तृणमूल कांग्रेस संकट: 19 बागी सांसदों की सूची आई सामने, जानिए प्रमुख नाम

नई दिल्ली। TMC Crisis : तृणमूल कांग्रेस के भीतर जारी राजनीतिक भूचाल के बीच 20 में से 19 बागी सांसदों ने पार्टी से अलग होने का मन बना लिया है और 18 मई को अपने नामों की सूची आधिकारिक तौर पर लोकसभा अध्यक्ष के कार्यालय को भेज दी है। यह बगावत पश्चिम बंगाल की राजनीति […] The post TMC Crisis : सामने आई TMC के 19 बागी सांसदों की लिस्ट, जानिए कौन-कौन हैं? appeared first on Page Three.

Jun 12, 2026 - 09:34
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तृणमूल कांग्रेस संकट: 19 बागी सांसदों की सूची आई सामने, जानिए प्रमुख नाम
नई दिल्ली। TMC Crisis : तृणमूल कांग्रेस के भीतर जारी राजनीतिक भूचाल के बीच 20 में से 19 बागी सांसदों ने पार्�

तृणमूल कांग्रेस संकट: 19 बागी सांसदों का फैसला और प्रदेश की राजनीति में उठा तूफान

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कम शब्दों में कहें तो, तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर गहराते संकट ने एक नया मोड़ लिया है। पार्टी के 20 सांसदों में से 19 ने बागी होने का निर्णय लिया है और अपनी नाम सूची 18 मई को लोकसभा अध्यक्ष के कार्यालय को प्रस्तुत की है। इस विद्रोह ने पश्चिम बंगाल की राजनीतिक स्थिति को एक नया मोड़ दिया है।

बागी सांसदों की सूची: कौन हैं वे?

तृणमूल कांग्रेस, जिसकी अध्यक्षता ममता बनर्जी करती हैं, में यह बगावत उन राजनीतिक भूचालों का परिणाम है जो पिछले कुछ समय से पार्टी के भीतर चल रहे हैं। जो सांसदों ने बगावत का कदम उठाया है, उनका नाम निम्नलिखित है:

  • सौगत रॉय
  • नदिया से सांसद, जितेंद्र तिवारी
  • कनक मित्रा
  • धनंजय सिंह
  • सिद्धिकुल्ला चौधरी
  • रविंद्रनाथ भट्टाचार्य
  • मोहम्मद सलीम
  • कृष्णा बैनर्जी
  • प्रबीर घोष
  • जहिरुल इस्लाम
  • वत्सल तिवारी
  • जितेंद्र सिंह
  • संतोष कुमार
  • दीपू मंडल
  • सलमान कुरेशी
  • बी.जी.एस. राजा
  • खालिद सुल्तान
  • चिरंजीत चक्रवर्ती
  • मोहित घोष
  • राहुल मंडल

राजनीतिक विश्लेषण

इस बगावत के पीछे कई कारण हो सकते हैं, जिनमें पार्टी के भीतर आंतरिक झगड़े, नेतृत्व की नीतियाँ और कुछ सांसदों की अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षाएं शामिल हैं। यह भी माना जा रहा है कि पश्चिम बंगाल में आगामी चुनावों को लेकर इन बागियों की योजना है, जिससे पार्टी में एक नई राजनीतिक ढांचा स्थापित हो सके।

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह विद्रोह ममता बनर्जी की ताकत को चुनौती दे सकता है, लेकिन दूसरी ओर, पार्टी का पारंपरिक आधार इसे संभालने के लिए तैयार है। ऐसे में देखना होगा कि क्या ये बागी सांसद स्वराज के लिए कोई नई दिशा बनाते हैं या पार्टी की पुरानी संरचना में वापस लौटते हैं।

भविष्य के उपाय

तृणमूल कांग्रेस के लिए यह समय अपने भीतर झांकने का है। पार्टी को अपने कार्यशैली में सुधार लाने की आवश्यकता है ताकि सांसद और कार्यकर्ता संतुष्ट रहें। यदि पार्टी इस विद्रोह से सीख लेती है और उचित कदम उठाती है, तो इसे अपनी स्थिति को मजबूती देने का एक अवसर मिल सकता है।

इस माहौल में चुनावी रणनीतियों का निर्धारण भी महत्वपूर्ण होगा। यदि सांसदों की यह समूह बगावत को सफल बनाता है, तो पश्चिम बंगाल में राजनीतिक परिदृश्य को काफी बदल सकता है।

अंत में, यह स्पष्ट है कि तृणमूल कांग्रेस के लिए यह एक बड़ा संकट है, लेकिन यह उस परिस्थिति का सामना करने का समय भी है जब पार्टी को अपनी विचारधाराओं और नीतियों पर फिर से सोचने की आवश्यकता साबित हुई है।

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समान्यत: इस प्रकार की राजनीतिक बगावतें पार्टी की एकता को कमजोर कर सकती हैं, लेकिन साथ ही यह भी दिखा सकती हैं कि किस प्रकार नई विचारधाराएं और नेतृत्व की परिवर्तन की आवश्यकता है।

टीम खर्चा पानी माया शर्मा

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