हरिद्वार में ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ पर बड़ा मंथन, CM धामी और शिवराज ने साझा किया दृष्टिकोण
Haridwar News : उत्तराखंड की धर्मनगरी हरिद्वार स्थित श्री जी बैंक्वेट हॉल में ‘एक राष्ट्र एक चुनाव’ विषय पर भव्य संत समागम का आयोजन किया गया। हरिद्वार में ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ पर बड़ा मंथन हरिद्वार में आज ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ पर बड़ा मंथन हुआ। जिसमें मुख्य अतिथि के रूप में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री […]
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कम शब्दों में कहें तो, हरिद्वार में ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ पर भव्य संत समागम हुआ जिसमें उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, शिवराज सिंह चौहान और संत समाज के कई प्रमुख सदस्य शामिल हुए।
उत्तराखंड की धार्मिक नगरी हरिद्वार के श्री जी बैंक्वेट हॉल में ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ विषय पर एक महत्वपूर्ण समागम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम राज्य की राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है। इसमें मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रमुख रूप से भाग लिया और इस विचारधारा के महत्व एवं संभावनाओं पर चर्चा की।
‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ पर विचार विमर्श
कार्यक्रम में उपस्थित नेताओं ने ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ योजना पर विस्तृत चर्चा की, जिसका मुख्य उद्देश्य चुनावी प्रक्रिया को सरल और गति देना है। मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत विकास की नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ रहा है। उनके अनुसार, यह निर्णय प्रशासनिक सुधारों को लागू करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
शिवराज सिंह चौहान का विपक्ष पर हमला
शिवराज सिंह चौहान ने कार्यक्रम के दौरान अपने भाषण में विपक्ष, खासकर कांग्रेस पार्टी, पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस हमेशा से तुष्टीकरण और वोट बैंक की राजनीति में लिप्त रही है। वार्ता से यह स्पष्ट हुआ कि चौहान ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ की प्रक्रिया को सांप्रदायिक राजनीति से बाहर रखने की आवश्यकता को समझते हैं।
उन्होंने इतिहास का जिक्र करते हुए बताया कि किस प्रकार मुस्लिम लीग के दबाव में आकर कांग्रेस ने अपने सिद्धांतों को त्याग दिया था। इस संदर्भ में उन्होंने यह भी कहा कि ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ देश के विकास और संसाधनों की बचत का एक अत्यंत आवश्यक कदम है।
साधु-संतों का समर्थन
साधु-संतों ने भी इस विचारधारा का समर्थन किया और कहा कि यह कदम राष्ट्रहित में है। कार्यक्रम के दौरान भारी संख्या में साधु-संत भी मौजूद थे जिन्होंने ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ के महत्व पर जोर दिया। उनका मानना है कि चुनावी प्रक्रिया को सरल बनाना देश के हित में अत्यंत आवश्यक है।
इस प्रकार, हरिद्वार में हुए इस महत्वपूर्ण समागम ने ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ के मुद्दे पर दिशा-निर्देश और विचारों का आदान-प्रदान किया, जिससे यह स्पष्ट होता है कि इस प्रस्तावित नीति के पीछे राजनीति के बड़े खिलाड़ी एकजुट हो रहे हैं।
आने वाले दिनों में इस विषय पर और चर्चा की संभावना है, जिससे यह स्पष्ट होगा कि क्या भारत एकजुट होकर इस तरह के चुनावी सुधारों को अपनाने के लिए तैयार है, जो संसाधनों की बचत करे और प्रशासनिक प्रक्रिया को अधिक कुशल बनाए।
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टीम खर्चा पानी
- निधि शर्मा
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