उत्तराखंड में देरी से आया मानसून, अल नीनो का पड़ेगा प्रभाव

लंबे इंतजार के बाद आखिरकार उत्तराखंड में मौसम ने करवट ले ली है। देहरादून से लेकर पहाड़ों तक झमाझम बारिश गर्मी से राहत दे रही हैं। कई जिलों में बारिश को लेकर अलर्ट भी जारी हुआ है। हालांकि इसी बीच वैज्ञानिकों ने एक बड़ी चेतावनी जारी की है। उनके मुताबिक इस बार मानसून ज्यादा बरसात …

Jun 30, 2026 - 18:34
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उत्तराखंड में देरी से आया मानसून, अल नीनो का पड़ेगा प्रभाव
लंबे इंतजार के बाद आखिरकार उत्तराखंड में मौसम ने करवट ले ली है। देहरादून से लेकर पहाड़ों तक झमाझम

उत्तराखंड में देरी से आया मानसून, अल नीनो का पड़ेगा प्रभाव

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कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखंड में आखिरकार मानसून ने दस्तक दी है, लेकिन वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि इस बार बारिश की मात्रा सामान्य से कम रहेगी। अल नीनो के कारण मौसम पर असर पड़ सकता है।

उत्तराखंड में मानसून की दस्तक

उत्तराखंड में, खासतौर पर देहरादून और पहाड़ी क्षेत्रों में, मौसम ने जादुई रूप से करवट ली है। झमाझम बारिश ने गर्मी से राहत दी है, जिससे लोग काफी खुश हैं। मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार, पौड़ी, पिथौरागढ़ और बागेश्वर में भारी बारिश के लिए येलो अलर्ट जारी किया गया है। इसके साथ, हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर में भी हल्की बारिश का पूर्वानुमान है।

एक हफ्ते की देरी से आया मानसून

हालांकि, इस बारिश के बावजूद, आंकड़े बताते हैं कि बीते 4-15 जून के बीच पूरे देश में बारिश सामान्य से 64 प्रतिशत कम रही। उत्तराखंड का महीना जून तो सूखे में ही बीता। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उत्तराखंड में इस बार मानसून करीब एक हफ्ते लेट पहुंचा है, जो पिछले पांच वर्षों में पहली बार हो रहा है। इस देरी ने लोगों को उमस और गर्मी की शिकस्त देने में योगदान किया।

अलनीनो का प्रभाव

इस वर्ष की अनियमितता के पीछे अलनीनो को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। प्रशांत महासागर में चलने वाली तेज हवाएं गर्म पानी को एशिया और ऑस्ट्रेलिया की ओर ले जाती हैं, जिससे बादल बनते हैं और मानसून के लिए आवश्यक नमी मिलती है। लेकिन जब ये हवाएं कमजोर हो जाती हैं, तो गर्म पानी वापस समुद्र के पूर्वी हिस्से में चला जाता है, जिससे उच्च तापमान प्रकट होता है। यह प्रक्रिया अल नीनो कहलाती है।

अल नीनो का मानसून पर असर

अल नीनो का प्रभाव सिर्फ प्रशांत महासागर तक नहीं होता; इसकी वजह से बादलों के बनने के तरीके में बदलाव आता है और हवाओं की दिशा भी बदल जाती है। नतीजतन, भारत तक पहले जितनी नमी नहीं पहुंच पाती। यही कारण है कि इस बार मानसून में बारिश की मात्रा कम हो सकती है।

देश के लिए सामान्य से कम बारिश

इकोनॉमिक टाइम्स द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, इस साल जून में देशभर में सामान्य बारिश से लगभग 39.8 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई। यह वर्ष 1901 के बाद से जून का पांचवां सबसे सूखा महीना रहा, जिसमें सामान्यत: 165.3 मिमी बारिश की अपेक्षा, केवल 99.5 मिमी बारिश हुई।

उत्तराखंड में सुस्त शुरुआत

जैसा कि टाइम्स ऑफ इंडिया में बताया गया है, उत्तराखंड में मानसून की शुरुआत सुस्त रही है, जहां अब तक 32 प्रतिशत कम बारिश हुई है। अलनीनो के प्रभाव से मानसून की गति धीमी हो गई है, जिसके चलते राज्य में तापमान में वृद्धि हुई है।

अल नीनो का भविष्य पर असर

गर्मी ने लोगों को परेशान कर रखा था। फिर भी प्री मानसून की फुहारों ने थोड़ी राहत प्रदान की है। लेकिन वैज्ञानिकों का मानना है कि इस साल मानसून लम्बे समय तक रहेगा, किंतु बारिश की मात्रा अपेक्षाकृत कम रहेगी।

उत्तराखंड में इन मौसम की स्थिति को ध्यान में रखते हुए सभी नागरिकों को सतर्क रहना चाहिए। अन्य जानकारी के लिए, आप यहां क्लिक करें

— टीम खर्चा पानी, साक्षी मेहरा

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