उत्तराखंड: पूर्ण साक्षर राज्य का दर्जा, राज्यपाल गुरमीत सिंह ने स्वीकृति दी
Uttarakhand News : उत्तराखंड को पूर्ण साक्षर राज्य का दर्जा देने का प्रस्ताव हाल ही में राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में पारित किया गया था। बुधवार को राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह ने इस प्रस्ताव को अपनी औपचारिक स्वीकृति प्रदान कर दी है। उत्तराखंड अब पूर्ण साक्षर राज्य घोषित उत्तराखंड ने शिक्षा के क्षेत्र में […]
उत्तराखंड: पूर्ण साक्षर राज्य का दर्जा, राज्यपाल गुरमीत सिंह ने स्वीकृति दी
Breaking News, Daily Updates & Exclusive Stories - Kharchaa Pani
कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखंड ने अब खुद को पूर्णत: साक्षर राज्य के रूप में स्थापित कर लिया है। यह घोषणा हाल ही में राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में पारित प्रस्ताव के मद्देनजर हुई है, जिसे राज्यपाल गुरमीत सिंह ने स्वीकृति दी है।
उत्तराखंड अब पूर्ण साक्षर राज्य घोषित
उत्तराखंड ने शिक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए खुद को देश के मानचित्र पर पूर्ण साक्षर राज्यों में शामिल कर लिया है। राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह ने इस प्रस्ताव को मंजूरी देने के बाद इसे औपचारिक रूप से स्वीकृति दी। यह फैसला राज्य सरकार की ओर से स्वास्थ्य शिक्षा नीति (NEP) 2020 और उल्लास कार्यक्रम के निर्धारित मानकों को पूरा करने के बाद आया है।
प्रदेश की साक्षरता दर अब 98 प्रतिशत से अधिक
राज्य के शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने बताया कि अब उत्तराखंड की साक्षरता दर 98 प्रतिशत के आंकड़े को पार कर चुकी है। केंद्र सरकार के उल्लास कार्यक्रम के तहत निर्धारित लक्ष्यों को पूरा करने के बाद यह महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की गई है।

वयस्क शिक्षा पर रहा विशेष फोकस
उल्लास कार्यक्रम के तहत, 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के निरक्षर व्यक्तियों को शिक्षित करने पर ध्यान केंद्रित किया गया। इस पहल में वयस्कों को न केवल पढ़ने-लिखने की शिक्षा दी गई, बल्कि उन्हें जीवनोपयोगी कौशल और व्यावसायिक प्रशिक्षण भी प्रदान किया गया।
इस कार्यक्रम की सफलता के लिए विभिन्न सामाजिक संगठनों, कॉर्पोरेट संस्थाओं और स्वयंसेवकों ने सहयोग किया, जिसके फलस्वरूप कई गांवों को गोद लेकर निरक्षर व्यक्तियों को साक्षर बनाया गया।
महिलाओं और वंचित वर्गों को मिली प्राथमिकता
इस पहल के तहत, विशेष रूप से महिलाओं, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य वंचित वर्गों को उच्च प्राथमिकता दी गई। उन क्षेत्रों में विशेष फोकस रखा गया जहां महिला साक्षरता दर 60 प्रतिशत से कम थी, ताकि सभी को शिक्षा का लाभ मिल सके।
उत्तराखंड का यह कदम न सिर्फ प्रदेश की छवि को बदलेगा, बल्कि यहां के लोगों के भविष्य के लिए भी एक नई राह खोलेगा। अधिक जानकारियों के लिए, हमारी वेबसाइट पर जाएं.
टीम खर्चा पानी, साक्षी शर्मा
What's Your Reaction?