उत्तराखंड की IMPCL कंपनी: मुनाफे में होते हुए भी क्यों की गई निजी हाथों में निलाम?

Uttarakhand IMPCL Sold Off to Private Hands: उत्तराखंड की IMPCL कंपनी जिसकी नेट वर्थ 150 करोड़ की थी। जिससे हर साल करोड़ों का मुनाफा आता था। राज्य में हजारों लोगों के परिवार इससे चलते थे। लेकिन बावजूद इसके सरकार ने उसे बेच दिया। ना सिर्फ बेचा बल्कि उसकी वर्थ से कम 121 करोड़ में नीलाम …

Jun 4, 2026 - 00:34
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उत्तराखंड की IMPCL कंपनी: मुनाफे में होते हुए भी क्यों की गई निजी हाथों में निलाम?
Uttarakhand IMPCL Sold Off to Private Hands: उत्तराखंड की IMPCL कंपनी जिसकी नेट वर्थ 150 करोड़ की थी। जिससे हर साल करोड़ों का मुनाफ

उत्तराखंड की IMPCL कंपनी: मुनाफे में होते हुए भी क्यों की गई निजी हाथों में निलाम?

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कम शब्दों में कहें तो उत्तराखंड की IMPCL कंपनी, जिसकी नेट वर्थ 150 करोड़ थी और जो हर साल करोड़ों का मुनाफा कमा रही थी, को सरकार ने 121 करोड़ में बेचा। ये फैसला सामने आया है कि कंपनी के मुनाफे के बावजूद, इसे निजी हाथों में क्यों सौंपा गया।

यह आर्टिकल आपके सामने पेश करता है कि कैसे उत्तराखंड की इस सार्वजानिक कंपनी को बेचना न केवल बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है, बल्कि यह राज्य के हजारों परिवारों की रोजी-रोटी पर भी प्रभाव डालता है।

बिक गई उत्तराखंड की IMPCL कंपनी

उत्तराखंड राज्य की IMPCL (India Medicinal Plants Company Limited) भारत सरकार के आयुष मंत्रालय के अधीन आने वाली एक केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी है। इसकी स्थापना 1978 में की गई थी और यह आयुर्वेदिक तथा यूनानी दवाएँ बनाने में प्रमुख भूमिका निभाती है। IMPCL के 1200 से अधिक दवाओं के लाइसेंस हैं और यह जिम कॉर्बेट के पास 40 एकड़ की प्राइम लोकेशन में स्थित है। जानकारों का मानना है कि कंपनी की औसत मूल्यांकन केवल जमीन और मशीनों के आधार पर 150 करोड़ से अधिक है।

फायदे में चल रही थी IMPCL

IMPCL कंपनी पिछले कुछ वर्षों से मुनाफे में चल रही थी। इसके वित्तीय आंकड़े इस प्रकार हैं:

  • 2022-23: ₹20.81 करोड़ लाभ
  • 2023-24: ₹12.80 करोड़ लाभ (हालांकि लाभ घटा, फिर भी फायदे में थी)
  • 2024-25: ₹17.65 करोड़ लाभ
इस कंपनी में सीधे तौर पर कई कर्मचारी काम कर रहे थे, साथ ही अप्रत्यक्ष रूप से अनुमानित 5000 लोग इससे जुड़ते थे। यह अल्मोड़ा और आसपास क्षेत्र के लोगों के लिए रोजगार का बड़ा जरिया थी।

फिर क्यों बेच दी सरकार ने?

सरकार के अनुसार, उन्हें इसे विनिवेश का नाम देकर निजी हाथों में सौंपने का निर्णय लेना पड़ा। सरकार का तर्क है कि उनका काम कारोबार चलाना नहीं, बल्कि शासन चलाना है। इससे कंपनी का विस्तार होगा और नई तकनीक आएगी। हालांकि, यह तर्क जनमानस के बीच सवाल उठा रहा है कि क्या एक मुनाफे वाली कंपनी को बेचना अनिवार्य था।

किसे फायदा पहुंचाने के लिए IMPCL कंपनी की हुई निलामी?

लोगों का मानना है कि यह एक बड़ा खेल प्राइवेट कंपनियों के हित में है। कई जानकारों ने यह भी बताया कि कंपनी को घाटे में दिखाने के लिए जानबूझकर नीतियाँ बनाई गई थीं। इसके बावजूद, IMPCL मुनाफा कमाती रही और फिर भी इसे नीलाम कर दिया गया।

कई बीजेपी नेताओं समेत राहुल गांधी ने भी इसको लेकर उठाई आवाज

इस मामले को लेकर कई बीजेपी नेताओं ने प्रधानमंत्री को चिट्ठियाँ लिखी हैं, और विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने भी सख्त लहजे में विरोध जताया। फिर भी, सरकार ने सभी आवाजों को नकार दिया है। इससे न केवल कंपनी की स्थिति पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं, बल्कि उत्तराखंड के हजारों परिवारों की आर्थिक सुरक्षा भी खतरे में पड़ गई है।

उत्तराखंड के हजारों परिवारों की रोज़ी‑रोटी थी कंपनी

IMPCL ने उत्तराखंड के हजारों परिवारों को स्थायी रोजी-रोटी प्रदान की है। यह कोई बीमार या डूबती हुई कंपनी नहीं थी। उसके पास थी 40 एकड़ जमीन, उन्नत मशीनें, 1200 से अधिक दवाओं के लाइसेंस और हर साल करोड़ों का मुनाफा। फिर भी इसे बेचना आवश्यक क्यों था?

IDPL, ऋषिकेश और HMT रानीबाग आदि कंपनियों को बीमार घोषित

यह पहली बार नहीं है जब सरकारी कंपनियों का भविष्य असुरक्षित है। इससे पहले भी कई कंपनियों जैसे IDPL, ऋषिकेश और HMT रानीबाग को बीमार घोषित किया गया। इनका उत्पादन घट गया और अंततः ये कंपनियां बंद हो गईं। यदि यही प्रक्रिया जारी रही, तो IMPCL का भविष्य भी ऐसे ही क्षीण हो सकता है।

अंत में, यह देखना होगा कि सरकार इस मुद्दे पर क्या कदम उठाती है और क्या IMPCL को उसकी सही स्थिति तक लाने के लिए कोई प्रयास किया जाएगा या नहीं।

इसके लिए और भी अपडेट के लिए, हमारी वेबसाइट पर जाएं: kharchaapani.com.

आपके विचार हमें बताएं। टीम खर्छा पानी राधिका शर्मा

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