हरिद्वार में विहिप मार्गदर्शक बैठक: संतों ने सीएम धामी को बताया सनातन के रक्षक
Haridwar News : मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को भूपतवाला, हरिद्वार में आयोजित विश्व हिन्दू परिषद के केन्द्रीय मार्गदर्शक मंडल की बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि विश्व हिन्दू परिषद पिछले छह दशकों से सेवा, संस्कार, सामाजिक समरसता एवं राष्ट्रीय चेतना के सुदृढ़ीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। उन्होंने कहा कि परिषद […]
हरिद्वार में विहिप मार्गदर्शक बैठक: संतों ने सीएम धामी को बताया सनातन के रक्षक
Breaking News, Daily Updates & Exclusive Stories - Kharchaa Pani
कम शब्दों में कहें तो हरिद्वार में आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक में संतों ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की प्रशंसा करते हुए उन्हें सनातन धर्म का रक्षक बताया। इस बैठक में विश्व हिन्दू परिषद (विहिप) के केंद्रीय मार्गदर्शक मंडल की चर्चा हुई।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को भूपतवाला स्थित विहिप की केंद्रीय मार्गदर्शक मंडल की बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि विहिप ने पिछले छह दशकों में सेवा, संस्कार, सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय चेतना को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि विहिप केवल एक संगठन नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और सनातन मूल्यों के संरक्षण का सशक्त माध्यम है।
संत बोले – सीएम धामी सनातन के रक्षक
मुख्यमंत्री ने कहा कि "वर्तमान में देश और दुनिया तेजी से बदल रहे हैं। ऐसे समय में हमें अपनी सांस्कृतिक जड़ों और मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता बनाए रखनी चाहिए।" उन्होंने कहा कि सामाजिक एकता और समरसता को प्राथमिकता देते हुए, सभी वर्गों से राष्ट्र निर्माण में सक्रिय योगदान देने की अपील की।
उत्तराखण्ड को आध्यात्मिक राजधानी के रूप में स्थापित करने का कार्य
धामी ने यह भी बताया कि "प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत अपनी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत के पुनर्जागरण की दिशा में आगे बढ़ रहा है।" अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर, काशी विश्वनाथ धाम और महाकाल लोक जैसी परियोजनाओं ने देश की सांस्कृतिक चेतना को नई ऊर्जा दी है। उत्तराखण्ड को विश्व की आध्यात्मिक राजधानी के रूप में स्थापित करने के लिए राज्य सरकार कार्य कर रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि "हम केदारखण्ड और मानसखण्ड क्षेत्रों में प्राचीन मंदिरों के पुनर्विकास के साथ-साथ हरिपुर कालसी स्थित यमुनातीर्थ के पुनरुद्धार और हरिद्वार-ऋषिकेश कॉरिडोर जैसी परियोजनाओं पर तेजी से कार्य कर रहे हैं।" इनका उद्देश्य उत्तराखण्ड की आध्यात्मिकता को और भी मजबूत करना है।
सरकार उत्तराखण्ड की सांस्कृतिक पहचान के संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध
राज्य सरकार उत्तराखण्ड की सांस्कृतिक पहचान, आध्यात्मिक विरासत और मूल स्वरूप के संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है। इस उद्देश्य से, धर्मांतरण विरोधी कानून लागू किया गया है, जिससे सभी नागरिकों को समान अधिकार मिलते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि "हमने भू-कानून को सख्त करते हुए प्रदेश की भूमि और संस्कृति की सुरक्षा की दिशा में कदम उठाए हैं।" इसके अलावा, अतिक्रमण के खिलाफ अभियान चलाकर सरकारी भूमि को मुक्त कराया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि युवाओं को सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने के लिए दून विश्वविद्यालय में "सेंटर फॉर हिन्दू स्टडीज" स्थापित किया गया है, जहां भारतीय संस्कृति और सभ्यता से संबंधित विषयों पर शोध किया जाएगा। उन्होंने निष्कर्ष निकाला कि उत्तराखण्ड केवल एक भौगोलिक इकाई नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना का केंद्र है।
बैठक में, विश्व हिन्दू परिषद के मार्गदर्शक मंडल से जुड़े संतों ने मुख्यमंत्री धामी को धर्मरक्षक बताकर उन्हें आशीर्वाद दिया, जिससे यह स्पष्ट होता है कि मुख्यमंत्री का प्रयास धर्म और संस्कृति के संरक्षण की दिशा में कितना महत्वपूर्ण है।
इस प्रकार, हरिद्वार में हुई यह बैठक न केवल मुख्यमंत्री धामी की प्रतिज्ञा को उजागर करती है, बल्कि भविष्य में उत्तराखण्ड के विकास और सांस्कृतिक संरक्षण की दिशा में भी महत्वपूर्ण संकेत देती है।
For more updates, visit Kharchaa Pani.
Team Kharchaa Pani - Priya Verma
What's Your Reaction?