आजमगढ़ में मेडिकल कॉलेज के लिए भूमि देने वाले 110 परिवारों पर गहराया रोजगार संकट
आजमगढ़। राजकीय मेडिकल कॉलेज चक्रपानपुर के निर्माण के लिए अपनी जमीन देने वाले करीब 110 परिवारों के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो गया है। प्रभावित परिवारों का कहना है कि जमीन देने के समय परिवार के एक सदस्य को मेडिकल कॉलेज में रोजगार का भरोसा दिया गया था। इसी भरोसे के बाद कई परिवारों … The post आजमगढ़ में मेडिकल कॉलेज के लिए जमीन देने वाले 110 परिवारों पर रोजगार का संकट appeared first on Just Action.
आजमगढ़ में मेडिकल कॉलेज के लिए भूमि देने वाले 110 परिवारों पर गहराया रोजगार संकट
कम शब्दों में कहें तो, आजमगढ़ के चक्रपानपुर में राजकीय मेडिकल कॉलेज के निर्माण के लिए जमीन देने वाले 110 परिवार बढ़ते रोजगार संकट का सामना कर रहे हैं। इन परिवारों का कहना है कि उन्हें इस जमीन के बदले रोजगार का आश्वासन दिया गया था, लेकिन अब उनकी नौकरी चली गई है।
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राजकीय मेडिकल कॉलेज चक्रपानपुर के निर्माण के लिए अपनी कीमती ज़मीन देने वाले करीब 110 परिवारों के सदस्य अब गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। ये परिवार सरकार से अपेक्षा करते थे कि जमीन देने के समय एक परिवार के सदस्य को कॉलेज में काम देने का आश्वासन दिया गया था। इसी आश्वासन पर उन्होंने अपनी जमीन दी थी, जिससे आज की स्थिति काफी चिंताजनक हो गई है।
इन परिवारों के कई सदस्य 2012 से मेडिकल कॉलेज में अपनी सेवाएं दे रहे थे, लेकिन वर्ष 2025 में सुरक्षा व्यवस्था में बदलाव के कारण करीब 110 कर्मचारियों की नौकरी चली गई। इनमें से अधिकांश लोग अब 40 से 55 वर्ष की उम्र में हैं और नए रोजगार की तलाश कर रहे हैं।
जमीन के बदले रोजगार का वादा
प्रभावित कर्मचारी बताते हैं कि जब उन्होंने अपनी जमीन मेडिकल कॉलेज के लिए दी थी, तब उन्हें बताया गया था कि उनकी नौकरी सुरक्षित रहेगी। लेकिन अब जब उनकी नौकरी चली गई है, तो परिवार के खर्च चलाने और बच्चों की पढ़ाई जारी रखने में समस्या उत्पन्न हो गई है। कई व्यक्तियों को अब नई नौकरियों के लिए उम्र बढ़ने की चिंता भी सता रही है।
कर्मचारियों की समस्याओं के समाधान के लिए उन्होंने आजमगढ़ के पांच विधायकों से मुलाकात की। विधायकों ने मामले को लेकर मेडिकल कॉलेज प्रशासन से अनुरोध किया, लेकिन प्रशासन ने शासन के निर्देशों का हवाला देते हुए सहमति नहीं दी। इसके बाद प्रभावित कर्मचारियों ने मंडलायुक्त और जिलाधिकारी से भी मिलकर अपनी समस्या रखी।
गवर्नमेंट की उदासीनता
प्रभावित कर्मचारियों ने अपनी पेशेवर स्थिति को बहाल करने के लिए शासन स्तर पर भी मांग उठाई। उन्होंने मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री से मिलकर पुन: नौकरियों की बहाली का अनुरोध किया। अब बहुत से प्रभावित कर्मचारी यह महसूस कर रहे हैं कि उनके अलावा कोई उनकी स्थिति को समझने वाला नहीं है।
स्थायी समाधान की उम्मीद
राजकीय मेडिकल कॉलेज चक्रपानपुर के प्राचार्य बीडी सिंह ने स्पष्ट किया है कि कर्मचारियों को मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने नहीं हटाया है। शासन के निर्देशों के अनुसार, सुरक्षा संबंधी कार्यों में बदलाव किया गया है जिसकी वजह से स्थानीय सुरक्षा कर्मचारियों को नहीं रखा जा सका है। उन्होंने कहा कि प्रभावित कर्मचारियों की फाइल शासन को भेजी गई है और उम्मीद है कि जल्द ही इस समस्या का समाधान होगा।
अब प्रभावित परिवार शासन के निर्णय की प्रतीक्षा कर रहे हैं। कर्मचारियों की मांग है कि जमीन देने के समय किए गए रोजगार संबंधी वादों को ध्यान में रखते हुए उनके लिए स्थायी समाधान निकाला जाए, जिससे उनके परिवार फिर से एक स्थिर स्थिति में लौट सकें।
यह स्थिति न केवल प्रभावित परिवारों के लिए चिंताजनक है, बल्कि स्थानीय समुदाय के लिए भी गंभीरता से चिंतन का विषय है। राज्य सरकार को चाहिए कि वह इन परिवारों की आवश्यकताओं को समझें और सक्रिय कदम उठाने में तत्परता दिखाए।
रिपोर्ट: पूनम
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