रिलेशनशिप- भावनाओं में लिए फैसले हो सकते हैं गलत:इमोशंस हावी हों तो कैसे करें कंट्रोल, साइकोलॉजिस्ट से जानिए 7 तरीके

हमारे आस-पास कई तरह के लोग होते हैं। कुछ लोग बात-बात पर गुस्सा करते हैं और छोटी-छोटी बातों पर नाराज हो जाते हैं। वहीं कुछ लोग ऐसे भी होते हैं, जो पल भर में ही भावुक हो जाते हैं, जैसे किसी ने उनका दिल दुखा दिया हो। ये सब हमारी भावनाएं होती हैं। जब ये इमोशंस हम पर हावी होते हैं तो हमारा दिमाग शांत नहीं रह पाता है। गुस्सा, चिंता और उदासी जैसी भावनाएं हमें अंदर ही अंदर नुकसान पहुंचाती हैं। जब ये इमोशंस हावी होते हैं तो हम सही और गलत में फर्क करना भूल जाते हैं। हार्वर्ड यूनिवर्सिटी की एक रिसर्च के मुताबिक, इन इमोशंस असर सेहत के साथ हमारे फैसलों पर भी पड़ता है। कभी-कभी हमारी भावनाएं सही फैसले लेने में मदद करती हैं, लेकिन कई बार गलत फैसलों का कारण भी बनती हैं। भावनाएं हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा होती हैं, लेकिन हमें इन्हें कंट्रोल करना सीखना होगा, जिससे हम सही फैसले ले सकें और एक खुशहाल जिंदगी जी सकें। ऐसे आज हम रिलेशनशिप में जानेंगे कि- हम इमोशंस कंट्रोल क्यों नहीं कर पाते हैं? जब भी हम कोई काम बिना सोचे-समझे करते हैं, तो भावनाओं पर काबू रखना मुश्किल हो जाता है। हम बहुत अधिक खुश होते हैं तो भी इससे हमारे फैसले पर असर पड़ सकता है। इसी तरह गुस्सा, उदासी, क्रोध और निराशा जैसे नेगेटिव इमोशंस भी हमारे फैसले में बाधा डाल सकते हैं। हमारे इमोशंस कंट्रोल न कर पाने की कई सारी वजहें हो सकती हैं। कई बार हमें अपनी भावनाओं के बारे में पता ही नहीं होता है, वहीं कई बार हमें इमोशंस को जबरदस्ती दबाने की आदत लग जाती है। ऐसे में ये अचानक से फट सकते हैं। जल्दबाजी करना, छोटी-छोटी बात का बुरा मान लेना इमोशंस को कंट्रोल करने की क्षमता को प्रभावित करता है। ऐसे में सबसे जरूरी बात यह है कि हमें अपनी भावनाओं को स्वीकार करना चाहिए। किसी भी फैसले को सोच-विचार कर लेना चाहिए। क्या इमोशंस को कंट्रोल करना सही है? हमें अपनी भावनाओं को कभी दबाना नहीं चाहिए, बल्कि उन्हें समझने की कोशिश करनी चाहिए। अपनी भावनाओं को कंट्रोल करके हम जिंदगी में बेहतर काम कर सकते हैं। इससे हम मुश्किल समय में भी शांत रह सकते हैं और अच्छे फैसले ले सकते हैं, जिससे हमारी जिंदगी खुशहाल और कामयाब बनती है। क्या मैं अपने इमोशंस को कंट्रोल कर सकता हूं? हमारी भावनाएं अचानक और अनैच्छिक होती हैं। इन पर हमारा वश नहीं होता है। ऐसे में हम उन्हें आने से नहीं रोक सकते हैें। हालांकि, हम उन्हें दूसरी दिशा में या किसी और भावना की ओर मोड़ सकते हैं। इसके जरिए हम उनकी तीव्रता और प्रभाव को कम कर सकते हैं। इमोशन को कैसे कंट्रोल किया जा सकता है? अगर हम अपनी भावनाओं को कंट्रोल करना सीख लेंगे, तो कई सारी परेशानियों को हल कर सकते हैं। इसके साथ ही हम अपनी भावनाओं को कंट्रोल करने के लिए म्यूजिक का सहारा ले सकते हैं। आपने ध्यान दिया होगा कि जब हम बहुत परेशान होते हैं, तो म्यूजिक सुनते ही तनाव, गुस्से और बेचैनी से राहत मिलती है। ऐसे में संगीत सुनना भी इमोशंस को कंट्रोल करने में मदद कर सकता है। सेल्फ केयर एक्टिविटीज के जरिए इमोशंस कंट्रोल करना सीखें जर्नल ऑफ ह्यूमन बिहेवियर इन द सोशल एनवायर्नमेंट में पब्लिश्ड एक स्टडी के मुताबिक, जब आप अपने दिमाग, शरीर और आत्मा का ध्यान रखते हैं, तो आप खुद को बेहतर ढंग से समझ पाते हैं और अपनी भावनाओं को नियंत्रित कर पाते हैं। आइए इन एक्टिविटीज को ग्राफिक के जरिए समझते हैं। आइए ग्राफिक्स को विस्तार से समझते हैं। अपनी भावनाओं के ट्रिगर्स को पहचानें: अपनी भावनाओं को नियंत्रित करने का पहला तरीका यह समझना है कि आपको क्या ट्रिगर करता है। क्या कुछ खास लोग, परिस्थितियां या ऐसे विचार हैं, जो आपको परेशान करते हैं? अपनी भावनाओं पर ध्यान दें और इसे एक डायरी में लिखें। साथ ही आप यह नोट करें कि आप कैसा महसूस कर रहे हैं और उस समय क्या हो रहा था। इससे आपको इमोशंस के पैटर्न को पहचानने और अपने ट्रिगर्स को समझने में मदद मिलेगी। गहरी सांस लेने का अभ्यास करें: जब आप गहरे इमोशंस का अनुभव कर रहे हों, तो गहरी और लंबी सांस लेने का अभ्यास करें। इससे आपको स्ट्रेस कम करने और इमोशंस की कंट्रोल करने में मदद मिल सकती है। सकारात्मक सोच विकसित करें: नकारात्मक विचारों को सकारात्मक विचारों में बदलने का प्रयास करें। अपनी ताकत और सकारात्मक अनुभवों पर ध्यान केंद्रित करें। जब आप नकारात्मक विचार महसूस कर रहे हों, तो कुछ ऐसा सोचें जो आपको खुश करे। जैसे आप किसी काम को लेकर परेशान हैं तो अपने किसी बेस्ट परफॉर्मेंस के बारे में सोचें। इससे दृष्टिकोण को बदलने और भावनाओं को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है। गुस्से को कंट्रोल करें: जब कभी आपको गुस्सा आए, तो तुरंत प्रतिक्रिया देने से बचें। कुछ देर के लिए चुप रहें। ऐसे समय में आप किसी दूसरी जगह जा सकते हैं। जैसे आप टहलने जा सकते हैं, संगीत सुन सकते हैं या कुछ ऐसा कर सकते हैं, जिससे आपको आराम मिले। जब आप शांत हो जाएं, तो अपनी भावनाओं के बारे में बात करें। स्ट्रेस को मैनेज करें: तनाव की स्थिति में, कुछ समय के लिए शांत जगह पर बैठें। आप योग और ध्यान का भी अभ्यास कर सकते हैं। इससे आपको तनाव कम करने और अपनी भावनाओं को कंट्रोल करने में मदद मिल सकती है। पसंदीदा म्यूजिक सुनें: संगीत में भावनाओं को शांत करने और सकारात्मक भावनाओं को बढ़ावा देने की शक्ति होती है। जब आप तनाव महसूस कर रहे हों, तो संगीत सुनें। इससे स्ट्रेस रिलीज करने और अपनी भावनाओं को कंट्रोल करने में मदद मिल सकती है। ध्यान और योग का अभ्यास करें: ध्यान और योग आपके मन और शरीर को शांत करने में मदद करते हैं। नियमित अभ्यास से आप अपनी भावनाओं पर बेहतर नियंत्रण पा सकते हैं। ध्यान और योग स्ट्रेस, एंग्जाइटी कम करने और फोकस बढ़ाने में मदद कर सकते हैं।

Mar 11, 2025 - 05:34
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रिलेशनशिप- भावनाओं में लिए फैसले हो सकते हैं गलत:इमोशंस हावी हों तो कैसे करें कंट्रोल, साइकोलॉजिस्ट से जानिए 7 तरीके

रिलेशनशिप- भावनाओं में लिए फैसले हो सकते हैं गलत: इमोशंस हावी हों तो कैसे करें कंट्रोल, साइकोलॉजिस्ट से जानिए 7 तरीके

खर्चा पानी

लेखक: अमृता शर्मा, स्नेहा कपूर, और प्रिया मिश्रा, टीम नेतानागरी

परिचय

रिलेशनशिप में भावनाओं का एक विशेष महत्व होता है। अक्सर हम अपने इमोशंस के प्रभाव में आकर जल्दबाज़ी से फैसले ले लेते हैं। ये फैसले कई बार गलत साबित होते हैं। इस लेख में हम जानेंगे कि जब इमोशंस हावी हों, तो कैसे उन्हें नियंत्रित किया जा सकता है। आइए, एक साइकोलॉजिस्ट के दृष्टिकोण से 7 तरीके जानते हैं।

इमोशंस को समझना

पहला तरीका है, अपने इमोशंस को समझना। जब आप किसी स्थिति में होते हैं तो अपने इमोशंस को पहचानें। यह जानना ज़रूरी है कि आप किस भावनात्मक स्थिति में हैं। यह आपको सही निर्णय लेने में सहायता करेगा।

थोड़ा समय लें

दूसरा तरीका है, निर्णय लेने से पहले थोड़ा समय लेना। जब आप भावनात्मक रूप से परेशान हों, तो तुरंत प्रतिक्रिया देने से बचें। स्थिति को समझने के लिए खुद को थोड़ी देर दें। इससे आप ठंडे दिमाग से सोच सकेंगे।

बातचीत करें

तीसरा तरीका संवाद करना है। अपने करीबी दोस्तों या परिवार से अपनी भावनाएँ साझा करें। कई बार दूसरों का दृष्टिकोण सुनने से आपकी सोच में बदलाव आ सकता है।

जर्नलिंग की आदत डालें

चौथा तरीका जर्नलिंग की आदत डालना है। अपने विचारों और भावनाओं को लिखने से आपको उन्हें समझने और उन्हें नियंत्रित करने में मदद मिलेगी। यह आपके भावनात्मक स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी है।

सकारात्मकता को अपनाएँ

पाँचवा तरीका सकारात्मकता को अपनाना है। जब आप नकारात्मक भावनाओं में होते हैं, तो प्रयास करें कि सकारात्मक चीज़ों पर ध्यान दें। यह आपकी मानसिकता को बेहतर करेगा।

सहायता लें

छठा तरीका है पेशेवर मदद लेना। अगर आप अपनी भावनाओं को नियंत्रित नहीं कर पा रहे हैं, तो एक काउंसलर या साइकोलॉजिस्ट से संपर्क करें। यह आपको सही दिशा में मार्गदर्शन कर सकता है।

व्यायाम करें

सातवां और अंतिम तरीका है व्यायाम करना। शारीरिक गतिविधि आपके तनाव को कम करने में मदद करती है। नियमित व्यायाम से न केवल आपका मूड सुधरता है, बल्कि यह आपको अपनी भावनाओं पर नियंत्रण रखने में भी मदद करता है।

निष्कर्ष

भावनाओं का हमारे जीवन पर बहुत प्रभाव होता है। उन पर निगरानी रखकर और उन्हें नियंत्रित करके हम अपने रिश्तों को स्वस्थ बना सकते हैं। उपरोक्त तरीकों का अनुसरण करने से आप अपने इमोशंस को समझकर सही निर्णय ले सकेंगे। याद रखें, कभी-कभी ठंडे दिमाग से लिए गए फैसले ही सबसे बेहतर होते हैं।

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