आत्मनिर्भर भागीरथी घाटी: धराली आपदा के एक साल बाद 33 करोड़ के विकास कार्यों से आई सकारात्मक बदलाव
एक साल पहले 5 अगस्त को आई भीषण आपदा ने धराली और आसपास की भागीरथी घाटी को गहरे जख्म दिए थे। कुछ ही पलों में मलबे ने वर्षों की मेहनत को अपनी चपेट में ले लिया। घर-दुकान, खेत-खलिहान, बाग-बगीचे, पशुधन और आजीविका के साधन प्रभावित हुए। चारों ओर मलबा, मायूसी और भविष्य को लेकर अनिश्चितता … The post धराली आपदा के एक साल बाद बड़ा बदलाव! 33 करोड़ के काम से बदली पूरी भागीरथी घाटी की तस्वीर appeared first on Khabar Uttarakhand - Uttarakhand News.
धराली आपदा के एक साल बाद बड़ा बदलाव! 33 करोड़ के काम से बदली पूरी भागीरथी घाटी की तस्वीर
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कम शब्दों में कहें तो, एक साल बाद भीषण धराली आपदा ने भागीरथी घाटी की तस्वीर को बदलने में मदद की है।
5 अगस्त 2022 को आई भीषण आपदा ने धराली और इसके आस-पास की भागीरथी घाटी में जान-माल के भारी नुकसान किया। मात्र कुछ ही पलों में आई तबाही ने सालों की मेहनत को मलबे में बदल दिया। घर, दुकानें, खेत-खलिहान, बाग-बगीचे, पशुधन, और आजीविका के साधन पूरी तरह से प्रभावित हुए। आपदा के बाद चारों ओर मलबा, मायूसी और अनिश्चितता का माहौल बन गया था।
आपदा के एक साल बाद धराली की तस्वीर
हालांकि, एक साल बाद आज धराली, हर्षिल और भटवाड़ी में पुनर्निर्माण की एक नई तस्वीर दिख रही है। सड़कें और अन्य आधारभूत सुविधाएं फिर से बहाल हो रही हैं, खेतों में हरियाली लौट आई है, और स्थानीय अर्थव्यवस्था अपनी पुरानी गति पकड़ने लगी है। आपदा से उपजी निराशा की जगह अब पुनर्निर्माण का विश्वास गहराता जा रहा है।
मुख्यमंत्री का उद्देश्य
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार ने आपदा के पहले दिन से ही ‘राहत-बचाव से पुनर्वास और पुनर्विकास’ की नीति अपनाई। सीएम खुद प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करते रहे, प्रभावित परिवारों से मुलाकात की, और राहत कार्यों की लगातार निगरानी की। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि प्रभावितों की सहायता और आधारभूत सुविधाओं की बहाली में किसी भी स्तर पर देरी नहीं होनी चाहिए।
धामी सरकार के प्रयास
पिछले एक साल में, धामी सरकार ने भागीरथी घाटी में धीरे-धीरे जीवनदायिनी योजनाएं लागू की हैं। सरकार ने केवल आपदा से हुए नुकसान की भरपाई पर ध्यान नहीं दिया, बल्कि लोगों की जिंदगी और स्थानीय अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करने के लिए भी व्यापक कार्य किए हैं। विभिन्न विभागों के माध्यम से 16 करोड़ रुपये के विकास और पुनर्वास कार्य किए गए। इसके अलावा, प्रभावित परिवारों को अलग-अलग मदों में 17 करोड़ रुपये से अधिक की आर्थिक सहायता दी गई। इस तरह, पिछले एक साल में 33 करोड़ रुपये के विकास, पुनर्वास और आर्थिक सहायता के कार्यों के माध्यम से प्रभावित क्षेत्र और परिवारों को पुनर्निर्माण का मौका मिला है।
आजीविका का उत्थान
आपदा के बाद कई परिवारों के लिए आजीविका की समस्या सबसे बड़ी चुनौती थी। कुछ के बाग-बगीचे उजड़ गए तो कुछ की फसल या व्यापार प्रभावित हुआ। इसीलिए सरकार ने पुनर्वास को केवल निर्माण कार्यों तक सीमित नहीं रखा।
सरकार ने बकरी और भेड़ पालन को प्रोत्साहित किया, उद्यानों की क्षति के लिए मुआवजा दिया, और किसानों को फसल तथा पौध वितरण में सहायता प्रदान की। कृषि गतिविधियों को फिर से जीवित करने के लिए सब कुछ किया गया। सिंचाई व्यवस्था, पेयजल और विद्युत लाइनों को दुरुस्त करने का काम तेजी से किया गया है।
भविष्य के लिए तैयारी
क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत और पुनर्निर्माण पर भी ध्यान दिया गया है। साथ ही, नदी किनारे बाढ़ सुरक्षात्मक कार्यों को भी आगे बढ़ाया गया है, ताकि क्षेत्र भविष्य में किसी भी संभावित आपदा से सुरक्षित रहे।
भागीरथी घाटी में पर्यटन गतिविधियों का पुनर्जीवन भी बहुत महत्वपूर्ण है। इससे स्थानीय कारोबार और रोजगार को फिर से गति मिलेगी।
इन सभी प्रयासों ने धराली और उसके आस-पास की भूमि की तस्वीर को सकारात्मक दिशा में बदलने में सहायता की है। आज भागीरथी घाटी फिर से अपने नागरिकों के लिए एक नई उपस्थिति के साथ खड़ी है।
आपदा के बाद के इस सकारात्मक बदलाव के लिए सरकार और स्थानीय आबादी की मेहनत को सराहना आवश्यक है।
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साभार, टीम खर्चा पानी – साक्षी शर्मा
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