राहुल गांधी को 4 हफ्ते का समय मिला:लखनऊ हाईकोर्ट ने राहत देने से इनकार किया; स्टेटस रिपोर्ट मांगी, 21 अप्रैल को सुनवाई

लखनऊ हाईकोर्ट में राहुल गांधी की नागरिकता से जुड़ी याचिका पर सोमवार को सुनवाई हुई। न्यायमूर्ति ए आर मसूदी और न्यायमूर्ति अजय कुमार श्रीवास्तव की खंडपीठ ने राज्य सरकार को चार सप्ताह में स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया। सरकार ने 8 सप्ताह का समय मांगा था। अगली सुनवाई 21 अप्रैल को होगी। इससे पहले 19 दिसम्बर 2024 को कोर्ट में सुनवाई हुई थी। जस्टिस राजन रॉय और जस्टिस ओम प्रकाश शुक्ला की बेंच ने एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (ASG) सूर्यभान पांडेय को इस मामले में केंद्रीय गृह मंत्रालय से जानकारी हासिल करने का निर्देश दिया था। गृह मंत्रालय ने यूके सरकार को पत्र लिखा गृह मंत्रालय ने हाईकोर्ट में बताया था कि उन्होंने यूके सरकार को पत्र लिखा है। यूनियन ऑफ इंडिया की ओर से उपस्थित वकील ने कहा- समय दिया जाए। पूरे मामले में क्या जांच हो रही है। इसकी पूरी रिपोर्ट 8 सप्ताह में हम तैयार करके पेश करेंगे। कोर्ट ने समय दिया था। याचिकाकर्ता का दावा- राहुल गांधी ब्रिटिश नागरिक हैं याचिकाकर्ता कर्नाटक निवासी एस. विग्नेश शिशिर ने याचिका में दावा किया है कि राहुल गांधी ब्रिटिश नागरिक हैं। उनकी भारतीय नागरिकता रद्द की जानी चाहिए। उन्होंने ब्रिटिश सरकार के कुछ ईमेल और दस्तावेज जुटाए हैं। ये राहुल गांधी की कथित ब्रिटिश नागरिकता का सबूत हैं। कोर्ट आज इस पर फैसला सुना सकता है। चुनाव लड़ने के अयोग्य याचिका में कहा गया है कि दोहरी नागरिकता के कारण राहुल गांधी चुनाव लड़ने के अयोग्य हैं। वे लोकसभा सदस्य का पद नहीं धारण कर सकते। याचिकाकर्ता ने राहुल की सांसद पद पर बने रहने के खिलाफ अधिकार पृच्छा रिट जारी करने की मांग की है। सीबीआई जांच की मांग याचिका में दोहरी नागरिकता को भारतीय न्याय संहिता और पासपोर्ट एक्ट के तहत अपराध बताया गया है। इस मामले में सीबीआई जांच की मांग भी की गई है। याचिकाकर्ता ने बताया कि उन्होंने इस मामले में सक्षम प्राधिकारी को दो बार शिकायत भेजी। कोई कार्रवाई नहीं होने पर उन्होंने यह याचिका दाखिल की है। ................................. यह खबर भी पढ़ें: लखनऊ कोर्ट नहीं पहुंचे राहुल गांधी..वकालतनामा पेश:कहा था- चीनी सैनिक भारतीय सेना के जवानों को पीट रहे; 29 अप्रेल को सुनवाई होगी लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी लखनऊ की MP/MLA कोर्ट में नहीं पेश हुए। भारतीय सेना के खिलाफ टिप्पणी के मामले में 11 फरवरी को अदालत ने राहुल को समन भेजा था। जिसमें कहा था, राहुल गांधी के इस बयान को उनके संसदीय कर्तव्यों का हिस्सा नहीं माना जा सकता, इसलिए उन्हें कानून के तहत विशेष सुरक्षा नहीं मिलेगी। यहां पढ़े पूरी खबर

Mar 24, 2025 - 21:34
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राहुल गांधी को 4 हफ्ते का समय मिला:लखनऊ हाईकोर्ट ने राहत देने से इनकार किया; स्टेटस रिपोर्ट मांगी, 21 अप्रैल को सुनवाई

राहुल गांधी को 4 हफ्ते का समय मिला:लखनऊ हाईकोर्ट ने राहत देने से इनकार किया; स्टेटस रिपोर्ट मांगी, 21 अप्रैल को सुनवाई

Kharchaa Pani

लेखक: सुमना शर्मा, नेत्रा शुक्ला, टीम नेटानागरी

प्रस्तावना

लखनऊ हाईकोर्ट ने राहुल गांधी को 4 हफ्ते का समय दिया है, लेकिन राहत देने से इनकार करते हुए एक स्टेटस रिपोर्ट मांगी है। यह सुनवाई 21 अप्रैल को होने जा रही है। इस निर्णय ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है और पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच चिंता का विषय बन गया है।

मामले का पृष्ठभूमि

राहुल गांधी, जोकि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष हैं, उनके खिलाफ कई मामले चल रहे हैं। विशेष रूप से, उनके द्वारा दिए गए एक बयान को लेकर विवाद उठ रहा है। लखनऊ हाईकोर्ट में दाखिल की गई याचिका में राहत मांगी गई थी, जिसे अदालत ने अस्वीकार कर दिया।

लखनऊ हाईकोर्ट का निर्णय

हाईकोर्ट ने 12 मार्च को सुनवाई के दौरान मामले की गंभीरता को देखते हुए राहुल गांधी से स्टेटस रिपोर्ट की मांग की। अदालत ने कहा कि इसे ध्यान में रखते हुए 21 अप्रैल को अगली सुनवाई आयोजित की जाएगी। यह निर्णय आने वाले समय में राजनीतिक तंत्र पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकता है।

कांग्रेस पार्टी की प्रतिक्रिया

कांग्रेस पार्टी ने इस निर्णय पर नाखुशी व्यक्त की है और इसे राजनीति का हिस्सा बताया है। पार्टी के प्रवक्ता ने कहा कि राहुल गांधी इस मामले का सामना करने के लिए तैयार हैं और सच की जीत होगी।

सामाजिक मीडिया पर बहस

इस मामले को लेकर सोशल मीडिया पर भी व्यापक बहस देखने को मिली है। लोगों की मिश्रित प्रतिक्रियाएँ आई हैं, जहाँ कुछ लोग राहुल गांधी के समर्थन में खड़े हुए हैं, वहीं कुछ ने उन्हें आलोचना का निशाना बनाया है।

निष्कर्ष

लखनऊ हाईकोर्ट का यह निर्णय निश्चित रूप से राजनीतिक परिदृश्य में एक नई हलचल ला सकता है। आने वाले दिनों में, राहुल गांधी द्वारा अपनी स्थिति स्पष्ट करने और अपनी बात रखने की आवश्यकता है। राजनीति में हालात तेजी से बदलते हैं, इसलिए यह देखना दिलचस्प होगा कि 21 अप्रैल को सुनवाई में क्या नया सामने आता है।

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