कण्वाश्रम की गौरवगाथा: ‘भरत से भारतवर्ष’ ने राष्ट्रीय स्तर पर जीता प्रथम पुरस्कार
कण्वाश्रम की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को देशभर में पहचान दिलाने वाली पुस्तक ‘कण्वाश्रम भरत से भारतवर्ष’ ने राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी उपलब्धि हासिल की है। पुस्तक को फेडरेशन ऑफ इंडियन पब्लिशर्स एवं मेंबर्स ऑफ इंटरनेशनल पब्लिशर्स एसोसिएशन, जिनेवा की ओर से आयोजित 46वें पुरस्कार समारोह में आर्ट एवं कॉफी टेबल बुक श्रेणी में देशभर … The post राष्ट्रीय मंच पर चमका कण्वाश्रम, ‘भरत से भारतवर्ष’ को मिला प्रथम पुरस्कार appeared first on Khabar Uttarakhand - Uttarakhand News.
कण्वाश्रम की गौरवगाथा: ‘भरत से भारतवर्ष’ ने राष्ट्रीय स्तर पर जीता प्रथम पुरस्कार
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कम शब्दों में कहें तो, कण्वाश्रम की सांस्कृतिक विरासत को उजागर करने वाली पुस्तक ‘कण्वाश्रम भरत से भारतवर्ष’ ने राष्ट्रीय मंच पर अपनी पहचान बनाई है। इस पुस्तक को हाल ही में फेडरेशन ऑफ इंडियन पब्लिशर्स एवं इंटरनेशनल पब्लिशर्स एसोसिएशन के 46वें पुरस्कार समारोह में आर्ट और कॉफी टेबल बुक श्रेणी में प्रथम पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
कण्वाश्रम-भरत से भारतवर्ष को मिला राष्ट्रीय स्तर पर प्रथम पुरस्कार
इस उल्लेखनीय उपलब्धि की जानकारी कोटद्वार विधायक ऋतु खण्डूडी भूषण और पुस्तक के लेखक, वरिष्ठ पत्रकार मनोज ईष्टवाल ने माल गोदाम रोड स्थित अपने कैंप कार्यालय में आयोजित एक प्रेस वार्ता में साझा की। विधायक भूषण ने बताया कि इस पुस्तक का लोकार्पण पिछले 19 जुलाई को कण्व नगरी कोटद्वार में किया गया था। महज एक माह के भीतर, यह पुस्तक राष्ट्रीय स्तर पर ध्यान आकर्षित करने में सफल रही और एक प्रतिष्ठित पुरस्कार प्राप्त किया।
उन्होंने कहा कि “उत्तराखंड राज्य गठन के बाद पहली बार कण्वाश्रम पर आधारित किसी कॉफी टेबल बुक को राष्ट्रीय स्तर पर प्रथम पुरस्कार मिलना कोटद्वार के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे उत्तराखंड के लिए गर्व का विषय है।”
प्रकाशन की गुणवत्ता का विशेष उल्लेख
ऋतु खण्डूडी भूषण ने बताया कि पुस्तक का प्रकाशन नई दिल्ली स्थित ‘किताब वाले’ द्वारा किया गया है। इस पुस्तक की विषयवस्तु, शोध, प्रस्तुति और प्रकाशन गुणवत्ता को ध्यान में रखते हुए ज्यूरी ने देशभर से आए लगभग 5000 पुस्तकों में से ‘कण्वाश्रम भरत से भारतवर्ष’ को प्रथम पुरस्कार के लिए चुना। यह सम्मान कण्वाश्रम के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और पौराणिक महत्व को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में सहायक साबित होगा।
मनोज ईष्टवाल का शोध कार्य
पुस्तक के लेखक मनोज ईष्टवाल ने बताया कि उन्होंने कण्वाश्रम पर शोध का कार्य 1989 से शुरू किया। इसके बाद, 1992 से 1995 तक कण्वाश्रम पर डॉक्यूमेंट्री फिल्म बनाते हुए उन्होंने ‘शकुंतला’ नृत्य-नाटिका का निर्माण किया, जो दूरदर्शन लखनऊ और दिल्ली से प्रसारित हुई।
ईष्टवाल ने अपनी प्रेरणा 1988 में ‘फाउंडर ऑफ गढ़वाल राइफल्स’ पर डॉक्यूमेंट्री बनाने के दौरान प्राप्त की। उस समय, उन्होंने कण्वाश्रम के ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्व पर चर्चा की, जिससे उनके शोध कार्य को आगे बढ़ाने की प्रेरणा मिली।
कण्वाश्रम का महत्व
कण्वाश्रम भारतीय संस्कृति का एक अनमोल हिस्सा है, जो इतिहास, परंपरा और संस्कृति का अद्वितीय मेल है। यह वह स्थान है जहाँ पौराणिक कथाओं के अनुसार महर्षि कण्व ने जीवन व्यतीत किया था। इस पुस्तक ने सिर्फ कण्वाश्रम की पहचान को बढ़ाया है, बल्कि यह युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत भी बनी है। यह प्रमाणित करती है कि कैसे एक पुस्तक किसी स्थान की सांस्कृतिक धरोहर को पहचान दिला सकती है।
इस उपलब्धि के साथ, कण्वाश्रम न केवल सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण बना है, बल्कि भारतीय साहित्य और कला के क्षेत्र में भी एक महत्वपूर्ण स्थान बना रहा है।
युवाओं से अपील
ऋतु खण्डूडी भूषण ने युवा पीढ़ी को आह्वान किया कि वे कण्वाश्रम की विरासत को जानें और समझें। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में कण्वाश्रम का महत्व केवल एक स्थल के रूप में नहीं, बल्कि हमारे परंपराओं और इतिहास में भी महत्वपूर्ण है।
इस प्रकार, कण्वाश्रम की कहानी सिर्फ एक इतिहास नहीं, बल्कि हमारे सांस्कृतिक मूल्यों की भी गहराई से जुड़ी हुई है। यह पुस्तक कण्वाश्रम के इतिहास को जीवंत करने के साथ-साथ हमारे युवाओं को एक नई दिशा भी प्रदान करती है।
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टीम खर्चा पानी - प्रिया शर्मा
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