विपक्ष की CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग और देशद्रोह के मुकदमे की मांग

देश की राजनीति में एक बार फिर से बड़ा भूचाल आ गया है। उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल और नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने शनिवार को एक अहम बयान जारी कर बताया कि नई दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सार्वजनिक रूप से जन महाभियोग का प्रस्ताव लाया गया है। … The post विपक्ष की CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग और देशद्रोह के मुकदमे की मांग appeared first on Khabar Uttarakhand - Uttarakhand News.

Nov 1, 2026 - 00:34
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विपक्ष की CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग और देशद्रोह के मुकदमे की मांग

देश की राजनीति में एक बार फिर से बड़ा भूचाल आ गया है। उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल और नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने शनिवार को एक अहम बयान जारी कर बताया कि नई दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सार्वजनिक रूप से जन महाभियोग का प्रस्ताव लाया गया है। 31 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में ‘इंडिया’ गठबंधन के सांसद और देश के आम नागरिक बड़ी संख्या में एकत्र हुए। गठबंधन के नेताओं का कहना है कि वे देश की 60% से अधिक आबादी का प्रतिनिधित्व करते हैं।

नई दिल्ली में विपक्ष ने चलाया जन महाभियोग

नई दिल्ली में एकत्र हुए ‘इंडिया’ गठबंधन के सांसदों और नागरिकों ने मॉक संसद के जरिए CEC hj जन महाभियोग चलाया उन्होंने एक स्वर में यह प्रस्ताव पारित किया है कि देश की जनता के साथ हुए इस गंभीर विश्वासघात के लिए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर देश के मौजूदा कानूनी ढांचे के तहत न्यायालय में देशद्रोह का मुकदमा चलाया जाना चाहिए। इस दौरान नेताओं ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 326 में दिए गए सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार (Universal Adult Franchise) के प्रति अपनी अटूट प्रतिबद्धता दोहराई। साथ ही, गंभीर चिंता जताई कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के कामकाज के तरीकों से देश के नागरिकों के इस मौलिक अधिकार पर बहुत बड़ा खतरा मंडरा रहा है। इसी के चलते CEC के खिलाफ गंभीर आरोपों के तहत महाभियोग का प्रस्ताव पारित किया।

मुख्य चुनाव आयुक्त पर लगाए गए प्रमुख आरोप

  • वोट चोरी की साजिश का आरोप: कांग्रेस नेताओं और गठबंधन का आरोप है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने लोकसभा और विधानसभा चुनावों में वोट चोरी करने के लिए सत्तारूढ़ दल की एक कुटिल और आपराधिक साजिश की देखरेख की है और वे खुद भी इसमें शामिल रहे हैं। आरोप है कि उन्होंने भाजपा को मतदाता सूचियों तक सीधी पहुंच दी, मतदाताओं के नाम अपनी मर्जी से जोड़े और हटाए, और चुनाव परिणामों में हेरफेर की पूरी छूट दी। इसे संविधान और कानून के शासन का खुला उल्लंघन तथा देशद्रोह जैसा कृत्य बताया गया है।
  • स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) में गड़बड़ी: CEC ज्ञानेश कुमार पर मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के जरिए भारी काट-छांट करने का गंभीर आरोप है। गठबंधन का दावा है कि इस प्रक्रिया के तहत जानबूझकर 13.2 करोड़ मतदाताओं के नाम सूची से हटवाए गए, जिससे वे अपने मताधिकार से वंचित हो गए। इसे प्राकृतिक न्याय का खुला उल्लंघन बताया गया है।
  • नियमों में गैरकानूनी संशोधन: आरोप है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने संसद की जानकारी या सहमति के बिना ‘Registration of Electors’ Rules, 1960’ के फॉर्म 6 में गैरकानूनी बदलाव किए। इसके जरिए पहली बार मतदाता बनने वाले युवाओं का पंजीकरण रोकने और उनका वोट का अधिकार छीनने की साजिश रची गई।
  • सॉफ्टवेयर के जरिए केंद्रीयकरण: आरोप लगाया गया है कि ‘ERONET/ECINET’ सॉफ्टवेयर का दुरुपयोग करके स्थानीय निर्वाचन अधिकारियों (EROs) को पात्र मतदाताओं के नाम जोड़ने से रोका गया और मतदाता सूचियों पर पूरा नियंत्रण गैरकानूनी तरीके से भारत निर्वाचन आयोग (ECI) के हाथों में केंद्रित कर लिया गया।
  • सहयोगियों को बाहर रखने का आरोप: मुख्य चुनाव आयुक्त पर आयोग के अन्य दो सदस्यों को निर्णय प्रक्रिया से बाहर रखने का भी आरोप है। इसके चलते दोनों चुनाव आयुक्तों को आधिकारिक रिकॉर्ड में कम से कम 14 आपत्तियां दर्ज करानी पड़ी थीं।
  • विपक्ष के प्रति पक्षपात और गंभीर व्यक्तिगत लाभ के आरोप: नेताओं ने आरोप लगाया कि CEC ने स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने के अपने संवैधानिक दायित्व को ताक पर रख दिया। उन्होंने बार-बार विपक्ष पर हमले किए, उनकी शिकायतें सुनने से इनकार किया और विपक्षी नेताओं को अपना पक्ष रखने से रोका। जब विपक्षी नेताओं को चुनाव लड़ने से रोका गया और उनके साथ बर्बरता हुई, तब वह मूकदर्शक बने रहे। इसके बदले में CEC के परिवार के कई सदस्यों को प्रतिष्ठित और लाभकारी पदों पर नियुक्तियां व अन्य आर्थिक लाभ मिलने के आरोप भी लगाए गए हैं।

कानूनी सुरक्षा समाप्त करने और मुकदमे की मांग

पार्टी नेताओं का कहना है कि दिसंबर 2023 में केंद्र सरकार द्वारा मुख्य चुनाव आयुक्त को दी गई कानूनी सुरक्षा का एकमात्र उद्देश्य उनके इन आपराधिक कृत्यों को बचाना था। इसलिए इस कानूनी सुरक्षा को तत्काल समाप्त किया जाना चाहिए।

जन महाभियोग और रैली, चुनाव में नकारे गए दलो का जमावड़ा: महेंद्र भट्ट

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रदेश अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट ने विपक्ष द्वारा आयोजित किए जा रहे ‘जन महाभियोग’ और 1 नवंबर को होने वाली महारैली को “चुनाव में बुरी तरह हारी और जनता द्वारा पूरी तरह नकारी गई पार्टियों की हताशा और निराशा का जमावड़ा” करार दिया है। भट्ट ने कहा कि “जिन्होंने कभी संसद को सड़क बनाने की कोशिश की, आज वे ही सड़क पर ‘संसद’ का नाटक रच रहे हैं।” उन्होंने आगे आरोप लगाया कि ये वही लोग हैं जिन्होंने कथित रूप से “वोट का अधिकार घुसपैठियों के हाथों में सौंपकर देश की सुरक्षा को खतरे में डाला था।” उन्होंने कहा, “आज यही लोग बेशर्मी से देश और वोट बचाने का ढोंग कर रहे हैं।” प्रदेश भाजपा अध्यक्ष ने विपक्ष के इस कदम को लोकतांत्रिक और संवैधानिक संस्थाओं को बदनाम करने की एक गहरी साजिश का हिस्सा बताया। भट्ट ने कहा, “यह बेहद निंदनीय है कि यह रैली 1984 के सिख दंगों की बरसी पर आयोजित की जा रही है, और इसके आयोजक उसी नरसंहार के आरोपी हैं।” उत्तराखंड से कांग्रेस कार्यकर्ताओं की भागीदारी के दावों पर उन्होंने टिप्पणी की कि प्रदेश में कांग्रेस का न तो कोई संगठन है और न ही जनता का समर्थन। उन्होंने कहा, “लगातार चुनाव हारने के बाद कांग्रेस को अभी दिल्ली और देहरादून दोनों बहुत दूर हैं।”

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