सड़क की कमी ने बढ़ाई मुश्किलें! 4 किलोमीटर पैदल बीमार महिला को अस्पताल पहुंचाया गया

सरकार लगातार ग्रामीण इलाकों तक सड़क सुविधा पहुंचाने के दावें करती रहती है। उसके बावजूद आज भी कई ऐसी खबरे सामने आती है जो इन दावों पर सवाल खड़े करती है। आज भी कई गांव बुनियादी संपर्क मार्ग से वंचित है। इसी से जुड़ा एक मामला मोरी विकासखंड की ग्राम पंचायत पोखरी से सामने आ … The post कंधों पर सिस्टम!, 4 किलोमीटर पैदल बीमार महिला को पीठ पर लादकर पहुंचाया अस्पताल appeared first on Khabar Uttarakhand - Uttarakhand News.

Jul 6, 2026 - 00:34
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सड़क की कमी ने बढ़ाई मुश्किलें! 4 किलोमीटर पैदल बीमार महिला को अस्पताल पहुंचाया गया
सरकार लगातार ग्रामीण इलाकों तक सड़क सुविधा पहुंचाने के दावें करती रहती है। उसके बावजूद आज भी कई ऐ

सड़क की कमी ने बढ़ाई मुश्किलें! 4 किलोमीटर पैदल बीमार महिला को अस्पताल पहुंचाया गया

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कम शब्दों में कहें तो, मोरी विकासखंड की ग्राम पंचायत पोखरी में एक महिला को चार किलोमीटर तक पीठ पर लादकर अस्पताल पहुंचाया गया। यह मामला एक बार फिर से उन दावों की पोल खोलता है जो सरकार ग्रामीण इलाकों में सड़क सुविधाएं पहुंचाने के लिए करती है।

हालांकि सरकार की तरफ से अनेक बार ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क निर्माण की योजनाओं का ऐलान किया गया है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बहुत भिन्न है। हाल ही में पोखरी से जुड़ा एक मामला सरकार की उन दावों पर सवाल उठाता है जिन्होंने हालात को बेहतर बनाने का वादा किया था। यह घटना ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति को और भी अधोमुखी करती है।

4 किलोमीटर पैदल बीमार महिला को पीठ पर लादकर पहुंचाया अस्पताल

बीते शुक्रवार को पोखरी की 35 वर्षीय महिला, संगीत, अपने खेत में काम कर रही थीं, तभी पैर फिसलने से वह गंभीर चोटिल हो गईं। उनकी स्थिति इतनी गंभीर थी कि वह चलने में असमर्थ हो गईं। यहां पर सड़क संपर्क की अनुपस्थिति ने उनके परिवार और गांव वालों के लिए नई समस्याएं खड़ी कर दीं।

गांव तक नहीं जाती सड़क

जैसे ही संगीत घायल हुईं, उनके परिवार वालों ने गांव के अन्य लोगों की मदद मांगी। सभी ने मिलकर उन्हें चार किलोमीटर दूर मुख्य सड़क तक पहुंचाने का निर्णय लिया। चारपाई और कपड़ों का उपयोग करके, उन्होंने बारी-बारी से संगीत को पीठ पर उठाया और यात्रा प्रारंभ की।

यह घटना सिर्फ एक उदाहरण है। ग्रामीण बताते हैं कि जब भी कोई गांव में बीमार होता है, तो चिकित्सा सहायता पाने के लिए उन्हें इसी संघर्ष का सामना करना पड़ता है। प्रायः प्रसव के दौरान भी महिलाओं को इसी तरह पीठ पर उठाकर अस्पताल पहुंचाया जाता है।

नहीं है पहली घटना

मोरी क्षेत्र के पोखरी गांव में यह कोई पहली बार नहीं हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि सालों से वे सड़क निर्माण की मांग कर रहे हैं। लेकिन प्रशासनिक स्तर पर केवल आश्वासन ही मिला है। जनप्रतिनिधि इस समस्या को सुलझाने के लिए कुछ ठोस कदम नहीं उठाते, जिससे स्थिति और गंभीर होती जा रही है।

“पोखरी मोटर मार्ग का सर्वे कार्य पूरा हो चुका है। वर्तमान में वन विभाग से स्वीकृति की प्रक्रिया चल रही है। सभी औपचारिकताओं के बाद टेंडर जारी किया जाएगा और सड़क निर्माण कार्य प्रारंभ होगा।”
सुभाष दोरियाल, सहायक अभियंता, प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना

कई सालों से सड़क निर्माण की मांग

हालात और भी बदतर हो जाते हैं, विशेषकर बरसात के मौसम में। ग्रामीणों का कहना है कि जब भी इमरजेंसी की स्थिति उत्पन्न होती है, तो उन्हें मजबूरन इस कठिन यात्रा का सामना करना पड़ता है। प्रशासन ने सड़क निर्माण की जो योजनाएं बनाई हैं, वे अभी तक धरातल पर नहीं उतर पाई हैं। ऐसे में यह घटना दर्शाती है कि ग्रामीण विकास में अभी भी बहुत काम बाकी है।

इस प्रकार की घटनाएं हमें यह सवाल पूछने पर मजबूर करती हैं कि क्या सरकार ग्रामीण इलाकों में बुनियादी सुविधाएं प्रदान करने में वास्तव में गंभीर है या ये सिर्फ कागज़ पर ही रह गया है।

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सादर,
टीम खर्चा पानी
संगीत रावत

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