रीवा की डॉ. सोनल अग्रवाल की सेवा समाप्ति: 3.5 साल की लंबी प्रक्रिया और प्रशासनिक सवाल
मध्य प्रदेश के रीवा स्थित श्याम शाह मेडिकल कॉलेज की सहायक प्राध्यापक डॉ. सोनल अग्रवाल की सेवाएं 16 सितंबर 2026 को समाप्त कर दी गईं। उनके खिलाफ मरीजों को निजी नर्सिंग होम जाने के लिए बाध्य करने की शिकायत की जांच करीब साढ़े तीन साल पहले ही पूरी हो चुकी थी और उच्चस्तरीय समिति ने … The post रीवा की डॉक्टर की साढ़े तीन साल बाद सेवा समाप्त, 2023 में ही कार्रवाई की हुई थी सिफारिश appeared first on Just Action.
रीवा की डॉ. सोनल अग्रवाल की सेवा समाप्ति: 3.5 साल की लंबी प्रक्रिया और प्रशासनिक सवाल
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कम शब्दों में कहें तो, मध्य प्रदेश के रीवा की सहायक प्राध्यापक डॉ. सोनल अग्रवाल की सेवाएं आखिरकार समाप्त कर दी गई हैं, लेकिन इसके पीछे की प्रक्रिया में ढाई वर्षों से अधिक का समय लग गया।
मध्य प्रदेश के रीवा में स्थित श्याम शाह मेडिकल कॉलेज की सहायक प्राध्यापक डॉ. सोनल अग्रवाल की सेवाएं 16 सितंबर 2026 को समाप्त कर दी गईं। बताया जा रहा है कि उनके खिलाफ मरीजों को निजी नर्सिंग होम जाने के लिए बाध्य करने की शिकायत की जांच लगभग साढ़े तीन साल पहले की गई थी, जिसके आधार पर उच्चस्तरीय समिति ने अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश भी की थी।
जांच की प्रक्रिया
रिकॉर्ड के अनुसार, चिकित्सा शिक्षा विभाग ने 7 फरवरी 2023 को इस शिकायत की जांच के लिए चार सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति का गठन किया था। समिति ने अपनी रिपोर्ट 1 मार्च 2023 को तैयार की और 7 मार्च को संबंधित कार्यालय भेजी। इसमें डॉ. सोनल अग्रवाल के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश की गई थी।
निर्णय लेने में देरी
हालाँकि, विभागीय स्तर पर नोटिस और स्पष्टीकरण की प्रक्रिया चली, लेकिन अंतिम निर्णय लेने में लगभग साढ़े तीन साल का समय लग गया। अंततः, कार्यकारिणी समिति के संकल्प के आधार पर उनके सेवाओं को समाप्त करने का आदेश 16 सितंबर 2026 को जारी किया गया।
सामुदायिक चिंताएँ
डॉ. सोनल अग्रवाल की सेवा समाप्ति का मामला अगस्त 2026 में रीवा के संजय गांधी अस्पताल में प्रसूता कल्पना मिश्रा और उनके नवजात की मौत के बाद एक बार फिर चर्चा में आया। अस्पताल की व्यवस्थाओं और डॉक्टरों की भूमिका पर सवाल उठे, जिसके परिणामस्वरूप प्रारंभिक कार्रवाई में दो डॉक्टरों और दो नर्सिंग अधिकारियों को निलंबित किया गया।
पूर्व स्थिति और कार्रवाई के बीच का द्वंद्व
हालांकि, यह ध्यान देने योग्य है कि डॉ. सोनल अग्रवाल के खिलाफ विभागीय कार्रवाई 2023 में मिली शिकायत और उसी वर्ष हुई जांच से संबंधित थी। अतः, अगस्त 2026 की घटना और उनकी पुरानी विभागीय कार्रवाई के बीच सीधे संबंध का निष्कर्ष निकालना कठिन है।
सवाल उठाने वाले मुद्दे
अब मुख्य सवाल यह है कि जब 2023 में जांच पूरी होने के बाद कार्रवाई की सिफारिश कर दी गई थी, तो अंतिम निर्णय लेने में इतना लंबा समय क्यों लगा। चिकित्सा शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली और इस मामले के लंबित रहने के दौरान की प्रक्रिया को लेकर जवाबदेही की मांग उठ रही है।
संबंधित अधिकारियों की प्रतिक्रिया
रीवा संभाग के कमिश्नर शीलेंद्र सिंह का कहना है कि मामले में शासन ने निर्णय ले लिया है और वह शासन के निर्णय पर टिप्पणी नहीं करना चाहते। हालांकि, विभाग के प्रमुख सचिव सुखबीर सिंह और कमिश्नर एस. धनराजू से इस संबंध में प्रतिक्रिया लेने का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे बातचीत नहीं हो सकी।
सम्पूर्ण प्रक्रिया में यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि किस प्रकार से चिकित्सा शिक्षा विभाग में कार्यप्रणाली को सुधारने की आवश्यकता है ताकि ऐसे मामलों में निर्णय जल्दी और प्रभावी ढंग से लिया जा सके।
इस मामले में आगे की जानकारी के लिए, यहां क्लिक करें.
सादर,
टीम खरचा पानी
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