उत्तराखंड में एक नया शिक्षा मॉडल: मदरसा बोर्ड समाप्त, मुख्यमंत्री धामी की ऐतिहासिक पहल

देहरादून *उत्तराखण्ड में शिक्षा सुधार का नया अध्याय शुरू, मदरसा बोर्ड समाप्त कर बना नया शिक्षा मॉडल : मुख्यमंत्री धामी* *विभिन्न अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों को प्रदान किए गए मान्यता प्रमाण पत्र* ” *वन नेशन-वन एजुकेशन” की दिशा में उत्तराखण्ड की ऐतिहासिक पहल, अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण का शुभारंभधामी सरकार का बड़ा फैसला : सभी अल्पसंख्यक समुदायों […] The post उत्तराखण्ड में शिक्षा सुधार का नया अध्याय शुरू, मदरसा बोर्ड समाप्त कर बना नया शिक्षा मॉडल : मुख्यमंत्री धामी appeared first on Uttarakhand 24X7.

Jul 2, 2026 - 00:34
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उत्तराखंड में एक नया शिक्षा मॉडल: मदरसा बोर्ड समाप्त, मुख्यमंत्री धामी की ऐतिहासिक पहल
देहरादून *उत्तराखण्ड में शिक्षा सुधार का नया अध्याय शुरू, मदरसा बोर्ड समाप्त कर बना नया शिक्षा मॉ

उत्तराखंड में एक नया शिक्षा मॉडल: मदरसा बोर्ड समाप्त, मुख्यमंत्री धामी की ऐतिहासिक पहल

कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखंड सरकार ने मदरसा बोर्ड को समाप्त करके एक नया शिक्षा मॉडल तैयार किया है ताकि सभी अल्पसंख्यक समुदायों को समान शिक्षा के अवसर प्राप्त हो सकें। यह कदम "वन नेशन-वन एजुकेशन" की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

देहरादून में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एक नई शिक्षा व्यवस्था की शुरुआत की है जिसमें मदरसा बोर्ड को समाप्त कर दिया गया है। इस नए मॉडल के अंतर्गत, विभिन्न अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों को मान्यता प्रमाण पत्र प्रदान किए गए हैं। यह कदम उत्तराखंड में शिक्षा सुधार का एक नया अध्याय शुरू करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

वन नेशन-वन एजुकेशन के उद्देश्य से यह पहल शिक्षा क्षेत्र में समावेशिता को बढ़ावा देने के लिए की गई है। मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि यह व्यवस्था सभी अल्पसंख्यक समुदायों के लिए समान शैक्षणिक अवसर उपलब्ध कराने के लिए है। इस नए प्रावधान के तहत, छः अधिसूचित अल्पसंख्यक समुदायों के बच्चों को आधुनिक शिक्षा मिलने का आश्वासन दिया गया है।

शिक्षा और कौशल विकास का महत्व

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि "किताब-कॉपी और कौशल से अल्पसंख्यक समाज को सशक्त बनाया जाएगा, जिससे शिक्षा को विकास का आधार बनाया जाएगा।" उन्होंने यह भी बताया कि इस नई शिक्षा व्यवस्था में प्रशिक्षण और कौशल विकास पर जोर दिया जाएगा, ताकि युवा पीढ़ी रोजगार के अवसरों का अधिकतम लाभ उठा सके।

इस नई व्यवस्था का मुख्य लक्ष्य बच्चों के भविष्य पर ध्यान केंद्रित करना है, न कि केवल राजनीतिक लाभ उठाना। धामी ने कहा कि अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण की स्थापना से शिक्षा के मंदिरों में गुणवत्ता, पारदर्शिता और कौशल विकास को प्राथमिकता दी जाएगी। यह प्राधिकरण राज्य में शिक्षण गुणवत्ता को सुधारने के लिए काम करेगा।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप नई दिशा

उत्तराखंड सरकार की यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण एवं समावेशी शिक्षा को विस्तारित करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस नए मॉडल से शिक्षा के क्षेत्र में नए मानक स्थापित किए जाएंगे और बच्चों को एक समान अवसर मिलेंगे।

मुख्यमंत्री धामी की मंशा है कि इस उत्कृष्ट शिक्षा प्रणाली के माध्यम से उत्तराखंड को एक ऐसा राज्य बनाया जाए जो शिक्षा में सर्वोत्तम हो। यह पहल उस दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है जिसमें शिक्षा के क्षेत्र में सभी समुदायों को समान अवसर और संसाधन उपलब्ध कराए जाएंगे।

इसके अतिरिक्त, सभी संबंधित प्राधिकरणों को यह निर्देश दिया गया है कि वे इस परिवर्तन में सक्रिय रूप से भाग लें, ताकि तेजी से बदलाव लाया जा सके। इस नई प्रणाली के तहत, बच्चों को आधुनिकता के साथ-साथ अपनी धार्मिक आस्था का भी सम्मान करने का अवसर मिलेगा।

इस बदलाव से न केवल अल्पसंख्यक समुदाय बल्कि整个 उत्तराखंड में शिक्षा के स्तर में सुधार होगा। जैसा कि मुख्यमंत्री धामी ने कहा, "श्रेष्ठ उत्तराखंड के संकल्प को मजबूती देगा अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण।" इस प्रकार, उत्तराखंड की शिक्षा प्रणाली में यह नई पहल एक नई प्रेरणा और दिशा प्रदान करती है।

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इस प्रकार, यह निश्चित रूप से शिक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो भविष्य में और भी अच्छे परिणाम लाएगा। शिक्षा जीवन का आधार है और इस प्रकार के सुधार न केवल बच्चों के लिए बल्कि पूरे समाज के लिए लाभकारी सिद्ध होंगे।

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सादर, टीम खर्चा पानी

— प्रिया शर्मा

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