चमोली THDC टनल हादसा: लापरवाही की वजह से गई 8 लोगों की जान, ताजा रिपोर्ट से हुआ बड़ा खुलासा
13 अगस्त को विष्णुगाड पीपलकोटी जल विद्युत परियोजना की निर्माणाधीन सुरंग में हुए हादसे ने एक बार फिर पूरे सिस्टम की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल उठने लगे हैं कि क्या पिपलकोटी की सुरंग के बारे में सब कुछ पता होते हुए भी लापरवाही बरती गई थी। चमोली THDC टनल हादसे में … The post चमोली THDC टनल हादसा: लापरवाही से गई 8 लोगों की जान!, THDC की रिपोर्ट में हुआ बड़ा खुलासा appeared first on Khabar Uttarakhand - Uttarakhand News.
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कम शब्दों में कहें तो, 13 अगस्त को चमोली में हुए टनल हादसे ने सिस्टम पर गंभीर सवाल उठाए हैं। क्या पिपलकोटी की सुरंग में सब कुछ जानते हुए भी लापरवाही की गई? THDC की रिपोर्ट में कई चौकाने वाले तथ्य सामने आए हैं।
चमोली THDC टनल हादसे में गई 8 लोगों की जान
उत्तराखंड की विष्णुगाड पीपलकोटी जल विद्युत परियोजना की निर्माणाधीन सुरंग में 13 अगस्त को हुए हादसे ने एक बार फिर सुरक्षा प्रावधानों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सुरंग के अंदर पानी घुसने से 22 मजदूरों में से 8 की मौत हो गई, जबकि अन्य का इलाज चल रहा है। अभी भी दो श्रमिक लापता हैं और इस पूरे मामले की जांच चल रही है।
आपदा नहीं बल्कि लापरवाही बनी वजह!
हादसे के बाद आई THDC की वैज्ञानिक रिपोर्ट ने एक नई परत खोली है। इस रिपोर्ट के अनुसार, यह पूरा घटनाक्रम पहले से दी गई चेतावनियों का नतीजा था। तीन किलोमीटर से अधिक लंबी टेल-रेस टनल के बारे में पहले ही चेतावनी संकेतों का उल्लेख किया गया था।
THDC की रिपोर्ट में हुए चौकाने वाले खुलासे
रिपोर्ट में बताया गया है कि परियोजना की टेल-रेस टनल (TRT) 3.04 किलोमीटर लंबी है, जिसमें चट्टानों की गुणवत्ता आरएमआर (रॉक मास रेटिंग) के अनुसार दर्ज की गई है। रिपोर्ट में कई हिस्सों में आरएमआर 33 से 37 के बीच पाया गया, जिसे कमजोर चट्टान की श्रेणी में रखा गया। इसके अलावा, कई स्थानों पर पानी की स्थिति केवल नम नहीं, बल्कि टपकते और बहते पानी की भी थी।
खतरे से निपटने का पूरा प्लान पहले से था तैयार
रिपोर्ट से यह भी सामने आया है कि THDC ने इस खतरे से निपटने के लिए पहले ही एक विस्तृत प्लान बना रखा था। अब यह सवाल उठता है कि अगर खतरे की जानकारी थी और आवश्यक सुझाव भी दिए गए थे, तो फिर 13 अगस्त को इतना बड़ा हादसा क्यों हुआ? क्या इसकी सुखदायी योजनाओं को नजरअंदाज किया गया? क्या निर्माण प्रक्रिया के दौरान सुरक्षा मानकों में लापरवाही बरती गई?
इस अमानवीय हादसे ने हमें सोचने पर मजबूर कर दिया है कि विकास की दौड़ में किस तरह से सुरक्षा मानकों की अनदेखी की जाती है। हम एक ऐसी स्थिति में पहुँच गए हैं जहाँ मानव जीवन की कीमत एक प्रोजेक्ट की देरी से अधिक महत्वपूर्ण नहीं रह गई है।
इस हादसे की पूरी जानकारी और ताजा अपडेट्स के लिए, कृपया हमें यहाँ देखें.
Team Kharchaa Pani, राधिका शर्मा
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