विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस: CM धामी ने शहीदों को किया नमन और उनकी विरासत को याद किया

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी बुधवार को उत्तरांचल पंजाबी महासभा द्वारा प्रेम नगर आश्रम हरिद्वार में आयोजित विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस कार्यक्रम में सम्मिलित हुए। कार्यक्रम में भारत विभाजन की त्रासदी में शहीद हुए लाखों भारतीयों को श्रद्धांजलि अर्पित कर उनके बलिदान को याद किया गया। मुख्यमंत्री ने विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर शहीदों को किया … The post विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस, CM धामी ने शहीदों को किया नमन appeared first on Khabar Uttarakhand - Uttarakhand News.

Aug 15, 2026 - 00:34
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विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस: CM धामी ने शहीदों को किया नमन और उनकी विरासत को याद किया

विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस: CM धामी ने शहीदों को किया नमन और उनकी विरासत को याद किया

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कम शब्दों में कहें तो, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर लाखों शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की, जो भारत विभाजन की त्रासदी का शिकार बने।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बुधवार को हरिद्वार के प्रेम नगर आश्रम में उत्तरांचल पंजाबी महासभा द्वारा आयोजित विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस में भाग लिया। इस कार्यक्रम में, उन्होंने 1947 में भारत विभाजन के दौरान अपने प्राणों की आहुति देने वाले लाखों भारतीयों को श्रद्धांजलि अर्पित की। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह केवल एक राजनीतिक या भौगोलिक बंटवारा नहीं था, बल्कि यह करोड़ों लोगों की सांस्कृतिक और भावनात्मक पहचान का संकट था।

विभाजन की त्रासदी और इसकी महत्वता

मुख्यमंत्री धामी ने कहा, "1947 का विभाजन एक रात में करोड़ों लोगों की नसीब बदल गया, लोग एक-दूसरे से बिछड़ गए और लाखों परिवारों को अपने घरों को छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा।" उन्होंने आगे बताया कि इस दर्दनाक इतिहास को न केवल दिनों में बल्कि आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना आवश्यक है।

पीएम मोदी का ऐतिहासिक निर्णय

मुख्यमंत्री ने पीएम नरेंद्र मोदी द्वारा 14 अगस्त को विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के रूप में मनाने के निर्णय को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि यह निर्णय पीड़ित परिवारों के संघर्ष और बलिदान को याद करने के साथ-साथ नई पीढ़ी को देश की एकता और अखंडता का पाठ पढ़ाने का एक प्रयास है।

सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ने की दिशा में प्रयास

धामी ने यह भी कहा कि आज देश अपनी सांस्कृतिक जड़ों और गौरवपूर्ण विरासत से पुनः जुड़ रहा है। उन्होंने अयोध्या में श्रीराम मंदिर, केदारनाथ-बद्रीनाथ धाम के पुनर्निर्माण, महाकाल लोक और करतारपुर कॉरिडोर के कार्यान्वयन का उल्लेख करते हुए कहा कि ये सभी कदम भारतीय संस्कृति को पुनर्स्थापित करने के दिशा में उठाए जा रहे हैं।

उन्होंने कहा, "अनुच्छेद 370, तीन तलाक, और नागरिकता संशोधन कानून जैसे सुधारों के माध्यम से प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत ने अपनी पहचान को मजबूत किया है।"

उत्तराखंड के विकास की प्रतिबद्धता

मुख्यमंत्री धामी ने राज्य सरकार द्वारा उत्तराखंड के विकास, समृद्धि और स्वाभिमान के लिए जारी प्रयासों के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि सरकार स्वास्थ्य सुविधाओं, स्वच्छ पेयजल और संरचनात्मक विकास पर ध्यान दे रही है, जिससे दूर-दराज के क्षेत्रों में भी समृद्धि लाई जा सके।

कुंभ मेले की ऐतिहासिक तैयारियां

मुख्यमंत्री धामी ने आगामी कुंभ मेले को ऐतिहासिक बनाने के लिए निरंतर चल रही तैयारियों की जानकारी दी। उन्होंने आश्वासन दिया कि राज्य सरकार अब अपनी संस्कृति और पहचान को बनाए रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

ब्लड कैम्प और सम्मानित बुजुर्ग

इस अवसर पर, मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम स्थल पर आयोजित ब्लड कैम्प का अवलोकन किया और रक्तदाताओं को प्रशस्ति पत्र प्रदान किए। इसके साथ ही, विभाजन विभीषिका प्रदर्शनी का अवलोकन के साथ-साथ उत्तरांचल पंजाबी महासभा के बुजुर्गों को शॉल भेंट कर सम्मानित किया गया।

सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत की धारणा

कार्यक्रम में हरिद्वार सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत ने विभाजन के ऐतिहासिक घटनाक्रम का उल्लेख किया, जिसमें उन्होंने बताया कि 14 अगस्त 1947 को रात में भारत का विभाजन हुआ। उनके अनुसार, इससे पहले देश का बंटवारा बिना किसी स्पष्टता के हुआ था।

मदान कौशिक और प्रदीप बत्रा की बातें

कार्यक्रम में उपस्थित कैबिनेट मंत्री मदान कौशिक और प्रदीप बत्रा ने भी विभाजन की परिस्थिति पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि सीमाओं का निर्धारण एक ऐसे व्यक्ति को सौंपा गया जिसकी भारतीय सामाजिक और सांस्कृतिक स्थितियों की जानकारी अधूरी थी, जिससे विभाजन की गंभीरता और बढ़ गई।

इस प्रकार, विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर किए गए मुख्यमंत्री के प्रयासों ने हमें यह याद दिलाया कि देश की एकता, अखंडता और सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित करना अत्यंत आवश्यक है।

इसके अलावा, इस दिन को सही मायने में मनाने का उद्देश्य उन शहीदों की स्मृति को जीवित रखना है जिन्होंने अपने बलिदान से भारतीय संस्कृति को जिंदा रखा।

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