नौकरी जिहाद का नया बवाल! 1996 में समाप्त हुए पदों पर 2026 तक नियमों का उल्लंघन
उत्तराखंड में अब कथित “नौकरी जिहाद” का मामला सामने आया है। अधिवक्ता विकेश सिंह नेगी ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को पत्र भेजकर राज्य में 28 साल पुरानी नियुक्तियों की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। 28 फरवरी 1996 में खत्म हुए उर्दू अनुवादक-कनिष्ठ लिपिक के पद: नेगी विकेश सिंह नेगी का आरोप है …
नौकरी जिहाद का नया बवाल! 1996 में समाप्त हुए पदों पर 2026 तक नियमों का उल्लंघन
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कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखंड में "नौकरी जिहाद" का नया मामला सामने आया है, जहाँ अधिवक्ता विकेश सिंह नेगी ने पुरानी नियुक्तियों की जांच की मांग की है।
उत्तराखंड में, हाल ही में एक नया विवाद उठ खड़ा हुआ है, जिसे "नौकरी जिहाद" के नाम से जाना जा रहा है। अधिवक्ता विकेश सिंह नेगी ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को एक पत्र भेजा है, जिसमें उन्होंने राज्य की 28 साल पुरानी नियुक्तियों की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। उनका आरोप है कि 28 फरवरी 1996 को समाप्त हुए उर्दू अनुवादक-कनिष्ठ लिपिक के पदों पर अब तक कई लोग कार्यरत हैं, जबकि इन पदों की वैधता समाप्त हो चुकी है।
28 फरवरी 1996 को समाप्त हुए पदों का मुद्दा
विकेश सिंह नेगी के अनुसार, उत्तर प्रदेश सरकार ने 1994-95 में अस्थायी उर्दू अनुवादक-कनिष्ठ लिपिक के पदों का सृजन किया था, जो 28 फरवरी 1996 को समाप्त हो गए। इसके बावजूद, कई विभागों में ये पद आज भी भरे हुए हैं। नेगी का कहना है कि राज्य में सैकड़ों प्रशिक्षित बेरोजगार युवा हैं, जो इन पदों पर चयनित हो सकते थे। यह स्थिति न केवल बेरोजगारी को बढ़ावा देती है, बल्कि सड़कों पर संघर्ष कर रहे युवाओं के लिए भी निराशाजनक है।
पूर्व मुख्यमंत्रियों से शिकायतें
नेगी ने कहा है कि उन्होंने सिर्फ वर्तमान मुख्यमंत्री से ही नहीं, बल्कि पूर्व मुख्यमंत्रियों से भी इस मामले में शिकायत की थी, लेकिन उनकी शिकायतें अनसुनी रह गईं। अब उन्हें उम्मीद है कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी इस मुद्दे पर सख्त कार्रवाई करेंगे और एक निष्पक्ष जांच का आदेश देंगे। नौकरी जिहाद के खिलाफ उठ खड़ी आवाजें अब एक महत्वपूर्ण मांग बन चुकी हैं।
नौकरी खत्म होने के बाद भी कर्मचारी बरकरार
विकेश नेगी का आरोप है कि पदों की समाप्ति के बाद भी अनेक कर्मचारी उच्चाधिकारियों के संरक्षण में अभी भी नौकरी कर रहे हैं और प्रमोशन का लाभ ले रहे हैं। नेगी ने कहा कि वह इस मामले में कई बार अपनी शिकायतें दर्ज करवा चुके हैं, लेकिन कार्रवाई के कोई संकेत नहीं मिले। उनकी मांग है कि मुख्यमंत्री इस मामले की निष्पक्ष जांच कराकर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करें।
मुख्यमंत्री से की गई प्रमुख मांगें
- वर्तमान में कार्यरत सभी संबंधित उर्दू अनुवादक और कर्मचारियों की नियुक्तियों की उच्चस्तरीय जांच की जाए।
- शासनादेश के अनुरूप पदों की वैधता और सेवा निरंतरता की पूरी समीक्षा की जाए।
- यदि किसी वित्तीय अनियमितता या नियम विरुद्ध नियुक्ति का पता चलता है, तो संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए।
यह मुद्दा न केवल उत्तराखंड के बेरोजगार युवाओं के लिए एक चुनौती बन गया है, बल्कि सरकार की कार्यशैली पर भी सवाल उठाता है। क्या मुख्यमंत्री इस मुद्दे पर गंभीरता से कार्रवाई करेंगे? यह देखना महत्वपूर्ण होगा। इस मामले में ताजगी और उम्मीद दोनों बंधी हुई हैं।
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सुमन कुमारी
Team Kharchaa Pani
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