बिना संगठन मंत्री और प्रदेश प्रभारी के हो रही 2027 की तैयारी!, संगठन पर पड़ेगा असर

2027 के विधानसभा चुनावों का बिगुल बजने में बहुत देर नहीं है। राजनीतिक सरगर्मियों के बीच सबसे बड़ी हलचल सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (BJP) के खेमे में देखने को मिल रही है। आगामी 9 और 10 सितंबर को पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन हल्द्वानी दौरे पर आ रहे हैं। बिना संगठन मंत्री और प्रदेश … The post बिना संगठन मंत्री और प्रदेश प्रभारी के हो रही 2027 की तैयारी!, संगठन पर पड़ेगा असर appeared first on Khabar Uttarakhand - Uttarakhand News.

Sep 8, 2026 - 18:34
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बिना संगठन मंत्री और प्रदेश प्रभारी के हो रही 2027 की तैयारी!, संगठन पर पड़ेगा असर

2027 के विधानसभा चुनावों का बिगुल बजने में बहुत देर नहीं है। राजनीतिक सरगर्मियों के बीच सबसे बड़ी हलचल सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (BJP) के खेमे में देखने को मिल रही है। आगामी 9 और 10 सितंबर को पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन हल्द्वानी दौरे पर आ रहे हैं।

बिना संगठन मंत्री और प्रदेश प्रभारी के हो रही 2027 की तैयारी

इस दो दिवसीय दौरे के दौरान प्रदेश कार्यसमिति, कोर ग्रुप और वरिष्ठ नेताओं की बैक-टू-बैक मैराथन बैठकें प्रस्तावित हैं। लेकिन, इस हाई-प्रोफाइल दौरे और भारी-भरकम बैठकों के बीच प्रदेश बीजेपी के सामने एक अजीब और बड़ी प्रशासनिक चुनौती खड़ी है। वो है संगठन के दो सबसे पावरफुल और केंद्रीय कड़ी वाले पद फिलहाल खाली चल रहे हैं। बिना ‘प्रदेश प्रभारी’ और ‘प्रदेश संगठन महामंत्री’ के, बीजेपी अपनी चुनावी बिसात बिछा रही है।

खाली पड़ी हैं पावर सेंटर की दो सबसे अहम कुर्सियां

उत्तराखंड भाजपा में यह पहला मौका है जब इतने महत्वपूर्ण चुनावी मोड़ पर संगठन के दो आधार स्तंभ पद खाली पड़े हैं।  जून 2026 की शुरुआत में तत्कालीन प्रदेश संगठन महामंत्री अजेय कुमार का तबादला कर उन्हें राजस्थान का संगठन महामंत्री बना दिया गया था। अजय कुमार सितंबर 2019 से इस जिम्मेदारी को संभाल रहे थे। उनकी विदाई के बाद से, यानी पिछले करीब तीन महीनों से, यह अति-संवेदनशील पद पूरी तरह खाली पड़ा है।

पहले दुष्यंत कुमार गौतम प्रदेश प्रभारी की कमान संभाल रहे थे। उन्हें 2020 व 2022 के बाद 2024 में दोबारा जिम्मेदारी मिली थी। हालांकि, अंकिता भंडारी हत्याकांड से जुड़े विवादों में नाम उछलने के बाद उन्हें राष्ट्रीय कार्यकारिणी से बाहर होना पड़ा और पद छोड़ना पड़ा। अगस्त 2026 में बीजेपी की नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी की घोषणा के बाद से प्रदेश प्रभारी का पद भी आधिकारिक तौर पर खाली है। हालांकि सह प्रभारी रेखा वर्मा जैसे नामों पर सुगबुगाहट तेज है, पर आधिकारिक मुहर का इंतजार बरकरार है।

संगठन पर पड़ेगा असर

भाजपा की प्रदेश इकाई में प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट और महामंत्री कुंदन परिहार जैसे पदाधिकारी संगठन को संभालने में जुटे हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी खुद ताबड़तोड़ बैठकें कर रहे हैं, जिला प्रभारियों की नियुक्तियां हो चुकी हैं और विभिन्न विभागों के संयोजकों को जिम्मेदारियां बांटी जा चुकी हैं। इसके बावजूद, राजनीतिक विश्लेषक प्रदेश प्रभारी व प्रदेश महामंत्री संगठन जैसे दो अहम पदों के खाली रह जाने को अलग-अलग नजरियों से देख रहे हैं।

कुछ जानकारों का मानना है कि बीजेपी का कैडर और ढांचा इतना मजबूत है कि शीर्ष पद खाली होने पर भी चुनावी मशीनरी सुचारू रूप से चलती रहती है। सीएम धामी और प्रदेश अध्यक्ष की सक्रियता जमीनी काम को रुकने नहीं दे रही है। वहीं कुछ विश्लेषकों का मानना है कि चुनाव सिर पर हैं और प्रभारी और संगठन महामंत्री के न होने से भाजपा की चुनावी मशीनरी गड़बड़ा सकती है।

क्या हैं प्रदेश प्रभारी व संगठन महामंत्री की अहमियत?

भाजपा में प्रदेश प्रभारी राज्य इकाई और दिल्ली (केंद्रीय नेतृत्व) के बीच सबसे मजबूत पुल का काम करता है। चुनावी रणनीति लागू करने और सबसे बढ़कर-टिकट बंटवारे के समय नेताओं-कार्यकर्ताओं के बीच असंतोष व अंतर्कलह को सुलझाने में प्रभारी की भूमिका निर्णायक होती है।

वहीं, प्रदेश संगठन महामंत्री, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और पार्टी के बीच तालमेल बैठाने के साथ-साथ बूथ स्तर तक दैनिक अभियानों को संचालित करता है। ऐसे में इन दोनों पदों के खाली रहने से में एंटी-इनकम्बेंसी से निपटने, कमजोर बूथों को मजबूत करने और टिकटार्थियों के दबाव को नियंत्रित करने में देरी या समन्वय की कमी देखने को मिल सकती है।

नितिन नबीन के दौरे से उम्मीदें

माना जा रहा है कि अपने दो दिन हल्द्वानी दौर में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन चुनावी तैयारियों का जायजा लेने के साथ ही इन दो खाली पड़े केंद्रीय पदों पर जल्द से जल्द नई नियुक्तियों पर फैसला ले सकते हैं। अब देखना यह होगा कि क्या 2027 के इस महासंग्राम के लिए बीजेपी को समय रहते नए ‘रणनीतिकार’ मिलते हैं या पार्टी अपने मौजूदा सांगठनिक ढांचे के दम पर ही चुनावी वैतरणी पार करने का दांव खेलेगी।

ये भी पढ़ें: 9 सितम्बर को उत्तराखंड दौरे पर आएंगे BJP अध्यक्ष, नेताओं की बढ़ी टेंशन, सामने आ सकती है सीक्रेट लिस्ट!

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