उत्तराखंड पुलिस के निलंबित कांस्टेबल का जंतर-मंतर पर इस्तीफा प्रदर्शन, मचा हड़कंप
Uttarakhand News : दिल्ली में चल रहे CJP के आंदोलन के दौरान उत्तराखंड पुलिस के लंबे समय से निलंबित चल रहे सिपाही शेर सिंह द्वारा मंच से तथाकथित “इस्तीफा” देने का प्रदर्शन चर्चा का विषय बना हुआ है। इस घटनाक्रम के बाद ये प्रश्न उठ रहे हैं कि जो व्यक्ति पिछले एक वर्ष से अधिक […]
उत्तराखंड पुलिस के निलंबित कांस्टेबल का जंतर-मंतर पर इस्तीफा प्रदर्शन, मचा हड़कंप
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कम शब्दों में कहें तो उत्तराखंड पुलिस के निलंबित कांस्टेबल शेर सिंह का हालिया प्रदर्शन दिल्ली के जंतर-मंतर पर चर्चा का विषय बना हुआ है। आंदोलन के दौरान किए गए उनके "इस्तीफे" से कई सवाल उठ रहे हैं कि जिनका सक्रिय पुलिस सेवा में कोई हस्तक्षेप नहीं है, वे इस प्रकार का बयान क्यों दे रहे हैं।
दिल्ली में चल रहे CJP के आंदोलन के दौरान उत्तराखंड पुलिस के लंबे समय से निलंबित हुए कांस्टेबल शेर सिंह ने मंच पर "इस्तीफा" देने का दावा किया, जिसके बाद यह विषय चर्चा का केंद्र बन गया है। सवाल उठ रहे हैं कि आखिर एक वर्ष से अधिक समय से निलंबित रहने वाले कांस्टेबल ने किस पद से इस्तीफा दिया और इसका क्या औचित्य है।
शेर सिंह का आपराधिक इतिहास
जानकारी के अनुसार, शेर सिंह वर्ष 2025 से एक गंभीर आपराधिक मामले में नामजद होने के चित्र में उत्तराखंड पुलिस से निलंबित चल रहा है। उसके विरुद्ध गंगनहर थाने में भारतीय दंड संहिता की धाराओं के अंतर्गत मामला दर्ज किया गया है। यह मामला 420, 467, 468, 471, 120-बी सहित अन्य धाराओं में दर्ज किया गया है।
आपराधियों के साथ संबंध
जांच में यह तथ्य सामने आया है कि शेर सिंह का संबंध हरिद्वार-रुड़की क्षेत्र के कुख्यात गैंगस्टर प्रवीण वाल्मीकि के साथ पाया गया है। प्रवीण वाल्मीकि पर हत्या, अपहरण, अवैध वसूली और भूमि पर अवैध कब्जे जैसे गंभीर आरोप लगे हैं। यही नहीं, जांच में यह भी सामने आया है कि शेर सिंह ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए गैंग के अन्य सदस्यों के साथ मिलकर स्थानीय लोगों को डराया और उनकी संपत्तियों पर अवैध कब्जा जमा कर आर्थिक लाभ अर्जित किया।
पीड़ितों का दर्द
इस मामले में एक विधवा महिला और उसके परिवार को गैंग द्वारा लगातार धमकियां दी गई। महिला के भाई और देवर पर भी गैंग द्वारा गोलीबारी की गई। इसके बाद भयवश, महिला अपने बच्चों के साथ वहाँ से भाग गई, जबकि गैंग ने उसकी भूमि पर अवैध तरीके से कब्जा कर उसे फर्जी तरीके से बेच दिया।
निलंबन और गिरफ्तारी
शेर सिंह को 15 सितंबर 2025 को गिरफ्तारी के बाद निलंबित किया गया। उसके खिलाफ पर्याप्त सबूत मिलने पर उसे न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेजा गया। इसके बाद, उसे 7 नवंबर 2025 को उच्च न्यायालय से जमानत मिली, लेकिन उसका निलंबन तब से जारी है।
इस घटनाक्रम के बाद उत्तराखंड पुलिस की कार्यप्रणाली और निलंबित अधिकारियों की जवाबदेही पर सवाल उठ रहे हैं। अब देखना यह है कि पुलिस विभाग इस पूरे मामले पर क्या कार्यवाही करता है।
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टीम खर्चा पानी
स्वाती रस्तोगी
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