उत्तराखंड के पहाड़ों में स्वास्थ्य सेवाओं का संकट: डॉक्टरों की कमी पर NHM की रिपोर्ट ने खोली पोल
अगर पहाड़ बोल सकते तो शायद NHM की ये रिपोर्ट देखकर रो पड़ते क्योंकि उत्तराखंड के पहाड़ों में 300 से ज्यादा तबादलों के बावजूद डॉक्टरों की कमी जस का तस ही है। दुर्गम इलाकों में हलात और भी खराब हैं। अब आखिर डॉक्टरों को पहाड़ क्यों रास नहीं आते? आखिर क्या है पहाड़ों में स्वास्थ्य … The post पहाड़ों में भगवान भरोसे अस्पताल, डॉक्टरों की भारी कमी, इस रिपोर्ट ने उड़ाए होश! appeared first on Khabar Uttarakhand - Uttarakhand News.
उत्तराखंड के पहाड़ों में स्वास्थ्य सेवाओं का संकट: डॉक्टरों की कमी पर NHM की रिपोर्ट ने खोली पोल
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कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखंड के पहाड़ों में डॉक्टरों की भारी कमी एवं स्वास्थ्य सेवाओं के संकट को राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) की नई रिपोर्ट ने उजागर किया है। 300 से अधिक तबादलों के बावजूद स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ है। आइये जानते हैं इस संकट के पीछे की सच्चाई।
अगर पहाड़ बोल सकते, तो शायद NHM की यह रिपोर्ट देखकर रो पड़ते। उत्तराखंड के पहाड़ों में 300 से ज्यादा तबादलों के बावजूद डॉक्टरों की कमी जस का तस बनी हुई है, जिससे स्वास्थ्य सेवाएं भी प्रभावित हो रही हैं। दुर्गम इलाकों की स्थिति और भी चिंताजनक है। तो आखिर क्या कारण हैं जो डॉक्टर पहाड़ों में काम करने से कतराते हैं? इससे जुड़ी चुनौतियों का सामना कर रहे पहाड़ों की स्वास्थ्य सेवाओं की सच्चाई इस रिपोर्ट में उजागर हुई है।
स्वास्थ्य मंत्रीयों ने स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर किए बड़े दावे
उत्तराखंड में स्वास्थ्य सुविधाओं की वास्तविकता सभी के सामने है। डॉक्टरों की कमी और स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की लचरता कहीं न कहीं हमारे पहाड़ों की नियति बन गई है। हालाँकि स्वास्थ्य मंत्री ने हमेशा बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के दावे किए हैं। लेकिन यह दावे वास्तविकता से कितने दूर हैं, यह स्पष्ट है। पूर्व स्वास्थ्य मंत्री ने यहाँ तक कह दिया था कि पहाड़ों में डॉक्टरों की संख्या इतनी अधिक है कि डॉक्टर अब मरीजों को खोजने निकल रहे हैं। इस पर उन्हें काफी आलोचना भी झेलनी पड़ी थी।
NHM की कॉमन रिव्यू मिशन रिपोर्ट ने उजागर की सच्चाई
हालांकि पहाड़ों की स्वास्थ्य सुविधाएं स्वास्थ्य मंत्री के बदलने के बावजूद भी नहीं सुधरी हैं। हाल ही में NHM की कॉमन रिव्यू मिशन रिपोर्ट में यह स्पष्ट हुआ है कि कई दावों के बावजूद पहाड़ अब भी डॉक्टरों के लिए तरस रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग ने हाल ही में 300 से अधिक तबादले कर पहाड़ों से डॉक्टरों की कमी दूर करने का प्रयास किया, लेकिन इस प्रयास का कोई ठोस परिणाम नहीं आ पाया है।
डॉक्टर पहाड़ों के दुर्गम इलाकों में काम करने से कतराते
रिपोर्ट बताती है कि डॉक्टर और विशेषज्ञ चिकित्सक पहाड़ों के दुर्गम इलाकों में काम करने को लेकर अनिच्छुक हैं। इसके चलते पहाड़ों के अस्पतालों की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि कई अस्पतालों में आवश्यक स्टाफ नहीं होने के कारण मौजूदा बुनियादी ढांचे का समुचित उपयोग नहीं हो पा रहा है। अर्थात, अस्पताल है लेकिन उन्हें चलाने के लिए पर्याप्त लोग नहीं हैं।
डॉक्टरों की कमी का असर झेल रहे लोग
विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी का सीधा असर जिला अस्पताल की इमरजेंसी, सर्जरी एवं अन्य विशेषज्ञ सेवाओं पर पड़ रहा है। राज्य में अनेक मेडिकल अधिकारी अपनी पढ़ाई के कारण लंबे समय तक अपने मूल पदों से अनुपस्थित रहते हैं, जिससे अस्पतालों में डॉक्टरों की उपलब्धता में और कमी आ जाती है। यह स्थिति रिक्त पदों की समस्या को और भी विकराल बना रही है।
HRMIS नहीं हो पाई लागू
रिपोर्ट में मानव संसाधन प्रबंधन की खामियों पर भी प्रकाश डाला गया है। वर्तमान में राज्य में HRMIS (मानव संसाधन प्रबंधन सूचना प्रणाली) लागू नहीं हो पाई है। इसके कारण यह पता लगाना कि कौन डॉक्टर कहां तैनात है और कौन कब से छुट्टी पर है, संभव नहीं हो रहा। सरकार अब इस प्रणाली को किसी तीसरी एजेंसी के जरिए स्थापित करने की योजना बना रही है।
सरकार ने ‘यू कोट-वी पे’ मॉडल अपनाया
सीआरएम रिपोर्ट के अनुसार, सरकार ने ‘यू कोट-वी पे’ मॉडल को अपनाया है। इस मॉडल के तहत दुर्गम इलाकों में काम करने वाले विशेषज्ञ डॉक्टरों को आकर्षक वेतन और लचीले कार्य घंटे दिए जा रहे हैं। इसके अलावा वॉक-इन इंटरव्यू के जरिए भर्तियां भी की जा रही हैं। भविष्य में बायोमेट्रिक सुविधाओं के साथ-साथ जियो-फेंसिंग आधारित निगरानी लागू करने की योजना भी बन रही है।
इस तरह की समस्याओं और समाधान के प्रति सरकार की पहल, पहाड़ों में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के लिए आवश्यक है। लेकिन क्या यह पर्याप्त होगा? उत्तराखंड के पहाड़ों में स्वास्थ्य सेवाओं का सुधार तभी संभव है जब जानकार और इच्छाशक्ति वाले डॉक्टर पहाड़ों में आकर काम करने के लिए प्रेरित हों।
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सादर,
टीम खर्चा पानी - स्नेहा शर्मा
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