HARELA 2026: उत्तराखंड में धूमधाम से मनाया जा रहा लोकपर्व हरेला, मुख्यमंत्री धामी ने दी शुभकामनाएं

देहरादून:  HARELA 2026  आज हरेला है. हरेला उत्तराखंड का प्रकृति को समर्पित लोकपर्व है. ये पर्व प्रकृति के संरक्षण और समृद्धि के साथ-साथ धार्मिक रूप से मां पार्वती और भगवान शिव के मिलन का प्रतीक भी माना जाता है. आज सुबह 9 दिन पहले टोकरियों में बोए गए हरेले को काटा गया. हरेले के पत्तों […] The post HARELA 2026 : उत्तराखंड में धूमधाम से मनाया जा रहा है लोकपर्व हरेला, CM धामी ने दी शुभकामनाएं appeared first on Page Three.

Jul 17, 2026 - 00:34
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HARELA 2026: उत्तराखंड में धूमधाम से मनाया जा रहा लोकपर्व हरेला, मुख्यमंत्री धामी ने दी शुभकामनाएं
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HARELA 2026: उत्तराखंड का प्रकृति प्रेमी लोकपर्व जोर-शोर से मनाया जा रहा है

कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखंड में हरेला पर्व का आयोजन बड़े धूमधाम से हो रहा है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस अवसर पर सभी को शुभकामनाएं दी हैं।

देहरादून: HARELA 2026 आज हरेला है, जो उत्तराखंड का एक विशेष लोकपर्व है। यह पर्व मुख्यतः प्रकृति के संरक्षण और समृद्धि के लिए समर्पित है। धार्मिक दृष्टि से भी इसे मां पार्वती और भगवान शिव के मिलन का प्रतीक माना जाता है।

हरेले का महत्व

उत्तराखंड के लोग इस पर्व को अत्यधिक श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाते हैं। हरेला पर्व का अर्थ होता है 'हरियाली', जिसका संबंध पर्यावरण के संरक्षण से है। इस दिन लोग अपने घरों के आंगनों में हरेले के पौधे लगाते हैं, जिसे वे नौ दिन पहले टोकरियों में बोकर तैयार करते हैं। इस वर्ष, सुबह 9 दिन पहले बोए गए हरेले को काटा गया, जिसे पूरे उत्साह के साथ मनाया गया।

मुख्यमंत्री की शुभकामनाएं

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सभी नागरिकों को हरेले की शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने ट्वीट कर कहा, "हरेला पर्व हर वर्ष की तरह इस बार भी हमें प्रकृति के संरक्षण का संदेश देने आया है। हम सभी को मिलकर अपने पर्यावरण की रक्षा करनी चाहिए।" उनके इस संदेश ने पर्व के महत्व को और अधिक बढ़ा दिया है।

परंपराएं और उत्सव

उत्तराखंड के पर्व हरेला के अंतर्गत कई परंपराएं और उत्सव होते हैं, जिसमें स्थानीय लोग एकत्र होकर गीत गाते हैं और नृत्य करते हैं। यह पर्व परिवारों के लिए एक साथ आने का मौका प्रदान करता है, जिसमें सभी लोग एक-दूसरे को बधाई देते हैं और हरेले के पौधों को एक-दूसरे के साथ साझा करते हैं।

इस वर्ष हरेला पर्व की खास बात यह है कि इसे केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि हमारे पर्यावरण की सुरक्षा के लिए भी मनाया जा रहा है। स्थानीय लोग इसे मनाते समय यह सुनिश्चित करते हैं कि वह वृक्षारोपण को बढ़ावा दें और अपने आस-पास की हरियाली को बनाए रखें।

पर्यावरण संरक्षण का संदेश

हरेला पर्व के माध्यम से उत्तराखंड सरकार ने पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया है। इस पर्व का उद्देश्य न केवल प्रकृति के प्रति हमारी जिम्मेदारियों को समझाना है, बल्कि हमारे आसपास की प्राकृतिक सुंदरता को भी बनाए रखना है।

हरेला पर्व की परंपराओं को देखकर यह स्पष्ट होता है कि उत्तराखंड के लोग अपने पर्यावरण को कितना महत्व देते हैं। इस पर्व को मनाना सिर्फ एक उत्सव नहीं है, बल्कि यह हमारी सांस्कृतिक धरोहर का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

इस पर्व के मौक पर लोग पारंपरिक व्यंजन बनाते हैं और एक-दूसरे के साथ मिलकर खुशियां साझा करते हैं। यह पर्व एकता और भाईचारे का प्रतीक भी है, जो सभी को एक साथ लाता है।

हरेला पर्व का यह उत्सव न केवल उत्तराखंड के संस्कृति को दर्शाता है, बल्कि यह हमें यह भी याद दिलाता है कि हमें अपने प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण कैसे करना चाहिए।

अंत में, हम उम्मीद करते हैं कि यह पर्व हमें न केवल खुशियां लाए, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के हमारे प्रयासों को भी और मजबूत बनाएं।

For more updates, visit Kharchaa Pani. Team Kharchaa Pani, Anjali Sharma

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