हरदा का सियासी भविष्य: क्या संन्यास की ओर बढ़ रहे हैं? जानें सचाई
उत्तराखंड की राजनीति में “हरदा” के नाम से मशहूर पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के कद्दावर नेता हरीश रावत एक बार फिर सुर्खियों के केंद्र में हैं। संन्यास के पुराने बयानों और हाल में संगठनात्मक पदों से इस्तीफे की पेशकश को लेकर चल रही सियासी चर्चाओं ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या सत्तर … The post क्या हरदा की सियासी पारी अब खात्मे की ओर ? संन्यास के पुराने बयानों ने फिर पकड़ा जोर appeared first on Khabar Uttarakhand - Uttarakhand News.
हरदा का सियासी भविष्य: क्या संन्यास की ओर बढ़ रहे हैं? जानें सचाई
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कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखंड की राजनीति में हरीश रावत की स्थिति अब सवालों के घेरे में है। क्या वे सच में संन्यास लेने के विचार में हैं? यह चर्चा इस समय पूरे राज्य में गर्म है।
उत्तराखंड की राजनीति में “हरदा” के नाम से मशहूर पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के प्रमुख नेता हरीश रावत एक बार फिर सुर्खियों में हैं। उनके संन्यास के पुराने बयानों और हाल ही में संगठनात्मक पदों से इस्तीफे की पेशकश पर चल रही सियासी चर्चाओं ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या सत्तर के दशक के अंत के इस सियासी योद्धा की पारी अब समाप्ति की ओर है?
संन्यास की पुरानी अफवाहें और इस्तीफे का नया मोड़
हरीश रावत की राजनीति का एक अद्वितीय तरीका रहा है, जिसे 'दबाव की राजनीति' कहा जा सकता है। जब भी पार्टी आलाकमान या राज्य संगठन से उनकी अनबन हुई, उन्होंने सोशल मीडिया पर एकांतवास, संन्यास या राजनीति छोड़ने के संकेत देकर दबाव बनाने का उपाय किया। हाल ही में, उनकी पूर्व OSD चंदन सिंह जीना के परिसरों पर ईडी की छापेमारी के बाद रावत ने नैतिक आधार पर सीडब्लूसी की स्थायी सदस्यता और राज्य कार्यकारिणी पद से हटने की पेशकश की। हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट किया कि वे “कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता” नहीं छोड़ रहे हैं और पार्टी उनके खून में बसी है।
हाल ही में जब उनकी स्वास्थ्य स्थिति को लेकर चिंताएं व्यक्त की गईं, तो उन्होंने सोशल मीडिया पर बैडमिंटन खेलते हुए वीडियो पोस्ट कर यह संदेश दिया कि वे अभी भी सियासत में सक्रिय हैं। उनका यह कदम इस बात का संकेत है कि वे यह साबित करना चाहते हैं कि उम्र बढ़ने के बावजूद उनकी राजनीतिक सक्रियता कम नहीं हुई है। रावत समझते हैं कि पहाड़ी राजनीति में जनता से जुड़ाव और निरंतर दृश्यता सबसे बड़ा हथियार है। उनके बैडमिंटन कोर्ट की तस्वीरें और जलेबी बनाने वाली वीडियो क्लिपें उन्हें मीडिया और जनता की चर्चा में बनाए रखती हैं।
कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति और रावत की घेराबंदी
उत्तराखंड कांग्रेस लंबे समय से गुटबाजी से जूझ रही है। रावत के खिलाफ पार्टी का एक धड़ा लगातार इस बात की वकालत कर रहा है कि अब नेतृत्व परिवर्तन जरूरी है। 2017 और 2022 के विधानसभा चुनावों में मिली हार और रावत के अपनी सीटें न जीत पाने के कारण विरोधी गुट को उनकी घेराबंदी का मौका मिला है।
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सियासी पिच को बचाने की एक और पैंतरेबाजी
क्या हरीश रावत की राजनीति खत्म हो जाएगी? यह प्रश्न इस समय बड़ी चर्चा का विषय है। उनके व्यक्तिगत हार ने उनके जनाधार पर सवाल उठाए हैं, लेकिन फिर भी, उत्तराखंड में वे आज भी कांग्रेस का सबसे जाना-पहचाना और लोकप्रिय चेहरा हैं। उनका दावा है कि उन पर सीबीआई और रंगदारी के आरोपों से छवि को धक्का लगा है, लेकिन ऐसे समय में वे खुद को ‘विक्टिम’ के रूप में प्रस्तुत कर सहानुभूति अर्जित करते हैं। यही उनकी खासियत है। पार्टी की युवा पीढ़ी नए नेताओं के माध्यम से रावत के प्रभुत्व को चुनौती देने का प्रयास कर रही है, लेकिन रावत का राजनीतिक चातुर्य उन्हें अंतिम समय में बाजी पलटने और आलाकमान को साधने की क्षमता प्रदान करता है।
इस प्रकार, हरीश रावत की राजनीति को इतनी जल्दी समाप्त मान लेना जल्दबाजी होगी। भले ही वे कानूनी, उम्र से संबंधित और पार्टी के आंतरिक मोर्चों पर चुनौतियों का सामना कर रहे हैं, लेकिन जब तक उत्तराखंड कांग्रेस में उनके स्तर का कोई विकल्प तैयार नहीं होता, तब तक हरदा पार्टी के लिए अप्रासंगिक नहीं हो सकते। उनका यह इस्तीफा उनका अंत नहीं, बल्कि अपनी सियासी पिच को बचाने की एक और चाल हो सकती है।
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सादर, टीम ख़र्चा पानी - द्वारा साक्षी देवी
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