उत्तराखंड में ED ने BJP को घेरने की कोशिश की? VPDO भर्ती घोटाले में बड़ा खुलासा
उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UKSSSC) द्वारा वर्ष 2016 में आयोजित ग्राम पंचायत विकास अधिकारी (VPDO) भर्ती परीक्षा में हुई धांधली का मामला एक बार फिर प्रदेश की राजनीति में गर्मा गया है। हाल ही में ED द्वारा चंदन सिंह जीना के ठिकानों पर की गई छापेमारी के बाद, पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत को इस … The post तो ED ने इस बार BJP को फंसाया ?, VPDO भर्ती घोटाले में UKSSSC के पूर्व सदस्य का बड़ा खुलासा appeared first on Khabar Uttarakhand - Uttarakhand News.
ED द्वारा BJP पर उठे सवाल: VPDO भर्ती घोटाले में UKSSSC के पूर्व सदस्य का खुलासा
कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UKSSSC) द्वारा 2016 में आयोजित ग्राम पंचायत विकास अधिकारी (VPDO) भर्ती परीक्षा में घोटाले का मामला फिर से प्रदेश की राजनीति में हलचल मचा रहा है। हाल ही में प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा चंदन सिंह जीना के ठिकानों पर कार्रवाई के बाद, पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत को इसमें फंसाने के प्रयासों पर आलोचना की जा रही है।
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हरीश रावत का बचाव: UKSSSC के पूर्व सदस्य की अपील
UKSSSC के पूर्व सदस्य दीवान सिंह भैसोड़ा ने हाल के राजनीतिक घटनाक्रमों और इस घोटाले की जांच पर अपनी गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने सोशल मीडिया पर कई साक्ष्य पेश करते हुए कहा कि यह आरोप राजनीतिक साजिश का हिस्सा हैं, जिसमें पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत को निशाना बनाया जा रहा है।
VPDO परीक्षा और उसके बाद का घटनाक्रम
6 मार्च 2016 को आयोजित VPDO परीक्षा के परिणाम आने पर अभ्यर्थियों ने परीक्षा में अनियमितताओं के खिलाफ प्रदर्शन किया था। छात्रों का इतना बड़ा प्रदर्शन हो गया कि उन्हें तत्कालीन राज्यपाल के समक्ष अपनी बात रखने के लिए जाना पड़ा। राज्यपाल ने तत्काल एक जांच समिति का गठन कर दिया, लेकिन जांच ने मात्र 10 दिनों में यह सिद्ध करने का दावा किया कि परीक्षा में कोई गड़बड़ी नहीं हुई थी, जिसके बाद मामला ठंडा पड़ गया।
हरिद्वार में फिर से जन्मी आशाएं: उच्च स्तरीय जांच समिति
हरीश रावत की फिर से सरकार बनने पर, जनभावनाओं को देखते हुए 20 मई 2016 को उच्चस्तरीय जांच समिति का गठन हुआ। हालांकि, इस समिति ने भी अपनी ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया, जिससे aspirants के बीच असंतोष बढ़ा। दीवान सिंह और अन्य सदस्यों ने तमाम सबूतों के साथ अपनी बात रखने का प्रयास किया, लेकिन उन्हें सुनवाई का मौका नहीं मिला।
पुनः परीक्षा: 2018 के चौंकाने वाले परिणाम
25 फरवरी 2018 को पुनः परीक्षा का आयोजन किया गया, जिसमें 181 मेरिट अभ्यर्थियों में से 167 असफल रहे। इससे साफ हो गया कि 2016 में हुई परीक्षा में गड़बड़ी हुई थी। इस परीक्षा ने सरकारी तंत्र की सच्चाई को उजागर कर दिया।
विजिलेंस से STF की जांच तक
इसके बाद इस मामले की जांच विजिलेंस को सौंपी गई। हालांकि, वर्षों बिता देने के बाद भी कोई ठोस निष्कर्ष नहीं निकल सका। 2021 में जब मामला STF को सौंपा गया, तो थोक के आधार पर गिरफ्तारियां हुईं। लेकिन, दीवान सिंह ने दुख जताया है कि इस मामले का निर्णय अब तक नहीं मिला है।
ED की भूमिका पर सवाल
दीवान सिंह ने ED की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि सिर्फ चंदन सिंह जीना के ठिकानों पर छापेमारी करना पर्याप्त नहीं है। उन्हें यह जानने की जरूरत है कि क्या ED ने उन अधिकारियों की संपत्तियों का भी ब्योरा लिया है जो पहले ही जेल जा चुके हैं।
पूर्व विधायक मनोज रावत का समर्थन
इस पूरे घटनाक्रम पर पूर्व विधायक मनोज रावत ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री पर आरोप लगाना राजनीतिक साजिश है। उनकी मान्यता है कि जब उन्होंने 2016 में रावत को जानकारी दी थी, तो कोई भी विश्वास नहीं करता था क्योंकि आर.बी.एस. रावत की छवि साफ-सुथरी थी। लेकिन उनके करीबी लोग कथित रूप से शामिल थे।
इस घटनाक्रम से स्पष्ट है कि आने वाले दिनों में उत्तराखंड की राजनीति में VPDO घोटाले को लेकर आरोप-प्रत्यारोप का दौर जोर पकड़ने वाला है।
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सादर, टीम खर्चा पानी
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