उत्तराखंड के वीर पूर्व सैनिक प्रेम राम की दर्दनाक कहानी: घर बचाने की जद्दोजहद
सोशल मीडिया पर एक बुजुर्ग व्यक्ति की फोटो वायरल हो रही है। बता दें कि ये 3 युद्ध जीतने वाले देश के वीर सीपाही हैं। लेकिन आज इस सिपाही की आंखों में आपको लाचारी के आंसू नजर आ रहे होंगे। जिस देश के लिए इस बहादुर जवान ने अपनी जवानी कुर्बान कर दी, आज उसी … The post तीन युद्ध लड़ चुका उत्तराखंड का ये पूर्व सैनिक, अब बुढ़ापे में लड़ रहा घर बचाने की लड़ाई appeared first on Khabar Uttarakhand - Uttarakhand News.
उत्तराखंड के वीर पूर्व सैनिक प्रेम राम की दर्दनाक कहानी: घर बचाने की जद्दोजहद
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कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखंड के पूर्व सैनिक प्रेम राम की स्थिति अत्यंत दयनीय है। तीन युद्धों का सामना करने वाले इस बहादुर सिपाही को अब अपने घर को बचाने के लिए सरकारी अनियंत्रण का सामना करना पड़ रहा है।
सोशल मीडिया पर एक बुजुर्ग व्यक्ति की फोटो वायरल हो रही है, जिसमें प्रेम राम ने अपनी आंखों में लाचारी और संघर्ष की कहानी बयां की है। जिस देश के लिए उन्होंने अपने जीवन के बहुमूल्य साल कुर्बान किए, आज उसी देश का सिस्टम उनके घर की रक्षा नहीं कर पा रहा है। आइए जानते हैं इस फौजी की बेबसी की कहानी, जिसने अपने घर को बचाने के लिए दर-दर की ठोकरें खाई हैं।
भारतीय सेना के पूर्व सैनिक प्रेम राम
प्रेम राम एक साधारण बुजुर्ग नहीं हैं; वह भारतीय सेना के एक साहसी पूर्व सैनिक हैं, जिन्होंने 1965 के युद्ध, 1967 की जंग और 1971 के ऐतिहासिक भारत-पाकिस्तान युद्ध में देश के लिए महान सेवा की। उनके सीने पर सजते मेडल और उनके चेहरे पर जीवन के अनुभव की झुर्रियां इस बात की गवाह हैं कि उन्होंने कठिन परिस्थितियों का सामना किया है।
बुढ़ापे में घर को बचाने के लिए लड़ाई
आज प्रेम राम का जीवन बुढ़ापे में संघर्ष और चुनौतियों से भरा हुआ है। वह अपने परिवार के साथ जब जिलाधिकारी के सामने पेश हुए, तो उनकी व्यथा से सभी की आंखों में आंसू आ गए।
प्रेम राम बागेश्वर के कांडा क्षेत्र के ढूंगा पंत बांसतोली गांव के निवासी हैं। उनके घर के ठीक ऊपर एक खड़िया की खदान है, जो उनके घर के लिए खतरा बन गई है। इस खदान के कारण वहां पानी भर गया है, जिससे जमीन अंदर खोखली हो रही है और दीवारों में दरारें आ गई हैं।
खड़िया की खदान के चलते धंस रही जमीन
हाल ही में प्रेम राम के बेटे ललित मोहन और सेकेंद्र प्रसाद के घर भी इसी समस्या के कारण बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। दीवारों में आई दरारें यह रेखांकित करती हैं कि किसी भी समय एक बड़ा हादसा हो सकता है। यह स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि प्रेम राम को अपनी पत्नी के साथ अपनी बेटी सरस्वती देवी के घर में शरण लेनी पड़ी।
पूर्व सैनिक ने प्रशासन पर आरोप लगाया
प्रेम राम ने बताया कि उन्होंने अपनी समस्या के समाधान के लिए कई बार शासन और प्रशासन का दरवाजा खटखटाया। लेकिन उनके किसी भी ज्ञापन या शिकायत पर ध्यान नहीं दिया गया। उन्होंने अधिकारियों के दफ्तरों के चक्कर काटे, लेकिन एक सुनवाई भी नहीं हुई।
आत्महत्या की दी चेतावनी
जब प्रेम राम का धैर्य जवाब दे गया, तो उन्होंने जिलाधिकारी के सामने अल्टीमेटम दिया। उन्होंने कहा कि यदि उनके घर को बचाने के लिए तुरंत कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो वह आत्महत्या करने के लिए मजबूर होंगे। यह स्थिति न केवल एक पूर्व सैनिक की बेबसी को दर्शाती है, बल्कि यह भी बताती है कि कब तक हमारे देश के बहादुर सिपाहियों को ऐसे हालात का सामना करना पड़ेगा।
यह कहानी एक संवेदनशील मुद्दे को उजागर करती है, जिसे हमें अपने समाज और सरकार के समक्ष लाना चाहिए ताकि इस वीर की आवाज को सुना जा सके। जनहित में यह अत्यंत आवश्यक है कि हम ऐसे मुद्दों पर ध्यान दें और पूर्व सैनिकों के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझें।
इस प्रकार, प्रेम राम की कहानी हमें याद दिलाती है कि हमारी सरकार को अपने वीर जवानों की कुर्बानियों का सम्मान करना चाहिए और उनकी समस्याओं का समाधान निकालना चाहिए।
फिरसे एक बार, हम सभी को प्रेम राम जैसे नायकों के प्रति सम्मान और सहायता की भावना रखनी चाहिए।
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Team Kharchaa Pani - Sneha Sharma
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