उत्तराखंड बीजेपी में छिड़ी बड़ी सियासी जंग: पूर्व CM त्रिवेंद्र और बलूनी के बीच गदरपुर में हुई मुलाकात
Uttarakhand Politics : 2027 विधानसभा चुनाव से पहले उत्तराखंड की राजनीति एक बार फिर गर्माती नजर आ रही है। राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतिन नवीन दो दिन बाद उत्तराखंड आने वाले हैं लेकिन इस से पहले ही उत्तराखंड में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। चर्चाएं तो यहां तक हो रही हैं कि प्रदेश में कभी भी […]
उत्तराखंड बीजेपी में छिड़ी बड़ी सियासी जंग: पूर्व CM त्रिवेंद्र और बलूनी के बीच गदरपुर में हुई मुलाकात
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कम शब्दों में कहें तो उत्तराखंड की सियासत में हलचल बढ़ गई है, जब आरबीआई गठन से पूर्व संघर्ष के संकेत मिले हैं। पार्टी की आंतरिक राजनीति में उथल-पुथल शुरू हो गई है।
उत्तराखंड की राजनीतिक गतिविधियाँ 2027 विधानसभा चुनाव की पूर्व संध्या पर एक बार फिर तीव्र हो गई हैं। बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतिन नवीन का उत्तराखंड दौरा केवल दो दिन दूर है, और इससे पहले ही राज्य की राजनीति में अजीब स्थिति दिखने को मिल रही है। चर्चाएँ चल रही हैं कि प्रदेश में พรรค के भीतर की संतुलन बिगड़ सकता है और एक बड़ा राजनीतिक बदलाव भी देखने को मिल सकता है।
अनिल बलूनी के बाद पूर्व CM त्रिवेंद्र पहुंचे गदरपुर
भुवन के अद्वितीय नेताओं में से एक, उत्तराखंड के पूर्व कैबिनेट मंत्री और बीजेपी विधायक अरविंद पांडे के विरोध के कारण चर्चाएँ गरमा गई हैं। पांडे की नाराजगी की खबरें लगातार आ रही हैं और उन्होंने पार्टी के भीतर संवाद करने की आवश्यकता को महसूस किया है। इसी गहमागहमी के बीच, गदरपुर स्थित पांडे के आवास पर बड़े नेताओं की आवाजाही बनी हुई है, जिससे सियासी चर्चाओं को और भी बल मिला है।
बलूनी और पूर्व CM त्रिवेंद्र रावत ने की अरविंद पांडे से मुलाकात
हाल ही में पौड़ी गढ़वाल से सांसद अनिल बलूनी गदरपुर पहुंचे थे, जहां बंद कमरे में उन्होंने पांडे के साथ करीब आधे घंटे तक बातचीत की। इसके बाद, पूर्व मुख्यमंत्री और हरिद्वार सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत ने भी पांडे से मुलाकात की, जिससे उत्तराखंड की राजनीति में छाए कई सवालों ने जन्म लिया है। क्या ये मुलाकातें बीजेपी के अंदर चल रहे मतभेदों का संकेत हैं?
मुलाकातों से हाई हुआ उत्तराखंड की सियासत का पारा
ये मुलाकातें गदरपुर के साथ ही उत्तराखंड की सियासत में पारा बढ़ाने का काम कर रही हैं। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि बीजेपी में आंतरिक रस्साकशी का संकेत है। क्या पार्टी के भीतर सबकुछ ठीक नहीं है? या फिर कोई बड़ी साजिश हो रही है? सियासी जानकार इस स्थिति को पार्टी की अंदरूनी खींचतान से जोड़कर देख रहे हैं।
कई विवादों को लेकर सुर्खियों में रह चुके हैं पांडे
अभी तक के घटनाक्रम में, विधायक अरविंद पांडे ने विभिन्न विवादों के कारण मीडिया में सुर्खियाँ बटोरी हैं। उनके खिलाफ कभी जमीन विवाद तो कभी भू-माफिया से संबंध रखने के आरोप लगे हैं। इसके अलावा, पांडे के बेटे पर भी कई आरोप लगे हैं, और उनके आवास पर सरकारी जमीन कब्जाने के मामलों ने राजनीतिक माहौल को और गर्म कर दिया है।
इस समय पांडे अपने सरकारी कर्तव्यों पर सख्त नजर बनाए हुए हैं। अब जब राष्ट्रीय अध्यक्ष का दौरा निकट है, तो दो प्रमुख नेताओं की पांडे के साथ हुई मुलाकात ये संकेत देती है कि बीजेपी में कुछ महत्वपूर्ण घटनाक्रम होने वाला है।
कुछ विश्लेषकों का अनुमान है कि बीजेपी के आंतरिक सर्वेक्षण में पांडे समेत कई विधायक फेल हो सकते हैं, और यही कारण है जो उन्हें मुखर बना रहा है। जबकि अन्य का मानना है कि बीजेपी में गुटबाजी बढ़ने लगी है और आने वाले समय में राजनीतिक घटनाक्रम में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
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आपकी आवाज: टीम खर्चा पानी, द्वारा: साक्षी शर्मा
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