राजनैतिक दलों के साथ SIR पर बैठक: 24 लाख मतदाताओं को नोटिस, 15 लाख मामलों की सुनवाई संपन्न
मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. बीवीआरसी पुरुषोत्तम के निर्देशों पर अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. विजय कुमार जोगदंडे की अध्यक्षता में शनिवार को मान्यता प्राप्त राजनैतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक आयोजित की गई। राजनैतिक दलों को दी SIR पर विस्तृत जानकारी बैठक में विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम को लेकर विस्तृत चर्चा की गई। साथ … The post SIR पर सियासी दलों के साथ बैठक, 24 लाख मतदाताओं को नोटिस, 15 लाख मामलों में सुनवाई पूरी appeared first on Khabar Uttarakhand - Uttarakhand News.
राजनैतिक दलों के साथ SIR पर बैठक: 24 लाख मतदाताओं को नोटिस, 15 लाख मामलों की सुनवाई संपन्न
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कम शब्दों में कहें तो शनिवार को मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. बीवीआरसी पुरुषोत्तम के निर्देश पर अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. विजय कुमार जोगदंडे की अध्यक्षता में मान्यता प्राप्त राजनैतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया गया। इस बैठक में 24 लाख मतदाताओं को नोटिस जारी करने और 15 लाख मामलों की सुनवाई की प्रगति पर चर्चा की गई।
राजनैतिक दलों को दी SIR पर विस्तृत जानकारी
बैठक में SIR यानी स्पेशल इन्फॉर्मेशन रिपोर्ट पर विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम को लेकर विस्तार से चर्चा की गई। इस संदर्भ में राजनैतिक दलों के प्रतिनिधियों को सूचित किया गया कि ड्राफ्ट रोल में कुल 71 लाख मतदाताओं का समावेश है, जिनमें से 24 लाख मतदाता अनमैप्ड और विसंगति के मामले में नोटिस जारी किए गए हैं। इस प्रक्रिया के दौरान विभिन्न राजनैतिक दलों से सुझाव भी प्राप्त किए गए।
15 लाख नोटिसों पर हो चुकी सुनवाई
उप मुख्यमंत्री डॉ. विजय कुमार जोगदंडे ने जानकारी दी कि 24 लाख मतदाताओं में से 15 लाख से अधिक नोटिसों पर सुनवाई पूर्ण हो चुकी है, जबकि शेष मामलों पर कार्रवाई जारी है। उन्होंने आह्वान किया कि SIR प्रक्रिया को पूरी पारदर्शिता के साथ संपादित किया जा रहा है।
इसके अलावा, राजनैतिक दलों को इस बैठक में बताया गया कि प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी बनाने के लिए 9 वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों की पर्यवेक्षण अधिकारी के रूप में अतरिक्त तैनाती की गई है। यह कदम सभी संबंधित पक्षों के लिए एक सकारात्मक संकेत है कि निर्वाचन प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी को रोकने के लिए सख्त उपाय किए जा रहे हैं।
राजनीतिक दलों की भागीदारी और सुझाव लेने की यह प्रक्रिया भविष्य में लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को मजबूती प्रदान करेगी। इसके साथ ही, मतदाता जागरूकता के प्रति सभी राजनीतिक संगठनों को एकजुट होकर कार्य करने की आवश्यकता है ताकि आने वाले चुनावों में निष्पक्षता और पारदर्शिता बनी रहे।
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टीम ख़र्चा पानी, सिमा शर्मा
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