गढ़वाल आयुक्त की कड़ी पहल: लैंड फ्रॉड मामलों पर 45 का निस्तारण और उचित कार्रवाई के आदेश

देहरादून : गढ़वाल आयुक्त विनय शंकर पांडेय की अध्यक्षता में शनिवार को सर्वे चौक स्थित कैंप कार्यालय में लैंड फ्रॉड समन्वय समिति की उच्चस्तरीय बैठक हुई। बैठक में पूर्व में दिए गए निर्देशों के अनुपालन में प्राप्त आख्या की समीक्षा की गई। इस दौरान समिति द्वारा लैंड फ्रॉड से संबंधित 20 लंबित एवं 105 नए […]

May 3, 2026 - 00:34
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गढ़वाल आयुक्त की कड़ी पहल: लैंड फ्रॉड मामलों पर 45 का निस्तारण और उचित कार्रवाई के आदेश
देहरादून : गढ़वाल आयुक्त विनय शंकर पांडेय की अध्यक्षता में शनिवार को सर्वे चौक स्थित कैंप कार्याल�

गढ़वाल आयुक्त की कड़ी पहल: लैंड फ्रॉड मामलों पर 45 का निस्तारण और उचित कार्रवाई के आदेश

कम शब्दों में कहें तो, गढ़वाल आयुक्त विनय शंकर पांडेय ने शनिवार को लैंड फ्रॉड समन्वय समिति की बैठक में कुल 125 मामलों पर विचार करते हुए 45 का निस्तारण किया, और 24 में FIR दर्ज कराने के निर्देश दिए। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य प्रदेश में भूमि धोखाधड़ी के मामलों को सख्ती से खत्म करना है।

देहरादून: गढ़वाल आयुक्त विनय शंकर पांडेय की अध्यक्षता में सर्वे चौक स्थित कैंप कार्यालय में लैंड फ्रॉड समन्वय समिति की उच्चस्तरीय बैठक का आयोजन किया गया। इस बैठक में पूर्व में दिए गए निर्देशों के अनुपालन की समीक्षा की गई। समिति ने लैंड फ्रॉड से संबंधित 20 लंबित एवं 105 नए मामलों सहित कुल 125 मामलों की सुनवाई की। इस दौरान 45 प्रकरणों का निस्तारण किया गया और 24 मामलों में प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज कराने के आदेश दिए गए।

इस बैठक का महत्व

गढ़वाल आयुक्त ने बैठक के दौरान स्पष्ट रूप से कहा कि प्रदेश सरकार और मुख्यमंत्री की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत भूमि धोखाधड़ी के मामलों को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि ऐसे मामलों का त्वरित और प्रभावी निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। जहां संयुक्त निरीक्षण की आवश्यकता है, वहां संबंधित विभागों को जल्दी रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए कहा गया है।

हालात की गंभीरता

आयुक्त ने बताया कि लैंड फ्रॉड समीति की बैठक एक महत्वपूर्ण बैठक है। हर 15 दिन के अंतराल में लैंड फ्रॉड मामलों की समीक्षा की जा रही है। हाल में हुई बैठक में 125 मामलों पर विचार किया गया, जिनमें 20 लंबित एवं 105 नए मामले शामिल थे। 24 मामले तो अत्यंत गंभीर पाए गए हैं, जिनमें तुरंत FIR दर्ज करने का आदेश दिया गया है। इनमें कई मामलों में भूमि पर अनधिकृत कब्जा और फर्जीवाड़ा शामिल है।

कदम उठाने की आवश्यकता

आयुक्त ने यह भी कहा कि कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं, जैसे बिना जमीन के बिक्री, खसरा नंबर में हेरफेर और जमीन की मात्रा में गलत जानकारी देना। ऐसे मामलों को देखते हुए पुलिस को कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा, भूमि धोखाधड़ी, अवैध कब्जा और अन्य गंभीर मामलों पर भी FIR दर्ज कराने के आदेश जारी किए गए हैं।

ईमानदारी से निपटने की आवश्यकता

आयुक्त ने आगे कहा कि लैंड फ्रॉड मामलों में 45 अन्य प्रकरणों का भी निस्तारण किया गया है। इन मामलों में कुछ में दोनों पक्षों के बीच आपसी समझौता हो गया है, जबकि कुछ मामलों में लेन-देन की समस्या प्रशासनिक हस्तक्षेप द्वारा सुलझा ली गई। वहीं, कुछ प्रकरणों को सिविल न्यायालय में लंबित पाया गया। आयुक्त ने यह स्पष्ट किया कि इन मामलों को न्यायालय के माध्यम से ही सुलझाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

भविष्य की योजना

आयुक्त ने लंबित भू-क्षेत्र से जुड़े मामलों में कार्रवाई में हो रही देरी पर नाराजगी व्यक्त की। अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि ऐसे मामलों में 15 दिनों के भीतर ठोस प्रगति लाना सुनिश्चित करें। ऐसे मामलों में जहां अवैध निर्माण सिद्ध हो चुका है, तुरंत कार्रवाई की जाएगी। सभी भूमि धोखाधड़ी मामलों में प्राथमिकी दर्ज करने और कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।

आयुक्त ने अंत में कहा कि न्यायालय में लंबित मामलों को छोड़कर, सभी प्रकरणों में विभागीय स्तर पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी और किसी भी भूमि संबंधी मामले को अनावश्यक रूप से लंबित नहीं रखा जाएगा।

इसी प्रकार, गढ़वाल आयुक्त का यह कदम यह दिखाता है कि प्रदेश सरकार भूमि धोखाधड़ी के मामलों को गंभीरता से ले रही है और दोषियों के खिलाफ ठोस कदम उठाने के लिए तैयार है। इस प्रक्रिया में सामुदायिक जागरूकता और जन सहयोग भी अतिसंवेदनशील होगा।

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सादर, टीम ख़र्चा पानी (साक्षी शर्मा)

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