UKSSSC परीक्षा किट टेंडर विवाद: भ्रष्टाचार के आरोपों से गहराता सवालिया घेरा
UKSSSC TENDER विवाद: पारदर्शिता पर सवाल, जांच की मांग तेज UKSSSC TENDER: उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UKSSSC) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए परीक्षा किट की आपूर्ति से जुड़ी टेंडर प्रक्रिया में अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोप लगाए गए हैं, जिससे पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर संदेह […]
UKSSSC परीक्षा किट टेंडर विवाद: भ्रष्टाचार के आरोपों से गहराता सवालिया घेरा
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कम शब्दों में कहें तो, UKSSSC टेंडर प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताओं एवं भ्रष्टाचार के आरोपों ने आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस संबंध में जांच की मांग तेज हो गई है।
UKSSSC TENDER: उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UKSSSC) पर प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए परीक्षा किट की आपूर्ति से जुड़ी टेंडर प्रक्रिया में अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोप लगाए गए हैं। इस गतिविधि ने पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गहरा संदेह पैदा किया है, जिससे अब जांच की मांग भी तेज हो गई है।
मुख्य बिंदु
- UKSSSC TENDER विवाद: पारदर्शिता पर सवाल, जांच की मांग तेज
- UKSSSC पर टेंडर निरस्त करने पर उठे सवाल
- अधिकारियों पर भ्रष्टाचार के आरोप
- कीमत में भारी अंतर, निष्पक्ष जांच की मांग
- मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग
टेंडर निरस्त करने पर उठे सवाल
आधिकारिक जानकारी के अनुसार, यह टेंडर 15 सितंबर 2025 को UKTENDER पोर्टल के माध्यम से जारी किया गया था। स्कीमेटिक्स माइनिंग प्राइवेट लिमिटेड के मालिक आदित्य मंगल ने बताया कि प्रारंभिक चरण में उनकी कंपनी ही एकमात्र बिडर थी। इसके बाद आयोग ने टेंडर को शायद अनियमितताओं के चलते निरस्त कर दिया और इसे फिर से जारी किया। इस प्रक्रिया को चार बार रद्द और दोबारा खोले जाने की घटनाएं संदिग्ध स्थिति को जन्म देती हैं।
अधिकारियों पर भ्रष्टाचार के आरोप
आदित्य मंगल ने आरोप लगाया है कि बार-बार टेंडर निरस्त करने के बाद उनकी कंपनी को प्रक्रिया से अयोग्य घोषित किया गया और इसके बाद दिल्ली की एक कंपनी को अंततः कार्य आवंटित किया गया। उनका कहना है कि यह पूरी प्रक्रिया एक सुनियोजित योजना का हिस्सा है, जिससे बाहरी कंपनियों को फायदा पहुंचाया गया।
कीमत में भारी अंतर, निष्पक्ष जांच की मांग
उन्होंने यह भी कहा कि जिस परीक्षा किट की असली कीमत करीब 350 रुपये होनी चाहिए, उसे 5000 रुपये दिखाया जा रहा है, जो कि स्पष्ट रूप से लागत बढ़ाने का कारण हो सकता है। यदि यह सही है, तो यह एक गंभीर मुद्दा बनता है। जब उन्होंने अपनी शिकायत दर्ज कराने की कोशिश की, तो उनकी शिकायत पर कोई ध्यान नहीं दिया गया।
मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग
आदित्य मंगल ने सरकार से उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच की मांग की है। उन्होंने यह भी सुझाव दिया है कि जांच को सेंट्रल विजिलेंस कमीशन या किसी स्वतंत्र एजेंसी को सौंपा जाए, और दोषी अधिकारियों एवं कंपनियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। मामले की इस गंभीरता पर शासन और UKSSSC का क्या रुख रहता है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।
इस विवाद ने न केवल परीक्षार्थियों बल्कि समाज में एक व्यापक चर्चा का विषय बना दिया है। पारदर्शिता और निष्पक्षता की आवश्यकता पर बल देने की जरूरत है।
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टीम खर्चा पानी
दीप्ति शर्मा
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