पहाड़ी स्वास्थ्य व्यवस्था की विफलता ने ली तीन जिंदगियां: मां और उसके जुड़वा बच्चे नहीं बचे
हमारे पहाड़ों में शायद लोगों की जान की कोई किमत नहीं बची है। ऐसा हम इसलिए कह रहे है क्योंकि इस बार हमारी बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था की भेंट एक मां और उसके जुड़वा बच्चे चढ़ गए। पहाड़ के भोले भाले लोग आए दिन सिस्टम की नाकामी के चलते अपनी जान गंवा रहे है। इस खबर … The post पहाड़ की बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था के भेंट चढ़ी तीन जिंदगियां, नहीं बचे जुड़वा बच्चे और मां appeared first on Khabar Uttarakhand - Uttarakhand News.
पहाड़ी स्वास्थ्य व्यवस्था की विफलता ने ली तीन जिंदगियां: मां और उसके जुड़वा बच्चे नहीं बचे
Breaking News, Daily Updates & Exclusive Stories - Kharchaa Pani
कम शब्दों में कहें तो, पहाड़ी क्षेत्र की स्वास्थ्य व्यवस्था की नाकामी ने एक मां और उसके जुड़वा बच्चों की जान ले ली। यह घटना पहाड़ों में स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति लापरवाही का उदाहरण है, जहां लोग अपनी जान गंवा रहे हैं।
स्वास्थ्य व्यवस्था की विफलता ने छीनी मां और बच्चों की जिंदगियां
पिछले कई सालों से, पहाड़ियों में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति लगातार डगमगा रही है। चाहे कितने भी आंदोलन किए जाएं या स्वास्थ्य मंत्री बदलें, समस्या ठिकाने नहीं पहुंच रही है। यह हालात तभी सामने आती हैं जब किसी जीवन को संकट में डालते हुए यह प्रणाली असफल होती है। इस बार, एक 24 वर्षीय गर्भवती महिला निशा की और उसके जुड़वा बच्चों की जान गई।
निशा के लिए परिवार ने लगाई अस्पतालों की दौड़
30 अगस्त की रात, निशा को अचानक सांस लेने में दिक्कत होने लगी। उस समय परिवार ने सोचा कि यह सामान्य लक्षण हो सकता है, लेकिन 31 अगस्त की सुबह तक उनकी स्थिति गंभीर हो गई। परिवार ने निशा को अस्पताल ले जाने का निर्णय लिया।
अस्पतालों में हो रही रेफर गेम का शिकार बनी निशा
परिवार सबसे पहले रामनगर के रामदत्त जोशी राजकीय चिकित्सालय गए। डॉक्टरों ने इसे गंभीर मामला बताते हुए उन्हें हल्द्वानी के सुशीला तिवारी अस्पताल ले जाने की सलाह दी। अस्पताल में पहुँचने के बाद भी, किसी भी तरह की राहत नहीं मिली और उन्हें एक निजी सेंटर में अल्ट्रासाउंड कराने के लिए भेजा गया।
डॉक्टरों द्वारा निराशा का सामना
परिजनों ने बताया कि अल्ट्रासाउंड की रिपोर्ट के बाद डॉक्टरों ने उन्हें घर जाने की सलाह दी। लेकिन 1 सितंबर की रात, निशा की हालत फिर से बिगड़ गई। उन्होंने दोबारा उसी अस्पताल में जाकर मदद मांगी, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें भर्ती करने से मना कर दिया औरसीधा एक प्राइवेट अस्पताल भेज दिया।
निशा की असहनीय स्थिति
परिवार ने हार मानते हुए निशा को काशीपुर ले जाने का निर्णय लिया। काशीपुर पहुँचने पर, उन्हें तीन अलग-अलग अस्पतालों के चक्कर लगाने पड़े, लेकिन किसी ने भी उचित इलाज नहीं दिया। अंततः ऑपरेशन थिएटर में पहुँचते ही निशा को दो कार्डियक अटैक आए और उसकी जान चली गई।
जुड़वा बच्चों का भी नहीं बचना
विशेषज्ञों ने अब जल्दी से ऑपरेशन किया जिससे जुड़वां बच्चों को निकाला गया, लेकिन दुख की बात यह है कि वे भी जी नहीं सके। यह किसके लिए जिम्मेदार है? क्या वह स्वास्थ्य मंत्री हैं जो केवल आश्वासन देते हैं या वे अस्पताल जो मरीजों को इस तरह बिना इलाज के ढोते हैं?
इस घटना ने यह स्पष्ट कर दिया है कि पहाड़ी क्षेत्रों में स्वास्थ्य व्यवस्था को सुधारने की तत्काल आवश्यकता है, अन्यथा यह फिर से किसी और की ज़िंदगी ले सकती है।
हम सभी से अनुरोध करना चाहेंगे कि इस मुद्दे पर ध्यान दें और आवाज उठाएं। For more updates, visit Kharchaa Pani.
— Team Kharchaa Pani, निशा शर्मा
What's Your Reaction?