ज्योलीकोट दूषित पानी केस: मामला पहुंचा हाईकोर्ट, पकड़ा गया अधिकारियों का झूठ
नैनीताल के ज्योलीकोट में लोग मर रहे हैं। लेकिन अफ़सर कह रहे हैं कि सब चंगा सी। ये फटकार उत्तराखंड हाईकोर्ट की है।जिसने जल संस्थान के अधिकारियों की नींद उड़ाकर रख दी है। आखिर नैनीताल के 15 साल पुराने वाटर टैंक में ऐसा क्या मिला कि एक केमिस्ट ने इस्तीफा दे दिया? दूषित पानी से … The post ज्योलीकोट दूषित पानी केस: मामला पहुंचा हाईकोर्ट, पकड़ा गया अधिकारियों का झूठ appeared first on Khabar Uttarakhand - Uttarakhand News.
नैनीताल के ज्योलीकोट में लोग मर रहे हैं। लेकिन अफ़सर कह रहे हैं कि सब चंगा सी। ये फटकार उत्तराखंड हाईकोर्ट की है।जिसने जल संस्थान के अधिकारियों की नींद उड़ाकर रख दी है। आखिर नैनीताल के 15 साल पुराने वाटर टैंक में ऐसा क्या मिला कि एक केमिस्ट ने इस्तीफा दे दिया? दूषित पानी से मरने वाली नीमा जोशी रितेश और अनीता की मौत का असल जिम्मेदार आखिर कौन है?
ज्योलीकोट दूषित पानी मामला गर्माया
नैनीताल के ज्योलीकोट, चोपड़ा, खुर्पाताल और सड़ियाताल के लोगों की गंदे पानी के चलते मौत और बीमार पड़ने का मामला अब और ज्यादा गरमा गया है। इस मामले में हाईकोर्ट ने अधिकारियों को खूब फटकार लगाई और सीएम धामी ने भी इसे लेकर बड़ा एक्शन ले लिया है।
दरअसल दुर्गापुर पेयजल संयंत्र, जहां से ज्योलीकोट और आसपास के इलाकों को पीने का पानी सप्लाई किया जाता है। ठीक इसी प्लांट के ऊपर सीवर ट्रीटमेंट प्लांट बना हुआ है। महीनों से इस सीवर प्लांट का बदबूदार और दूषित पानी रीस-रीसकर सीधे पीने के पानी की मेन लाइन में मिल रहा था।
लोगों ने झाग वाले बदबूदार पानी की कंप्लेंट की
ज्योलीकोट के स्थानीय लोग 20 जून से ही अपने घरों में आ रहे झाग वाले बदबूदार पानी की कंप्लेंट कर रहे थे। बच्चों के साथ ही और लोगों को उल्टी दस्त होने लगे तो लोग जल संस्थान के दफ्तरों के चक्कर काटते रहे लेकिन ऐसी कमरों में बैठे अफसरों के कानों में जूं तक नहीं रेंगी। गंदे पानी के चलते नैनीताल के ज्योलीकोट इलाके में 200 से ज्यादा लोग पेट के गंभीर संक्रमण की चपेट में आ गए हैं।
तीन लोगों की मौत
इसी के साथ ज्योलीकोट की रहने वाली 26 साल की नीमा जोशी, सड़ियाताल के गाजे गांव का रहने वाला 16 साल का रितेश और ज्योलीकोट की ही एक और स्थानीय महिला अनीता ने इस गंदे पानी से हुए संक्रमण के चलते अपनी जान गंवा दी।
जब दो महीने की अनदेखी के बाद मौतें होने लगीं लोग अनशन पर बैठे, जन-आक्रोश सड़कों पर उतरा, तब जाकर 27 अगस्त को उस दूषित पानी की लाइन को काटा गया।
मामला पहुंचा हाईकोर्ट, पकड़ा गया अधिकारियों का झूठ
मामला जब उत्तराखंड हाईकोर्ट पहुंचा, तो जल संस्थान के अधिकारियों ने कोर्ट में भी सफ़ाई देने की कोशिश की। कोर्ट में रिपोर्ट पेश करके कहा गया कि स्थिति पूरी तरह सामान्य है और पानी की आपूर्ति ठीक है। लेकिन जब कोर्ट के सामने असल जांच रिपोर्ट पेश हुई, तो अधिकारियों का झूठ पकड़ा गया।
10 में से 7 सैंपल हुए फ़ेल
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट में पानी के 10 सैंपल में से 7 सैंपल फ़ेल हो गए। स्वास्थ्य विभाग ने जो 5 सैंपल लिए, उनमें से 4 पानी के सैंपल ऐसे थे जो इस्तेमाल के लायक ही नहीं थे। जब हाईकोर्ट के सामने ये आंकड़े आए, तो कोर्ट का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया। कोर्ट ने अधिकारियों से तीखे सवाल पूछे कि आखिर दूषित पानी रोकने के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए। लेकिन जवाब देने के लिए अफ़सरों के पास शब्द नहीं थे।
हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया
इसी असंतोष के बाद हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए जांच कमेटी में राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को शामिल करने का आदेश दिया है और उत्तराखंड के मुख्य सचिव आनंद वर्धन को पूरे एक हफ़्ते के भीतर मामले की विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करने का सख्त निर्देश दिया है।
जल संस्थान के लैब के सीनियर केमिस्ट योगेंद्र पाल ने दिया इस्तीफा
हालांकि इसी बीच नैनीताल जल संस्थान के लैब के सीनियर केमिस्ट योगेंद्र पाल ने भी अपने पद से इस्तीफा दे दिया। इस्तीफ़ा देते हुए उन्होंने कहा कि ‘वो विभागीय दबाव और ज्योलीकोट में घटे इस दर्दनाक प्रकरण से बेहद व्यथित हैं, इसीलिए वो नौकरी छोड़ रहे हैं।’
पुष्कर सिंह धामी ने लिया संज्ञान
मामले की गंभीरता को देखते हुए सूबे के मुखिया पुष्कर सिंह धामी ने इस पूरे कांड का संज्ञान लिया है। मुख्यमंत्री ने कड़ा रुख अपनाते हुए पूरे उत्तराखंड में पेयजल और सीवर लाइनों के तुरंत ऑडिट कराने के सख्त निर्देश दिए हैं।
15 दिन के अंदर रिपोर्ट तलब की गई है। मुख्यमंत्री ने दो टूक शब्दों में कहा है कि हर घर तक सुरक्षित पानी पहुंचाना सरकार की जिम्मेदारी है, और लीकेज या पानी की शिकायत मिलने पर अगर तुरंत एक्शन नहीं हुआ, तो अफसरों को बख्शा नहीं जाएगा।
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