ट्रेड यूनियनों ने राष्ट्रपति को ज्ञापन भेजा, न्यूनतम वेतन 26 हजार और MSP की मांगें

उत्तराखंड संयुक्त ट्रेड यूनियन संघर्ष समिति और संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले मजदूरों और किसानों ने विभिन्न मांगों को लेकर प्रदर्शन किया। संगठनों ने राष्ट्रपति के नाम जिलाधिकारी देहरादून के माध्यम से ज्ञापन भेजकर केंद्र सरकार से अपनी मांगों पर तत्काल कार्रवाई की मांग की। 26 हजार न्यूनतम वेतन से लेकर MSP की मांग … The post 26 हजार न्यूनतम वेतन से लेकर MSP की मांग, ट्रेड यूनियनों ने राष्टपति को भेजा ज्ञापन appeared first on Khabar Uttarakhand - Uttarakhand News.

Aug 11, 2026 - 00:34
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ट्रेड यूनियनों ने राष्ट्रपति को ज्ञापन भेजा, न्यूनतम वेतन 26 हजार और MSP की मांगें
उत्तराखंड संयुक्त ट्रेड यूनियन संघर्ष समिति और संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले मजदूरों और किसा

ट्रेड यूनियनों ने राष्ट्रपति को ज्ञापन भेजा, न्यूनतम वेतन 26 हजार और MSP की मांगें

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कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखंड में मजदूरों और किसानों ने विभिन्न मांगों को लेकर प्रदर्शन किया और राष्ट्रपति को ज्ञापन भेजा है, जिसमें न्यूनतम वेतन 26 हजार रुपये प्रतिमाह और फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की मांग की गई है।

उत्तराखंड संयुक्त ट्रेड यूनियन संघर्ष समिति और संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले शनिवार को आयोजित प्रदर्शन में कर्मचारियों और किसानों ने अपनी विभिन्न मांगों को प्रशासन के सामने रखा। इस प्रदर्शन का उद्देश्य केंद्र सरकार से तत्काल कार्रवाई की मांग करना था। ज्ञापन में उठाई गई मुख्य मांगें निम्नलिखित हैं:

महत्वपूर्ण मांगों का खाका

इस आंदोलन के तहत ट्रेड यूनियनों द्वारा उठाए गए प्रमुख मुद्दे निम्नलिखित हैं:

  1. केंद्र सरकार न्यूनतम वेतन को बढ़ाकर 26,000 रुपये प्रतिमाह करे।
  2. श्रम संहिता और नियमों को निरस्त कर सभी श्रमिकों के लिए संघ बनाने एवं पंजीकरण का अधिकार सुनिश्चित किया जाए।
  3. सभी फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) C2+50% के आधार पर सुनिश्चित किया जाए।
  4. विद्युत संशोधन विधेयक 2025 को वापस लिया जाए और बिजली के निजीकरण पर रोक लगाई जाए।
  5. सभी श्रमिकों के लिए वेतन बढ़ाकर 42,000 रुपये तक किया जाए।
  6. ग्राम जनकल्याण अधिनियम को निरस्त कर महात्मा गाँधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार योजना (MGNREGA) के तहत 200 दिनों के काम और 700 रुपये दैनिक मजदूरी को बहाल किया जाए।
  7. किसानों और दलितों के लिए विशिष्ट ऋण माफी की व्यवस्था की जाए।
  8. कृषि संसाधन नियंत्रण अधिनियम के प्रभावी कार्यान्वयन की आवश्यकता है।
  9. कृषि का आधुनिकीकरण किया जाए और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों को बढ़ावा दिया जाए।
  10. सरकारी सेवाओं के निजीकरण पर रोक लगाई जाए।
  11. सार्वभौमिक पेंशन की व्यवस्था की जाए।
  12. पेपर लीक मामले में गिरफ्तार आंदोलनकारियों को तुरंत रिहा किया जाए।
  13. ईपीएफ और पेंशन निकासी के पुराने नियमों को बहाल किया जाए।

संगठनों ने यह भी चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो वे अपने प्रदर्शन को और तेज करेंगे। यह प्रदर्शन केवल राज्य स्तर पर ही नहीं, बल्कि पूरे देश में एकजुटता के प्रतीक के रूप में भी देखा जा रहा है।

इसी प्रकार के आंदोलनों की निरंतरता से यह स्पष्ट होता है कि श्रमिक वर्ग और किसान अपनी मांगों के प्रति सजग हैं और किसी भी तरह की लापरवाही सहन करने को तैयार नहीं हैं। इन मांगों के संबंध में राजनीतिक और सामाजिक ध्यान देने की आवश्यकता है।

प्रदर्शनकारी संगठनों के नेताओं का कहना है कि सरकार को उनके मुद्दों को गंभीरता से लेना चाहिए, ताकि समाज के सभी वर्गों का विकास संभव हो सके।

इस प्रकार, यह ज्ञापन केवल एक दस्तावेज नहीं, बल्कि समाज के विभिन्न वर्गों की आवाज है, जिसे सुना जाना चाहिए।

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सीमा शुक्ला
टीम खर्चा पानी

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