरान, खेल विभाग ने एक पोर्टल और मोबाइल ऐप बनाने की जिम्मेदारी खेब टेक स्ट्राटेजी प्राइवेट लिमिटेड को सौंपी थी। इस पोर्टल और ऐप को आईटीडीए के सर्वर पर अपलोड किया जाना था, लेकिन इससे पहले ही कंपनी ने यूजर आईडी, पासवर्ड और अन्य लॉगिन संबंधी विवरण में बदलाव करने की सूचना दी है।
3.50 लाख खिलाड़ियों के डाटा हुआ चोरी?
यह चिंता का विषय है कि खेल विभाग के पास मौजूद जानकारी के अनुसार, कंपनी के पास 3.50 लाख से अधिक खिलाड़ियों का डाटा होता है। ऐसे में, इस डाटा के संभावित चोरी होने और इसके गलत इस्तेमाल को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। क्या यह डाटा किसी और के हाथ में जा सकता है? क्या खिलाड़ियों की गोपनीयता का ध्यान रखा गया है? यह कुछ ऐसे सवाल हैं जो अब लोगों के मन में उत्पन्न हो रहे हैं।
3.50 लाख खिलाड़ियों ने योजना के लिए किया था आवेदन
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एक सितंबर को सीएम चैंपियंस ट्रॉफी का उद्घाटन किया था, जिसमें लगभग 3.50 लाख खिलाड़ियों ने इसमें भागीदारी के लिए आवेदन दिया था। इस के अंतर्गत मुख्यमंत्री उदीयमान खिलाड़ी उन्नयन खेल छात्रवृत्ति योजना भी शामिल है, जिसके तहत कंपनी के पास इसी योजना से संबंधित डाटा भी है।

3,900 खिलाड़ियों को दी थी 11.25 करोड़ की छात्रवृत्ति
पिछले वर्ष इस छात्रवृत्ति योजना से लगभग 3,900 खिलाड़ियों को 11.25 करोड़ रुपये की छात्रवृत्ति प्रदान की गई थी। अब, एक बार फिर से खिलाड़ियों का डाटा पोर्टल पर दर्ज किया गया था। इस स्थिति ने सरकारी अधिकारीयों को भी चिंता में डाल दिया है क्योंकि इस तरह की संवेदनशील जानकारी का गलत हाथों में जाना गंभीर परिणाम ला सकता है।
खिलाड़ियों की व्यक्तिगत जानकारी, जैसे नाम, पता, संपर्क सूत्र आदि, एक निजी कंपनी के पास होना और उस डाटा का किसी प्रकार से सुरक्षित न होना, यह सभी चिंता की बातें हैं। यदि इस डाटा का दुरुपयोग किया जाता है, तो यह खिलाड़ियों और उनके परिवारों के लिए एक गंभीर खतरा बन सकता है।
खेल विभाग को जरूरी कदम उठाते हुए इस मामले की गहन जांच करनी चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि खिलाड़ियों की जानकारी सुरक्षित रहे। इसके अलावा, खिलाड़ियों को भी इस संबंध में जागरूक होना चाहिए ताकि वे अपनी जानकारी को सुरक्षित रख सकें।
इस घटनाक्रम से यह स्पष्ट होता है कि सरकारी महकमा तकनीकी दृष्टि से कितनी सक्षम है और क्या इसे व्यक्तिगत सूचनाओं की सुरक्षा की गंभीरता को समझना चाहिए।
अंत में, हमें आशा है कि खेल विभाग इस मामले को प्राथमिकता से लेगा और खिलाड़ियों का डाटा सुरक्षित रखने के लिए ठोस उपाय करेगा।
इस घटना के बाद, यह चर्चा और भी ज़्यादा महत्वपूर्ण हो गई है कि किस तरह से संवेदनशील डेटा को टैक्नोलॉजिकल रूप से सुरक्षित रखा जा सकता है।
कार्यवाही पर नजर रखना जरूरी है, ताकि इस तरह की घटनाएं भविष्य में न हों।
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Team Kharchaa Pani, प्रियंका शर्मा
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