हरिद्वार में नया यात्रायोजना: रोपवे से मिनटों में होंगे दर्शन, जाम से मिलेगी बड़ी राहत
हरिद्वार में प्रस्तावित इंटीग्रेटेड रोपवे परियोजना अब तेजी पकड़ती दिख रही है। सचिवालय में हुई उच्चस्तरीय बैठक में इस प्रोजेक्ट को जल्द जमीन पर उतारने के निर्देश दिए गए हैं। बता दें इस परियोजना के बाद शहर की काफी हद तक तस्वीर बदलने की उम्मीद है। सचिव आवास ने की हरिद्वार रोपवे परियोजना की समीक्षा …
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कम शब्दों में कहें तो हरिद्वार में प्रस्तावित इंटीग्रेटेड रोपवे परियोजना एक नई दिशा में तेजी से बढ़ रही है। सचिवालय में हाल ही में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में इस प्रोजेक्ट को जल्दी कार्यान्वयन के निर्देश दिए गए हैं। यह परियोजना हरिद्वार की छवि और यातायात प्रणाली में मौलिक परिवर्तन ला सकती है।
हरिद्वार रोपवे परियोजना की समीक्षा
सचिवालय में सचिव आवास डॉ. आर. राजेश कुमार ने उत्तराखंड मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन द्वारा प्रस्तावित इस महत्वाकांक्षी रोपवे परियोजना की विस्तृत समीक्षा की। बैठक में परियोजना के कार्यान्वयन, लागत, भूमि हस्तांतरण, कन्सेशन अवधि और वित्तीय व्यवहार्यता जैसे प्रमुख मुद्दों पर गहन चर्चा की गई। सचिव आवास ने अधिकारियों को समयबद्ध तरीके से सभी प्रक्रियाओं को संपन्न करने के निर्देश दिए।
क्या होंगे बड़े लाभ?
इस रोपवे परियोजना के सबसे बड़े फायदों में ट्रैफिक जाम से राहत शामिल है। विशेषकर कांवड़ यात्रा, छुट्टियों और त्योहारों के दौरान हरिद्वार में लगने वाले भारी जाम से लोगों को मुक्ति मिलेगी। श्रद्धालु और पर्यटक सीधे रोपवे के माध्यम से अपने गंतव्य तक तेजी से पहुंच सकेंगे, जिससे गंगा घाट और अन्य प्रमुख धार्मिक स्थलों तक उनकी पहुंच भी सरल होगी। इसके परिणामस्वरूप यात्रा का समय भी घटेगा, जो बुजुर्गों और महिलाओं के लिए विशेष रूप से फायदेमंद होगा।
रोपवे का निर्माण PPP मॉडल पर किया जाएगा
यह महत्वपूर्ण परियोजना पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल के तहत विकसित की जाएगी। उत्तराखंड मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन के अनुसार, डीबीएफओटी (Design, Build, Finance, Operate, Transfer) मॉडल के तहत निजी कंपनियों को इसकी निर्माण और संचालन की जिम्मेदारी दी जाएगी। रोपवे की निर्माण लागत लगभग 75 करोड़ रुपये प्रति किलोमीटर आंकी गई है, जिसमें स्टेशन और अन्य सुविधाओं की लागत अलग होगी।
भूमि और प्रक्रिया पर कार्य तेजी से
इस परियोजना के लिए आवश्यक भूमि उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग के पास है। इसे 99 साल की लीज पर लेने की प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश दिए गए हैं। इसके साथ ही, प्रोजेक्ट की कन्सेशन अवधि को बढ़ाने पर भी विचार किया जा रहा है, ताकि निवेशकों की रुचि बनी रहे और परियोजना की वित्तीय मजबूती सुनिश्चित हो सके।
रोपवे परियोजना कब शुरू होगी?
वर्तमान में यह परियोजना डीपीआर (डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट) स्तर पर है और इसे जल्द ही ईएफसी (एक्सपर्स फाइनेंस कमेटी) मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि सभी औपचारिकताएं समय पर पूरी की जाएं ताकि परियोजना का कार्य जल्दी शुरू हो सके। सचिव आवास डॉ. आर. राजेश कुमार का कहना है कि यह रोपवे हरिद्वार में परिवहन व्यवस्था को एक नया आयाम देगा और तीर्थयात्रियों को सुरक्षित और आधुनिक सुविधा प्रदान करेगा।
इस प्रकार, हरिद्वार का रोपवे परियोजना केवल परिवहन साधन नहीं, बल्कि शहर के विकास में एक महत्वपूर्ण योगदान देने के लिए भी तैयार है। इसे लागू करने से न केवल स्थानीय लोगों को बल्कि पर्यटकों को भी अपार लाभ होगा।
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सादर,
टीम ख़र्चा पानी - सुषमा
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