रुद्रप्रयाग में 8 सालों की सेवा के बाद 10 प्राथमिक सहायक अध्यापकों की नौकरी समाप्त
रुद्रप्रयाग.. जनपद रुद्रप्रयाग में वर्ष 2018 में उत्तराखंड सरकार द्वारा विशिष्ट बीटीसी के द्वारा बीएड कर चुके अभ्यर्थी को प्रामरी सत्र पर वर्षवार के आधार पर आर्ट व साइंस की विज्ञप्ति जारी कर प्राप्ताँक के आधार पर चयन किया गया था जिन दस सहायक अध्यापको की सेवा समाप्ति हुई है वे सभी भी इस विज्ञप्ति […] The post रुद्रप्रयाग में 8वर्षो की सेवा करने के बाद 10 प्रामरी सहायक अध्यापको की सेवा समाप्त appeared first on Uttarakhand 24X7.
रुद्रप्रयाग में 8 सालों की सेवा के बाद 10 प्राथमिक सहायक अध्यापकों की नौकरी समाप्त
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कम शब्दों में कहें तो, जनपद रुद्रप्रयाग में वर्ष 2018 में बीएड कर चुके दस प्राथमिक सहायक अध्यापकों की सेवा अचानक समाप्त कर दी गई है। यह निर्णय उनके शैक्षिक दस्तावेजों की जांच के बाद लिया गया था।
वर्ष 2018 में उत्तराखंड सरकार द्वारा विशेष बीटीसी के माध्यम से बीएड (बैचलर ऑफ एजुकेशन) डिग्री धारकों के लिए प्राथमिक सत्र में चयन की प्रक्रिया आरंभ की गई थी। इस प्रक्रिया में आर्ट और साइंस के उम्मीदवारों का चयन वर्षवार के आधार पर प्राप्तांक के अनुसार किया गया। हालांकि, जिन दस सहायक अध्यापकों की सेवा समाप्त की गई है, उन्होंने भी इस विज्ञप्ति में भाग लिया था, लेकिन उनके शैक्षिक दस्तावेजों की पुनः जाँच के बाद चयन समिति ने उनका चयन रोक दिया था।
स्नातक में 50% से कम अंक होने का मुद्दा
यह निर्णय इसलिए लिया गया क्योंकि इन सभी अध्यापकों के स्नातक स्तर के अंक 50 प्रतिशत से कम थे। बेसिक शिक्षा की भूमिका में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि वही व्यक्ति बीएड कर सकता है जिसने स्नातक में 50 प्रतिशत अंकों के साथ उत्तीर्ण किया हो। इसलिए, चयन प्रक्रिया में अनियमितता के आरोप लगा।
जिसके बाद, इन सभी अध्यापकों ने न्यायालय की शरण ली और अंततः वे कोर्ट के आदेश पर नियुक्ति पाने में सफल हुए। इसके बाद, चयन समिति ने न्यायालय के अंतरिम आदेश के आधार पर इनकी नियुक्ति की थी और उन्हें स्कूल आवंटित कर दिए गए थे। इन सभी की नियुक्ति आदेश में यह भी उल्लेखित था कि वे तब तक राजकीय सेवा में बने रह सकते हैं जब तक अंतिम आदेश नहीं आता।
न्यायालय का अंतिम आदेश और सेवा समाप्ति का आदेश
फिर, आठ सालों बाद न्यायालय का अंतिम आदेश आया, जिसके बाद जिला शिक्षा अधिकारी (प्रारम्भिक शिक्षा) द्वारा इन सहायक अध्यापकों की सेवा समाप्ति का आदेश जारी किया गया। यह आदेश शिक्षण समुदाय और छात्रों के लिए एक महत्वपूर्ण निर्णय है, क्योंकि सेवामुक्त होने वाले अध्यापकों में 5 जखोली ब्लॉक, 1 अगस्त्यमुनी ब्लॉक, और 4 ऊखीमठ ब्लॉक के अध्यापक शामिल हैं।
क्या यह निर्णय सही है?
हालांकि, इस प्रकार के निर्णय हमेशा संबंधित पक्षों के लिए विवादास्पद होते हैं। कुछ शिक्षकों का यह मानना है कि ऐसे अध्यापकों को जो वर्षों से सेवा कर रहे थे, उनके शैक्षणिक मुद्दों को ध्यान में रखते हुए और सुधार के अवसर प्रदान करने की आवश्यकता थी। वहीं, शिक्षा की गुणवत्ता को बनाए रखने के दृष्टिकोण से यह आवश्यक भी है कि योग्यतम व्यक्तियों का चयन किया जाए।
इस मामले ने शिक्षा जगत में एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या चयन की प्रक्रिया को और पारदर्शी बनाने की जरूरत है। भविष्य में शिक्षण क्षेत्र के अंदर ऐसी समस्याओं से बचने के लिए सही नीतियों का पालन अत्यंत आवश्यक है।
अंततः, रुद्रप्रयाग के दस प्राथमिक सहायक अध्यापकों की सेवा समाप्ति ने शिक्षा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण फिर से सोचने का विषय उत्पन्न किया है, जिसकी गूंज लंबे समय तक सुनाई देगी।
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सादर,
टीम ख़र्चा पानी
सोम्या रानी
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